Tamil Nadu Deep Tech: TIDCO का बड़ा दांव! EV, Space, Chip Startups में ₹100 करोड़ का निवेश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tamil Nadu Deep Tech: TIDCO का बड़ा दांव! EV, Space, Chip Startups में ₹100 करोड़ का निवेश
Overview

तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TIDCO) ने राज्य के डीप टेक (Deep Tech) भविष्य को आकार देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी अपने सबसे बड़े डायरेक्ट स्टार्टअप निवेशों में से एक कर रही है, जिसमें EV फर्म Raptee Energy और स्पेस-टेक कंपनी Agnikul Cosmos में ₹25-30 करोड़ का निवेश शामिल है। साथ ही, चिप डिजाइनर iVP Semiconductor में ₹10-15 करोड़ लगाए जा रहे हैं।

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TIDCO का फोकस अब डीप टेक पर

TIDCO द्वारा इन एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कंपनियों में किया गया यह निवेश, तमिलनाडु को इनोवेटिव और साइंस-बेस्ड बिजनेस के लिए एक मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये निवेश पुराने औद्योगिक प्रोत्साहन के तरीकों से हटकर सीधे डीप-टेक स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने की ओर एक बदलाव दिखाते हैं, जिसका लक्ष्य राज्य को भारत के अगले तकनीकी विकास के मामले में सबसे आगे रखना है।

TIDCO की नई रणनीति: स्टार्टअप्स को सीधी मदद

TIDCO कई सालों में स्टार्टअप्स में अपना सबसे बड़ा डायरेक्ट निवेश कर रही है। यह कॉरपोरेशन इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल निर्माता Raptee Energy और स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी Agnikul Cosmos में ₹25-30 करोड़ लगा रही है। इसके अलावा, चिप डिजाइन फर्म iVP Semiconductor में ₹10-15 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह TIDCO के लिए एक बड़ा बदलाव है, जो 1980 के दशक में Titan Company के लिए टाटा ग्रुप के साथ एक प्रमुख भागीदार हुआ करती थी। तब TIDCO मुख्य रूप से बड़े उद्योगों की मदद करती थी। अब, यह सीधे हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड वाले डीप-टेक क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर रही है, जो तमिलनाडु की बढ़ती इनोवेशन पावर में मजबूत विश्वास दर्शाता है।

तमिलनाडु का लक्ष्य: डीप टेक हब बनना

ये निवेश तमिलनाडु की डीप टेक्नोलॉजी के लिए एक प्रमुख ग्लोबल सेंटर बनने की बड़ी योजना का हिस्सा हैं। राज्य ने हाल ही में अपनी 2025-2026 के लिए डीप टेक स्टार्टअप पॉलिसी लॉन्च की है। इस पॉलिसी का उद्देश्य 100 स्टार्टअप्स की मदद करना और पब्लिक और प्राइवेट दोनों स्रोतों से ₹100 करोड़ जुटाना है। पॉलिसी इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। यह तरीका राष्ट्रीय प्रयासों से मेल खाता है, जिसमें ₹1 लाख करोड़ की रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) स्कीम और ₹10,000 करोड़ का स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 शामिल हैं, ये सभी भारत के इनोवेशन बेस को मजबूत करने के लिए बनाए गए हैं।

कंपनियों का वैल्यूएशन और सेक्टर फंडिंग

Agnikul Cosmos का इस फंडिंग राउंड में वैल्यूएशन लगभग ₹5,500-5,600 करोड़ ($660-672 मिलियन USD) आंका गया है, जिससे यह भारत की टॉप स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक बन गई है। यह वैल्यूएशन महत्वपूर्ण है और इसे Skyroot Aerospace ($99.8M) और Pixxel ($71.7M) जैसी कंपनियों के समूह में रखती है। स्पेस सेक्टर सरकारी रुचि और वेंचर कैपिटल को आकर्षित कर रहा है, जो 2023 में $126 मिलियन तक पहुंच गया था। Raptee Energy का वैल्यूएशन लगभग ₹650-700 करोड़ ($78-84 मिलियन USD) है। यह भारत के व्यस्त इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में प्रवेश कर रही है, जिसने इस साल अब तक $1.4 बिलियन का फंड जुटाया है। हालांकि, निवेशक अब उन कंपनियों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं जो डेवलपमेंट में आगे बढ़ चुकी हैं और स्केल करने के लिए तैयार हैं। पैसेंजर EVs की तुलना में कमर्शियल EVs ने अधिक कैपिटल आकर्षित किया है। iVP Semiconductor को जुलाई 2024 में प्री-सीरीज़ A फंडिंग के तौर पर $5 मिलियन मिले थे और यह तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षेत्र में काम करती है। शुरुआती चरण की भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग 2023 में $5 मिलियन से बढ़कर जुलाई 2025 तक $44 मिलियन हो गई, जो PLI स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी सरकारी पहलों से प्रेरित है।

डीप टेक के लिए चुनौतियां और जोखिम

हालांकि TIDCO का निवेश राज्य के मजबूत समर्थन और क्षमता को दर्शाता है, लेकिन इन डीप-टेक कंपनियों को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। Agnikul Cosmos और Raptee Energy ऐसे उद्योगों में हैं जिनमें लंबे समय तक डेवलपमेंट के लिए बहुत अधिक पैसे की आवश्यकता होती है, और उन्हें वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। Agnikul का बार-बार रॉकेट लॉन्च करने और बूस्टर रिकवर करने का लक्ष्य तकनीकी रूप से कठिन है और इसके लिए बेहतरीन एग्जीक्यूशन की आवश्यकता है। Raptee Energy को भारत के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी EV बाजार से निपटना होगा, जहां कई कंपनियां ग्राहकों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं और शुरुआती फंडिंग में कमी आई है। iVP Semiconductor, मजबूत राजस्व वृद्धि का लक्ष्य रखने के बावजूद, वैश्विक दिग्गजों द्वारा संचालित क्षेत्र में काम करती है। स्थानीय निर्माण और परीक्षण सुविधाओं के निर्माण में जटिल सप्लाई चेन शामिल हैं और इसके लिए बड़ी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है। इन स्टार्टअप्स की सफलता, TIDCO के Titan के साथ पिछले काम की तरह, बाजार की मांग, निरंतर तकनीकी प्रगति, कुशल संचालन और निरंतर सरकारी समर्थन पर निर्भर करेगी। डीप-टेक में मुख्य जोखिम विकास के लिए आवश्यक लंबा समय और टेक्नोलॉजी में अनिश्चितताएं हैं, जिसका अर्थ है कि लंबी अवधि की सफलता के लिए स्थिर, धैर्यपूर्ण निवेश महत्वपूर्ण है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.