रेवेन्यू में भारी गिरावट, बैलेंस शीट पर दबाव
टाटा ग्रुप की कंपनी Tejas Networks को फाइनेंशियल ईयर 26 में तगड़ा झटका लगा है। पिछले साल ₹8,923 करोड़ के मुकाबले इस साल रेवेन्यू गिरकर ₹1,103 करोड़ पर आ गया, जो 87% की भारी गिरावट है। इस वजह से कंपनी को ₹900 करोड़ का नेट लॉस हुआ। कंपनी की बैलेंस शीट भी दबाव में दिख रही है। कंपनी पर ₹3,531 करोड़ का नेट डेट (Net Debt) है, साथ ही ₹3,258 करोड़ रिसीवेबल्स (Receivables) और ₹2,438 करोड़ की इन्वेंटरी (Inventory) फंसी हुई है।
AI के भरोसे ₹7,500 Cr मार्केट कैप, पर रिस्क भी हाई
इन सब खराब नतीजों के बावजूद, Tejas Networks का मार्केट कैप करीब ₹7,500 करोड़ है। यह दिखाता है कि निवेशक AI इन्फ्रास्ट्रक्चर से भविष्य में होने वाली कमाई पर दांव लगा रहे हैं। कंपनी AI ट्रैफिक की बढ़ती मांग को देखते हुए R&D में भारी निवेश कर रही है। हालांकि, ₹1,514 करोड़ के ऑर्डर बुक को लाभ में बदलने और कंपनी के सामने मौजूद ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच बड़ा एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) बना हुआ है।
घाटे में भी AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दांव
कंपनी मैनेजमेंट का मानना है कि AI की वजह से नेटवर्क ट्रैफिक इस दशक में 60% से ज्यादा बढ़ जाएगा, जिसके लिए एडवांस ऑप्टिकल नेटवर्क और डेटा सेंटर लिंक्स की जरूरत होगी। इसी उम्मीद में Tejas Networks AI इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है। लेकिन ₹1,514 करोड़ के ऑर्डर बुक को ठोस रेवेन्यू में बदलना एक बड़ी चुनौती है, जो अभी अधिकतर ट्रायल स्टेज में हैं।
मुकाबला कड़ा, डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी ज्यादा
Tejas Networks का मुकाबला HFCL और Sterlite Technologies (STL) जैसी कंपनियों से है। HFCL का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 0.5x है, वहीं STL का 0.8x है, जबकि Tejas Networks का यह 1.43x है। HFCL का P/E 35x और STL का 40x है, जो ज्यादा स्टेबल रेवेन्यू और प्रॉफिट को दर्शाता है। भारतीय टेलीकॉम कैपेक्स (Capex) में 10% सालाना ग्रोथ की उम्मीद है, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिलेगा।
मुख्य खतरे: डेट, इन्वेंटरी और ऑर्डर कन्वर्जन
टाटा ग्रुप का साथ होने के बावजूद, कंपनी पर ₹3,531 करोड़ का नेट डेट और ₹3,258 करोड़ रिसीवेबल्स के रूप में फंसे पैसे बड़े खतरे हैं। ₹2,438 करोड़ की इन्वेंटरी बिक्री और उत्पादन के बीच के गैप को दिखाती है। कंपनी का 1.43x का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो इसे ब्याज दरों में बदलाव और देरी के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है। कंपनी के पास FY27 के लिए कोई स्पष्ट गाइडेंस (Guidance) न होने से ऑर्डर बुक को कन्वर्ट करने की गति पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
आगे का रास्ता अनिश्चित, एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 में नतीजे सुधरेंगे और ऑर्डर बुक कन्वर्ट होगी। हालांकि, कोई ठोस रेवेन्यू या प्रॉफिट टारगेट नहीं दिया गया है। एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Jefferies ने एग्जीक्यूशन रिस्क को देखते हुए 'होल्ड' रेटिंग दी है, जबकि Nomura ने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर की लॉन्ग-टर्म संभावनाओं को देखते हुए 'बाय' किया है। कंपनी को उम्मीद है कि BSNL से मिलने वाला पैसा वर्किंग कैपिटल को सुधारेगा, लेकिन ऑपरेशनल देरी ठीक होने और रेवेन्यू ग्रोथ लागत से आगे निकलने तक बैलेंस शीट कमजोर बनी रहेगी।
