नतीजों के बावजूद शेयर में तेजी
Tata Communications के शेयर ने Q4 FY26 के नतीजे आने के बाद बाजार को हैरान कर दिया। नतीजों में नेट प्रॉफिट में भले ही 65.44% की भारी गिरावट आई हो, लेकिन कंपनी के रेवेन्यू में 9.4% की शानदार ग्रोथ और EBITDA में 14.4% का इजाफा देखने को मिला, जिसके दम पर स्टॉक 5% से ज्यादा चढ़ गया। शेयर आज ₹1,604 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया, जबकि बाकी मार्केट में 0.63% की गिरावट थी।
रेवेन्यू और EBITDA में दमदार ग्रोथ
कंपनी का रेवेन्यू मार्च 2026 क्वार्टर (Q4 FY26) में 9.4% बढ़कर ₹6,554 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA 14.4% बढ़कर ₹1,284 करोड़ रहा। EBITDA मार्जिन सुधरकर 19.6% पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 18.7% था। इन मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के चलते कंपनी का नेट प्रॉफिट 65.44% घटकर ₹263 करोड़ रह गया, जिसका मुख्य कारण बढ़ा हुआ खर्च और कुछ एकमुश्त खर्चे थे। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹45,261 करोड़ है।
एनालिस्ट्स का भरोसा कायम
प्रॉफिट में गिरावट के बावजूद, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स Tata Communications पर बुलिश हैं। JM Financial ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस ₹1,980 रखा है। उनका अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच EBITDA में सालाना 20% की ग्रोथ देखने को मिलेगी। Nuvama Institutional Equities ने भी 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट को ₹2,100 से घटाकर ₹2,000 कर दिया है। एनालिस्ट्स के टारगेट आम तौर पर ₹1,928 से ₹2,047 के बीच हैं, जो मौजूदा भाव से 23% से ज्यादा की तेजी का संकेत देते हैं।
आगे क्या उम्मीदें?
Tata Communications का मैनेजमेंट और एनालिस्ट्स डिजिटल सर्विसेज और डेटा ऑफरिंग्स से लगातार ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। कंपनी का लक्ष्य FY28 तक EBITDA मार्जिन को 23%-25% तक ले जाना है। एनालिस्ट्स अगले तीन सालों में EBITDA में सालाना 20% और ऑपरेटिंग इनकम में 24% की ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं। रेवेन्यू ग्रोथ भी तेज होकर अगले तीन सालों में सालाना 10% रहने की उम्मीद है।
चिंताएं भी मौजूद
हालांकि, नेट प्रॉफिट में 65.44% की भारी गिरावट एक बड़ी चिंता है। इस प्रॉफिट रिडक्शन का मतलब है कि मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। कंपनी पर कर्ज का बोझ भी है। नेट डेट घटकर ₹9,400 करोड़ रह गया है, लेकिन डेट-टू-इक्विटी रेशियो अभी भी हाई है। पूरे फाइनेंशियल ईयर FY26 में भी नेट प्रॉफिट 35.8% घटकर ₹1,044 करोड़ रहा, जो रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद लाभप्रदता (profitability) की अंदरूनी समस्याओं को दर्शाता है।
