Data Evolve Solutions Private Limited का दावा है कि Digi Yatra प्लेटफॉर्म के लिए इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर और उससे जुड़े एप्लिकेशन उनके ही हैं। यह प्लेटफॉर्म देशभर के एयरपोर्ट्स पर इस्तेमाल हो रहा है। कंपनी ने हाई कोर्ट का रुख तब किया जब एक ट्रायल कोर्ट ने उनकी एक्स-पार्टे अंतरिम रोक की अर्जी खारिज कर दी थी।
जस्टिस मौशमी भट्टाचार्य और जस्टिस गादी प्रवीण कुमार की बेंच ने कमर्शियल कोर्ट को यह निर्देश दिया है कि वह Data Evolve की अंतरिम रोक वाली अर्जी का निपटारा चार हफ्तों के भीतर करे। कोर्ट ने माना कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) से जुड़े विवादों में अक्सर जल्दी फैसले की जरूरत होती है।
दिल्ली में भी चल रहा है विवाद
यह मामला सिर्फ तेलंगाना तक सीमित नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक मिलता-जुलता केस चल रहा है। वहां Digi Yatra Foundation ने Data Evolve पर 2021 के मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) एग्रीमेंट के तहत Digi Yatra सेंट्रल इकोसिस्टम के मालिकाना हक और नियंत्रण को लेकर केस किया है।
Data Evolve का आरोप है कि KPMG ने उनके सॉफ्टवेयर को क्लोन करके 28 एयरपोर्ट्स पर लागू कर दिया, जबकि MVP एग्रीमेंट में सिर्फ 4 एयरपोर्ट्स तक इस्तेमाल की इजाजत थी।
फाउंडेशन का रुख
Digi Yatra Foundation, जो मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के तहत एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है, ने मई 2021 में Data Evolve को चुना था। एग्रीमेंट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म की सारी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) फाउंडेशन की होगी, सिवाय Data Evolve के पहले से मौजूद सॉफ्टवेयर के। लेकिन, 2023 के अंत में मतभेद के बाद, फाउंडेशन ने जनवरी 2024 में डिसएंगेजमेंट लेटर जारी कर दिया। Data Evolve इस बात से इनकार करता है और उनका कहना है कि यह गलत तरीके से पेमेंट रोका गया है और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर पर उनका ही मालिकाना हक है।