📉 मुनाफे में भारी गिरावट, रेवेन्यू बढ़ा: नंबर्स क्या कहते हैं?
Trigyn Technologies ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (31 दिसंबर 2025 को समाप्त) के नतीजे पेश किए हैं। इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू तो 24.8% बढ़कर ₹25,803.19 लाख हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹20,669.68 लाख था। लेकिन, रेवेन्यू में इस ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 44.0% गिरकर सिर्फ ₹69.12 लाख रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹123.48 लाख था।
वहीं, स्टैंडअलोन (Standalone) लेवल पर तो हालत और भी खराब है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 78.6% की जोरदार छलांग लगाकर ₹6,279.23 लाख तक पहुंच गया। मगर, स्टैंडअलोन PAT में 83.9% की भारी गिरावट आई और यह ₹132.93 लाख पर आ गया, जो पिछले साल ₹825.93 लाख था। चिंता की बात यह है कि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में स्टैंडअलोन बिजनेस ने ₹518.09 लाख का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹68.27 लाख का प्रॉफिट था।
🚨 ऑडिटर की गंभीर चेतावनियां
कंपनी के नंबर्स के पीछे की कहानी और भी चिंताजनक है। कंपनी के स्टैट्युटरी ऑडिटर (Statutory Auditors) ने अपनी लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं, जिन्होंने नतीजों पर गहरा साया डाल दिया है:
- ₹80 करोड़ की रेवेन्यू बुकिंग नहीं: ऑडिटर ने बताया है कि कंपनी ने ₹8000 लाख (यानी ₹80 करोड़) के गारंटीड रेवेन्यू को कलेक्शन में 'अनिश्चितता' के चलते अकाउंट्स में बुक ही नहीं किया। यह कंपनी की रेवेन्यू रिकग्निशन पॉलिसी पर सवाल उठाता है और कंपनी की असली वित्तीय सेहत पर संदेह पैदा करता है।
- नाशिक प्रोजेक्ट विवाद: कंपनी को एक बड़े नाशिक पार्किंग प्रोजेक्ट के लिए टर्मिनेशन नोटिस मिला है और मामला कमर्शियल आर्बिट्रेशन में है। सबसे बड़ी बात यह है कि 20 अक्टूबर 2025 को बैंक गारंटी (Bank Guarantee) इनवोक कर ली गई, जिससे बैलेंस शीट पर ₹3.75 करोड़ का अन-अमोटाइज्ड कैपिटल कॉस्ट (Unamortized Capital Cost) अटक गया है, जो एक संभावित राइट-ऑफ (Write-off) हो सकता है।
- GST की डिमांड और कानूनी मामले: कंपनी के खिलाफ रिकवरी के लिए कई कानूनी मामले चल रहे हैं। इसके अलावा, GST डिपार्टमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 से 2022-23 तक इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) के डिसअलॉवेंस के चलते ₹9.08 करोड़ का शो कॉज नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। यह कंपनी पर बड़े कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liabilities) और संभावित कैश आउटफ्लो का खतरा है।
- सब्सिडियरी की हालत खस्ता: दो सब्सिडियरी कंपनियाँ, लीडिंग एज इन्फोटेक लिमिटेड (Leading Edge Infotech Limited) और ट्राइगिन टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Trigyn Technologies India Private Limited) को 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) बेसिस पर तैयार किया गया है, जबकि उनका नेट वर्थ नेगेटिव है। वे होल्डिंग कंपनी पर निर्भर हैं, जो ग्रुप लेवल पर वित्तीय कमजोरी का संकेत देता है। इन सब्सिडियरी के रिवाइवल, मर्जर या लिक्विडेशन के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
🚩 नया ऑर्डर, लेकिन खतरे हजार
इन सब चिंताओं के बीच, कंपनी को ₹119.74 करोड़ का भारतनेट प्रोजेक्ट फेज III (BharatNet Project Phase III) ऑर्डर मिला है। लेकिन, ऑडिटर द्वारा उठाए गए गंभीर वित्तीय, अकाउंटिंग और ऑपरेशनल मुद्दों को देखते हुए, यह नया ऑर्डर भी कंपनी के सामने मौजूद विशाल जोखिमों पर भारी नहीं पड़ पा रहा है। मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) न होने से निवेशकों के लिए आगे का रास्ता बेहद अनिश्चित और जोखिम भरा दिख रहा है। निवेशकों को यहाँ बेहद सतर्क रहने की सलाह है।