UPI की विदेशी उड़ान: रिकॉर्ड ट्रांजैक्शन और ग्लोबल विस्तार
भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अपने अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में, UPI ने एक मिलियन (10 लाख) से ज़्यादा ट्रांजैक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है, जो इसके ग्लोबल विस्तार की ज़बरदस्त सफलता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय उछाल: एक बड़ा मील का पत्थर
पिछले साल की तुलना में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगभग दोगुना बढ़कर 1.48 मिलियन हो गया है, जबकि FY25 में यह सिर्फ़ 0.75 मिलियन था। वहीं, इन ट्रांजैक्शन्स की वैल्यू बढ़कर ₹330.43 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹258.53 करोड़ थी। FY24 में तो यह आंकड़ा महज़ 37,060 ट्रांजैक्शन और ₹19.7 करोड़ वैल्यू का था, जो दर्शाता है कि UPI कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में UPI 8 देशों – भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात – में सक्रिय है।
रणनीति और मर्चेंट ऑनबोर्डिंग
यह ज़बरदस्त ग्रोथ NPCI International की आक्रामक ग्लोबल विस्तार रणनीति का नतीजा है। कंपनी की योजना अब जापान और मलेशिया जैसे बड़े बाज़ारों में भी कदम रखने की है। NPCI International, जो नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का ग्लोबल आर्म है, ने 2 मिलियन से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट्स (Merchants) को सफलतापूर्वक ऑनबोर्ड किया है। यह कदम भारतीय यात्रियों और विदेशी ग्राहकों दोनों के लिए पेमेंट को आसान बनाने में अहम है। UPI का यह उभार भारत को ग्लोबल फिनटेक (Fintech) परिदृश्य में एक मज़बूत खिलाड़ी के तौर पर स्थापित कर रहा है, जो Visa और Mastercard जैसे सिस्टम को एक सस्ता और कुशल विकल्प दे रहा है।
भविष्य की राह: चुनौतियाँ और अवसर
NPCI International का लक्ष्य 2027 तक UPI को 20 से ज़्यादा देशों में ले जाना है। हालांकि, जापान और मलेशिया जैसे नए बाज़ारों में उतरने के लिए वहाँ के रेगुलेटरी (Regulatory) नियमों और स्थानीय पेमेंट सिस्टम के साथ तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती होगी। साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर भी खास ध्यान देना होगा। इन चुनौतियों के बावजूद, UPI की ग्लोबल यात्रा बेहद उम्मीदों भरी है और यह भारत के डिजिटल इकोनॉमी की ताकत का प्रमाण है।