पहली बार USD रेवेन्यू में गिरी TCS
TCS के लिए यह एक बड़ा और अभूतपूर्व झटका है। पूरे साल के लिए कांस्टेंट करेंसी (Constant Currency) में रेवेन्यू 2.5% घटा है। यह प्रदर्शन, कंपनी के भारतीय रुपये (INR) में सबसे तेज ग्रोथ दर्ज करने के विपरीत है। TCS का फुल-ईयर रेवेन्यू ₹2,67,021 करोड़ रहा, जिसमें 4.58% की बढ़त देखी गई। वहीं, नेट प्रॉफिट ₹49,210 करोड़ रहा, जो 1.35% ज्यादा है। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में रेवेन्यू 10% बढ़कर ₹70,698 करोड़ हुआ और नेट प्रॉफिट 12.22% बढ़कर ₹13,718 करोड़ पर पहुंच गया।
कम वैल्यूएशन और चिंताएं
ऑपरेटिंग मार्जिन 4 साल के उच्चतम स्तर 25% पर रहा, जबकि नेट मार्जिन 19.8% दर्ज किया गया। इसके बावजूद, TCS के शेयर की वैल्यूएशन (Valuation) उसके कॉम्पिटिटर्स की तुलना में काफी कम है। अप्रैल 2026 में कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो सिर्फ 18.1 से 19.41 के बीच था, जबकि पिछले 10 साल का औसत 26.80 और IT इंडस्ट्री का औसत 27.7 है। यह कम वैल्यूएशन बताता है कि बाजार कंपनी के भविष्य की ग्रोथ को लेकर चिंतित है।
कॉम्पिटिटर्स से पिछड़ी TCS?
TCS का प्रदर्शन Infosys (जो FY26 के लिए 3-3.5% ग्रोथ गाइडेंस दे रहा है) और HCLTech (जिसने Q3 FY26 में 4.8% ग्रोथ दर्ज की) से थोड़ा पीछे है। Wipro को लेकर भी outlook ज्यादा बेहतर नहीं है। डॉलर का कमजोर होना आमतौर पर भारतीय IT कंपनियों के USD रेवेन्यू को बढ़ाता है, लेकिन TCS के मामले में डॉलर रेवेन्यू में गिरावट यह संकेत देती है कि डिमांड या प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में समस्या उतनी ही गंभीर है, जितनी कि रुपये के आंकड़े बताते हैं।
AI पर दांव और भविष्य की राह
डॉलर रेवेन्यू में ऐतिहासिक गिरावट ने कंपनी की डॉलर-नॉमिनेटेड ग्रोथ की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी की 13.7% की एट्रीशन रेट (Attrition Rate) भी चिंता का विषय है। हालांकि, TCS AI (Artificial Intelligence) की दुनिया में खुद को मजबूत कर रहा है। Q4 FY26 में AI से एनुअल रेवेन्यू $2.3 बिलियन से ज्यादा रहा और कंपनी को $40.7 बिलियन का बड़ा ऑर्डर बुक (FY26 में) मिला है, जिसमें Q4 में $12 बिलियन शामिल हैं। मैनेजमेंट का मानना है कि क्लाइंट टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ा रहे हैं, लेकिन बाजार अभी भी हिचकिचा रहा है।
रिकवरी की उम्मीद
FY27 में IT सेक्टर की रिकवरी 4.5% से 7% के बीच रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण AI का बढ़ता इस्तेमाल होगा। TCS इस दौड़ में सबसे आगे रहना चाहता है। लेकिन फिलहाल, बाजार अनिश्चितता के माहौल में है और इस बात पर नजर रखे हुए है कि AI का मोनेटाइजेशन (Monetization) कितना सफल होता है।