भारत बन रहा है AI का ग्लोबल हब
यह बड़ा इन्वेस्टमेंट भारत को AI डेवलपमेंट और डेटा प्रोसेसिंग के लिए एक अहम ग्लोबल सेंटर के तौर पर स्थापित करेगा। Microsoft, Amazon और Google इस प्रोजेक्ट में मिलकर $67.5 अरब की पूंजी लगा रहे हैं।
कंपनियों का बड़ा दांव:
- Microsoft $17.5 अरब का निवेश करेगी।
- Amazon $35 अरब का भारी निवेश करेगी।
- Google $15 अरब का निवेश करेगी।
भारत का बढ़ता Data Center मार्केट
US की बड़ी कंपनियों के अलावा, भारत का डेटा सेंटर मार्केट वैसे भी काफी मजबूत और प्रतिस्पर्धी है। Nxtra (Airtel), CtrlS, ST Telemedia Global Data Centres (STT GDC), Yotta Infrastructure, AdaniConneX, और Reliance Data Centers जैसी कंपनियां, साथ ही Equinix जैसी विदेशी फर्म भी यहां तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। क्लाउड एडॉप्शन, AI और 5G वर्कलोड्स, 'डिजिटल इंडिया' जैसी सरकारी पहल और डेटा लोकलाइजेशन नीतियों के चलते यह सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। 'डिजिटल इंडिया' की मुहिम और डेटा को देश में ही रखने की नीतियों का फायदा उठाते हुए, हाइपरस्केल डेटा सेंटर अब भारतीय बाजार में 56% का दबदबा रखते हैं। AI से प्रेरित इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार एक नया ट्रेंड है, और अनुमान है कि 2027 तक भारत का AI सेक्टर $17 अरब तक पहुंच सकता है।
सरकारी नीतियां और भविष्य की राह
इस बड़े निवेश के पीछे भारत सरकार की नीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। सरकार ने डेटा सेवाओं से होने वाली विदेशी आय पर 20 साल का टैक्स ब्रेक देने का ऐलान किया है, जिससे भारत ग्लोबल ऑपरेशंस के लिए एक आकर्षक हब बन गया है। इन टैक्स इंसेंटिव्स, डिजिटल मांग में उछाल और बड़े टेक टैलेंट पूल के साथ, यह इन्वेस्टमेंट सिर्फ एनर्जी कॉस्ट की चिंताओं से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हालाँकि, बड़े डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और पानी की जरूरत एक बड़ी चिंता बनी हुई है। साथ ही, AI ऑपरेशंस के लिए कुशल वर्कफोर्स की उपलब्धता पर भी सवाल हैं; 74% भारतीय CEOs इसे कंपनी के भविष्य के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रिक्शन जैसी भू-राजनीतिक समस्याएं भी ऑपरेशनल चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं, हालांकि वर्तमान निवेश का पैमाना इन चिंताओं को गौण बताता है।
आगे क्या?
आने वाले समय में भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक लगभग 4.5 GW तक तिगुनी होने की उम्मीद है। यह विस्तार भारत के तेजी से बढ़ते AI सेक्टर और डिजिटल इकॉनमी को सपोर्ट करने के लिए बेहद ज़रूरी है। सरकार के समर्थन, भारी विदेशी निवेश और घरेलू मांग का संगम यह सुनिश्चित करता है कि भारत सिर्फ AI का उपभोक्ता नहीं, बल्कि इसके वैश्विक वितरण का एक अभिन्न केंद्र बनेगा।
