IT सेक्टर में चल रही सुस्ती और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के माहौल के बावजूद, Wipro ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। कंपनी ने 1 मार्च, 2026 से सभी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कई IT कंपनियाँ खर्चों को लेकर सतर्क हैं और वेतन वृद्धि को टाल रही हैं।
Wipro का यह फैसला असल में टैलेंट को बनाए रखने की एक बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। AI, क्लाउड और साइबर सिक्योरिटी जैसे हाई-डिमांड वाले सेक्टर्स में कुशल पेशेवरों के लिए कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ गया है। कंपनी का पिछला इंक्रीमेंट साइकिल सितंबर 2024 में हुआ था, और अब यह वेतन वृद्धि की प्रक्रिया को सामान्य कर रही है। हालांकि, कंपनी के शेयर की चाल इस वक्त थोड़ी चिंताजनक है। फरवरी 2026 की शुरुआत में, Wipro का शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर $2.40 से $2.55 के दायरे में कारोबार कर रहा था। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो भी लगभग 17.2x पर है, जो पिछले पांच सालों के सबसे निचले स्तरों में से एक है और TCS व Infosys जैसे प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले काफी कम है।
भारतीय IT सेक्टर में इस वक्त एक मिला-जुला माहौल है। जहाँ एक ओर ग्लोबल IT खर्च 2026 तक $6 ट्रिलियन के पार जाने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर में निवेश है, वहीं दूसरी ओर एंड-यूज़र डिवाइसेस (end-user devices) जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ धीमी पड़ने की उम्मीद है। इस परिदृश्य में, Wipro की प्रतिद्वंद्वी कंपनियाँ भी अपने रणनीतिक कदम उठा रही हैं। TCS ने जहाँ ज़्यादातर वेरिएबल पे (variable pay) पर ध्यान केंद्रित किया है, वहीं Infosys ने वेतन वृद्धि को चरणों में पूरा किया है।
इन सब के बीच, एनालिस्ट्स (analysts) Wipro के शेयर को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों, जिनमें Morgan Stanley भी शामिल है, ने हाल ही में रेटिंग को 'मॉडरेट सेल' (Moderate Sell) की श्रेणी में रखा है। यह शेयर के 52-हफ्ते के निचले स्तर को छूने और महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज (moving averages) से नीचे ट्रेड करने की वजह से है। Wipro ने Q3 FY26 में स्थिर रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर मार्जिन दिखाया था, लेकिन Q4 FY26 के लिए कंपनी का गाइडेंस (guidance) बहुत ही मामूली 0% से 2% रेवेन्यू ग्रोथ का है। भू-राजनीतिक तनाव, ट्रेड वॉर (trade war) और बढ़ते साइबर खतरे (cyber threats) भी आगे के आउटलुक को और अनिश्चित बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Wipro अपनी अपेक्षित रेवेन्यू ग्रोथ हासिल नहीं कर पाती है, तो वेतन वृद्धि का यह फैसला कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकता है। यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपनी AI-संचालित पहलों (AI-led initiatives) और बड़े डील्स को भुनाने में कितनी सफल होती है। फिलहाल, एनालिस्ट्स का औसत टारगेट प्राइस (average price target) सीमित ऊपरी संभावनाओं का संकेत देता है, लेकिन ओवरऑल 'मॉडरेट सेल' की राय बनी हुई है।