प्रोजेक्ट में सफलता, शेयर में गिरावट: क्या है माजरा?
टाटा ग्रुप (Tata Group) समर्थित टेलीकॉम इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर Tejas Networks ने हाल ही में भारत की BharatNet Phase III परियोजना के लिए 17,000 IP/MPLS राउटर की डिलीवरी पूरी की है। ये राउटर अब नौ भारतीय राज्यों और पांच यूनियन टेरिटरीज़ में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। यह भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। लेकिन, शेयर बाजार ने इस खबर पर कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई और Tejas Networks के शेयर में 5.9% की गिरावट देखी गई। यह स्थिति निवेशकों के भरोसे की कमी को दर्शाती है, खासकर तब जब पिछले एक साल में स्टॉक में पहले से ही बड़ी गिरावट आ चुकी है।
BharatNet के लिए अहम राउटर सप्लाई
BharatNet पहल, जिसका लक्ष्य 55,000 से अधिक गांवों और 2,000 ब्लॉक को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ना है, के लिए 17,000 TJ1400 IP/MPLS राउटर की यह सप्लाई एक महत्वपूर्ण कदम है। Tejas Networks को इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 60,000 के करीब ऐसे राउटर सप्लाई करने हैं। कंपनी के TJ1400 राउटर टेराबिट-स्केल IP/MPLS नेटवर्क के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो स्केलेबिलिटी और विश्वसनीयता पर जोर देते हैं। बावजूद इसके कि कंपनी कई राज्यों में रोलआउट कर रही है और उसके पास एडवांस टेक्नोलॉजी है, शेयर का प्रदर्शन उम्मीदों से कम रहा। 30 मार्च, 2026 को करीब ₹390 पर ट्रेड कर रहे शेयर की कीमत पिछले बारह महीनों में लगभग 49.37% गिर चुकी है, जबकि इस फाइनेंशियल ईयर में यह लगभग 14.84% नीचे आया है। यह लगातार गिरावट दिखाती है कि बाजार की चिंताएं प्रोजेक्ट से जुड़ी सकारात्मक खबरों पर हावी हो रही हैं।
सेक्टर में ग्रोथ, पर कंपनी के वैल्यूएशन पर सवाल
भारत का टेलीकॉम सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण सरकारी नीतियां, 5G का विस्तार और BharatNet जैसी योजनाओं के जरिए ग्रामीण ब्रॉडबैंड पर जोर देना है। सरकार का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)' जैसी योजनाएं सकारात्मक माहौल बना रही हैं। Tejas Networks को घरेलू सप्लायर्स के पक्ष में सरकारी नीतियों का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसे Cisco, Nokia, Ericsson, HFCL और STL जैसे बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर भी अनिश्चितता है। पिछले बारह महीनों में नेगेटिव अर्निंग्स के कारण, P/E रेश्यो जैसे स्टैंडर्ड वैल्यूएशन मेट्रिक्स या तो नेगेटिव हैं या अस्थिर। उदाहरण के लिए, ₹57.2B के मार्केट कैप और ₹-7.7B की नेट इनकम के आधार पर P/E रेश्यो -10.2 दिखाया गया है, वहीं कुछ अन्य जगहों पर यह -9.47 बताया गया है। लगभग ₹7,000 करोड़ के मार्केट कैप के साथ, यह वित्तीय अनिश्चितता बताती है कि बाजार सिर्फ मौजूदा प्रोजेक्ट जीत से कहीं ज्यादा जोखिमों को ध्यान में रख रहा है।
लगातार घाटा और विश्लेषकों की राय में मतभेद
राष्ट्रीय परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, Tejas Networks को अपनी स्टॉक परफॉर्मेंस को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए ₹197 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। इसका मतलब है कि कंपनी फिलहाल प्रति शेयर लाभ कमाने की स्थिति में नहीं है, जो संस्थागत निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय हो सकता है। विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है; कुछ रिपोर्टों में 'Buy' की कंसेंसस रेटिंग और ₹1,122 का 12-महीने का टारगेट प्राइस बताया गया है, जो संभावित उछाल का संकेत देता है। वहीं, MarketsMOJO जैसी फर्मों ने 'Strong Sell' की सलाह दी है। यह मतभेद दिखाता है कि बाजार पर्यवेक्षकों में स्पष्ट विश्वास की कमी है। कंपनी की वित्तीय सेहत पर कम इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो और हाई डेटर्स जैसी चिंताएं भी हावी हैं। बड़े सरकारी अनुबंधों पर निर्भरता वॉल्यूम तो देती है, लेकिन पेमेंट साइकिल और एग्जीक्यूशन से जुड़े जोखिम भी लाती है।
आउटलुक: ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की चुनौती
BharatNet Phase III में अपनी बड़ी हिस्सेदारी और अन्य राष्ट्रीय टेलीकॉम प्रोजेक्ट्स में बढ़ते रोल के साथ, Tejas Networks भारत के डिजिटल परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनी का प्रोडक्ट डेवलपमेंट और टाटा ग्रुप का मजबूत समर्थन भविष्य की ग्रोथ की नींव रखता है। हालांकि, निवेशक अब इस बात पर ध्यान देंगे कि कंपनी इन बड़े ऑर्डरों को स्थिर लाभ और पॉजिटिव कैश फ्लो में कैसे बदल पाती है, खासकर अपने दर्ज घाटे और शेयर मूल्य में दिख रही बाजार की शंकाओं को देखते हुए।