VMS TMT Share Price: निवेशकों को बड़ा झटका! IPO फंड के इस्तेमाल पर सवाल, शेयर **50%** धड़ाम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
VMS TMT Share Price: निवेशकों को बड़ा झटका! IPO फंड के इस्तेमाल पर सवाल, शेयर **50%** धड़ाम
Overview

VMS TMT LIMITED ने हाल ही में अपने Q3 FY26 के नतीजे घोषित किए हैं, जिसमें रेवेन्यू में **10.42%** की तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ दर्ज की गई है। हालाँकि, कंपनी **₹2.81 करोड़** के IPO फंड के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में है, और इसके शेयर IPO मूल्य से **50%** नीचे गिर गए हैं।

नतीजे और फंड के इस्तेमाल पर सवाल

VMS TMT LIMITED ने Q3 FY26 (वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही) के लिए अपने अनऑडिटेड स्टैंडअलोन नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में 10.42% की मजबूत तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) बढ़ोतरी देखी गई है, जो कि ₹202.13 करोड़ पर पहुंच गई है। पिछली तिमाही में यह ₹183.06 करोड़ थी। इस तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) ₹8.04 करोड़ रहा। वहीं, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में, कंपनी ने ₹597.45 करोड़ का रेवेन्यू और ₹18.74 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जिसका EPS ₹4.67 रहा। कंपनी हाल ही में 24 सितंबर 2025 को शेयर बाजार में लिस्ट हुई है, इसलिए पिछले साल की इसी तिमाही से तुलना उपलब्ध नहीं है।

फंड डायवर्जन का खुलासा

लेकिन, कंपनी के निवेशकों के लिए चिंता का मुख्य कारण IPO फंड का इस्तेमाल है। कंपनी की निगरानी एजेंसी, CARE Ratings ने ₹2.81 करोड़ के IPO फंड के इस्तेमाल में एक बड़े विचलन (Deviation) का खुलासा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, IPO से जुटाई गई रकम, जो लोन चुकाने के लिए आवंटित की गई थी, उसका उपयोग वर्किंग कैपिटल के लिए किया गया।

कंपनी का स्पष्टीकरण

हालांकि, कंपनी का कहना है कि सभी बकाया सुविधाएं बैंक की मंजूरी के बाद चुका दी गई हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन सुविधाओं का भुगतान 4 फरवरी 2026 को कर दिया गया था और SVC बैंक ने 'नो-ड्यूज सर्टिफिकेट' (No-dues Certificate) भी जारी कर दिया है। ऑडिट कमेटी ने भी इस स्पष्टीकरण को नोट किया है।

शेयर में भारी गिरावट

इन सबके बीच, VMS TMT का स्टॉक अपने IPO प्राइस ₹99 की तुलना में काफी निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। 10 फरवरी 2026 को शेयर ₹51.01 पर बंद हुआ, जो कि इश्यू प्राइस से लगभग 50% कम है। IPO फंड के उपयोग में यह अनपेक्षित कदम, भले ही कंपनी द्वारा सुलझा लिया गया हो, शुरुआती सार्वजनिक लिस्टिंग के दिनों में कंपनी के वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है और निवेशकों के भरोसे को हिलाता है।

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