भारत में ग्लोबल टेक हब का निर्माण
Uber भारत में अपने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर (Technology Infrastructure) का जबरदस्त विस्तार कर रहा है। कंपनी की योजना 2027 के अंत तक दो बड़े टेक हब (Tech Hubs) तैयार करने की है। इनमें से बेंगलुरु वाला टेक हब अमेरिका के बाहर Uber के सबसे बड़े ग्लोबल टेक हब में से एक होगा, जिसे 5,000 कर्मचारियों के लिए 1.1 मिलियन स्क्वायर फीट की जगह में विकसित किया जाएगा। हैदराबाद में दूसरा केंद्र 4,600 कर्मचारियों के लिए 901,115 स्क्वायर फीट में बनेगा। इसके अलावा, Uber इस साल के अंत तक Adani Group के साथ मिलकर भारत में अपना पहला डेटा सेंटर (Data Center) लॉन्च करने के लिए साझेदारी कर रहा है। इन कदमों से भारत के डिजिटल परिदृश्य (Digital Landscape) में Uber की गहरी प्रतिबद्धता और देश को इनोवेशन इंजन के रूप में इस्तेमाल करने की उसकी मंशा साफ दिखती है।
2-Wheeler सेगमेंट पर बढ़ता फोकस
इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ-साथ, Uber भारत के 2-Wheeler मार्केट पर भी अपना जोर बढ़ा रहा है। यह सेगमेंट कंपनी के लिए ग्रोथ का एक अहम जरिया बन गया है। इस पर यह फोकस ऐसे समय में बढ़ा है जब Rapido जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिन्होंने बाइक-टैक्सी और ऑटो-रिक्शा सेवाओं में बड़ी पैठ बनाई है। Uber ने फरवरी 2026 में अपनी भारतीय सब्सिडियरी (Subsidiary) में लगभग $330 मिलियन का निवेश किया था, ताकि अपनी स्थिति मजबूत कर सके। हालाँकि 4-Wheeler मार्केट में Uber की अच्छी पकड़ है, लेकिन Rapido अब कुल राइड्स में आगे है और कुछ सेगमेंट में हावी है। ऐसे में Uber को इस अहम और प्राइस-सेंसिटिव मार्केट के लिए अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है।
भारत के राइड-हेलिंग मार्केट की ग्रोथ
ये सभी निवेश ऐसे समय में हो रहे हैं जब भारत का राइड-हेलिंग मार्केट (Ride-hailing Market) जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद दिखा रहा है। अनुमान है कि FY2032 तक यह $3.7 बिलियन से अधिक का हो सकता है, जिसमें अनुमानित 18.78% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिलेगी। शहरीकरण (Urbanization) और डिजिटल पहुंच (Digital Access) इस विस्तार को बढ़ावा दे रहे हैं। Uber के CEO दारा खोसरोशाही ने बताया कि जहाँ दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और ईंधन की बढ़ती कीमतें (Rising Fuel Costs) दूसरे बाजारों को प्रभावित कर रही हैं, वहीं भारत में Uber के प्रॉफिट मार्जिन पर इसका अब तक खास असर नहीं देखा गया है, जैसा कि अमेरिका में हुआ है। हालांकि, LPG और CNG की बढ़ती कीमतें भारतीय ट्रांसपोर्ट सेक्टर को प्रभावित कर सकती हैं। Uber के टेक सेंटर बनाने की योजनाएं भारत की 'Create in India' पहल के अनुरूप भी हैं, जो कंपनी को देश की अर्थव्यवस्था में और एकीकृत करती हैं।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और वित्तीय चुनौतियाँ
भारत में Uber को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Rapido, खासकर 2- और 3-Wheeler सेगमेंट में, एक बड़ा खिलाड़ी है और दावा करता है कि वह Uber India से ज्यादा डेली राइड्स हैंडल करता है। Rapido का ड्राइवर-फ्रेंडली जीरो-कमीशन मॉडल Uber की कमीशन-आधारित कमाई पर दबाव डालता है। Uber India की सब्सिडियरी ने FY25 के लिए राइड-हेलिंग नेट रेवेन्यू (Net Revenue) में 89% की गिरावट दर्ज की है, साथ ही नुकसान बढ़ा है, जिसका एक कारण ड्राइवर इंसेंटिव (Driver Incentives) पर ज्यादा खर्च है। ईंधन की कीमतें भले ही अभी Uber के भारतीय मार्जिन को प्रभावित न करें, लेकिन सप्लाई की समस्याएँ परिचालन लागत (Operational Costs) और किराए बढ़ा सकती हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों में रेगुलेटरी अंतर (Regulatory Differences) को नेविगेट करना भी एक लगातार चुनौती है। Uber को अतीत में भी भारत में दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं, जैसे कि Uber Eats सेवा को बंद करना।
विश्लेषकों का नज़रिया और वित्तीय प्रदर्शन
विश्लेषक (Analysts) आम तौर पर Uber को सकारात्मक रूप से देखते हैं। 'Strong Buy' रेटिंग और $105.01 से $108.21 का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस, ग्रोथ की संभावनाओं का संकेत देता है। कंपनी का पिछला बारह महीने का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 18-19 है, जो इंडस्ट्री के औसत से कम है, जिससे यह एक आकर्षक वैल्यूएशन (Attractive Valuation) साबित हो सकता है। कंपनी ने फर्स्ट क्वार्टर 2026 के लिए $0.72 प्रति शेयर की कमाई (EPS) दर्ज की, जो उम्मीदों से बेहतर थी। दूसरे क्वार्टर के लिए, Uber ने $0.78 से $0.82 प्रति शेयर का गाइडेंस (Guidance) दिया है। अपने भारतीय टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को इस बड़े ग्लोबल मार्केट में Uber के लॉन्ग-टर्म विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
