Wipro: एट्रिशन में आई कमी, पर Hiring की धीमी रफ़्तार पर उठे सवाल!

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AuthorKaran Malhotra | Whalesbook News Team

Overview

Wipro के निवेशकों के लिए Q4FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी की कर्मचारी एट्रिशन दर (attrition rate) घटकर **13.8%** पर आ गई है, जो पिछले **14.2%** से कम है। हालांकि, इस तिमाही में केवल **135** नए कर्मचारियों को जोड़ने से कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

क्या हैं कंपनी के नतीजे?

Wipro ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही (Q4FY26) में अपनी कर्मचारी एट्रिशन दर को पिछले तिमाही के 14.2% से घटाकर 13.8% कर लिया है। यह कंपनी के लिए एक पॉजिटिव संकेत है, जो बताता है कि कर्मचारियों को बनाए रखने में सुधार हुआ है। इस तिमाही में कंपनी ने 135 नेट कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ा है, जिससे कुल कर्मचारियों की संख्या 2,42,156 हो गई है। पूरे फाइनेंशियल ईयर के अंत तक कंपनी के पास 5,84,519 कर्मचारी थे। हालांकि, यह Hiring की रफ्तार इंडस्ट्री के पुराने ग्रोथ फेज की तुलना में काफी धीमी है।

Competitors से पिछड़ रही है Wipro?

एट्रिशन दर में सुधार IT सेक्टर के व्यापक ट्रेंड के अनुरूप है, क्योंकि IT कंपनियां ग्राहकों की बदलती मांग के अनुसार खुद को एडजस्ट कर रही हैं। Infosys और HCLTech जैसी कंपनियां भी स्थिर एट्रिशन दर दिखा रही हैं। दूसरी ओर, Tata Consultancy Services (TCS) जैसी बड़ी कंपनियों में एट्रिशन 13% से भी कम है और वे Wipro की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से Hiring कर रही हैं, जिसका श्रेय उनके बड़े मार्केट वैल्यू और साइज को जाता है। IT सेक्टर में पेंडेमिक के बाद ग्रोथ नॉर्मलाइज हो रही है, और क्लाइंट्स अब बड़े डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर अधिक सावधानी बरत रहे हैं।

धीमी Hiring से भविष्य में चुनौतियां?

बेहतर एट्रिशन दर के बावजूद, Wipro के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। धीमी Hiring, जो तत्काल लागतों को कम कर सकती है, भविष्य में नए प्रोजेक्ट्स जीतने और सेवाओं को प्रभावी ढंग से डिलीवर करने में मुश्किलें पैदा कर सकती है, खासकर TCS जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में। कंपनी के फाइनेंशियल सेटअप पर करीब से नजर रखने की जरूरत है, खासकर कम कर्ज वाले प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले। Wipro को एक्वीजीशन (acquisitions) को इंटीग्रेट करने और प्रॉफिट मार्जिन सुधारने को लेकर भी सवालों का सामना करना पड़ा है। अगर कंपनी के प्रमुख सर्विसेज में मंदी आती है या क्लाइंट्स की ओर से प्राइसिंग पर दबाव बना रहता है, तो Wipro के महत्वाकांक्षी ग्रोथ टारगेट को हासिल करना मुश्किल हो सकता है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन (valuation) पर असर पड़ सकता है। एनालिस्ट्स (Analysts) चेतावनी दे रहे हैं कि अगर Wipro ने रेवेन्यू ग्रोथ की रफ्तार नहीं बढ़ाई तो वह मार्केट शेयर खोने का जोखिम उठा सकती है।

आगे क्या?

आगे चलकर, Wipro को यह दिखाना होगा कि वह अपने स्थिर वर्कफोर्स (workforce) को तेज रेवेन्यू ग्रोथ में कैसे बदल सकती है। एनालिस्ट्स के व्यूज ज्यादातर मिले-जुले या सतर्क हैं, और प्राइस टारगेट मौजूदा ट्रेडिंग लेवल के आसपास ही हैं। कंपनी संभवतः एफिशिएंसी (efficiency) पर ध्यान केंद्रित करेगी और बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स हासिल करने की कोशिश करेगी। कर्मचारियों की संख्या में कितनी तेजी से बढ़ोतरी होती है, यह भविष्य के मार्केट अवसरों को भुनाने में कंपनी के आत्मविश्वास का एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।

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