क्यों रद्द हुई ₹25,000 करोड़ की डील?
उत्तर प्रदेश सरकार ने AI स्टार्टअप Puch AI के साथ हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को गुरुवार, 26 मार्च, 2026 को रद्द करने का फैसला किया। यह वही समझौता था जो हाल ही में 23 मार्च, 2026 को साइन किया गया था। सरकार ने इस बड़े टेक प्रोजेक्ट के लिए Puch AI की ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) प्रक्रिया में विफल रहने को कारण बताया है। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी के पास पर्याप्त नेट वर्थ नहीं था और उसकी फाइनेंशियल क्रेडिबिलिटी पर संदेह था। साथ ही, कंपनी समय पर जरूरी फाइनेंशियल डिटेल्स भी मुहैया नहीं करा पाई।
UP का AI हब बनने का सपना और Puch AI की स्थिति
यह घटना उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख AI हब बनने के विजन के बीच आई है, जिसके तहत AI पार्क, बड़े डेटा सेंटर, AI यूनिवर्सिटी और लखनऊ में 'AI सिटी' बनाने की योजनाएं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट किया था कि ऐसे एमओयू (MoU) शुरुआती होते हैं और पूरी तरह जांच के अधीन होते हैं।
₹25,000 करोड़ के इस सौदे का रद्द होना, भारत के स्टार्टअप सेक्टर और राज्यों की निवेश रणनीतियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। Puch AI, जो जून 2025 में ही शुरू हुआ था और जिसके किसी भी फंडिंग राउंड या खास रेवेन्यू (Revenue) की जानकारी सार्वजनिक नहीं है, ऐसी बड़ी परियोजनाओं की क्षमता साबित करने में जूझ रहा है। भारत में एमओयू (MoU) आम तौर पर शुरुआती, गैर-बाध्यकारी समझौते होते हैं, जिनके बाद निवेशक की क्षमता का पुख्ता मूल्यांकन जरूरी होता है। Puch AI के सह-संस्थापक सिद्धार्थ भाटिया ने इसे पब्लिक-प्राइवेट इनिशिएटिव (Public-Private Initiative) बताया था, पर राज्य के वेरिफिकेशन मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
सरकारी प्रतिष्ठा और भविष्य पर असर
इस डील के रद्द होने से उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इतनी बड़ी डील का इतनी जल्दी रद्द होना भविष्य के निवेशकों को हतोत्साहित कर सकता है, क्योंकि यह अपर्याप्त जांच का संकेत देता है। अपोजिशन लीडर अखिलेश यादव ने राज्य के सभी एमओयू (MoU) की जांच की मांग की है।
Puch AI के लिए, यह रद्द होना उसकी क्रेडिबिलिटी (Credibility) को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और भविष्य में फंडिंग जुटाने में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। यह घटना राज्यों को अपनी निवेश प्रमोशन रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि भविष्य में ऐसे सौदे केवल कागजों पर न रहें।