Q4 FY26: TCS का शानदार प्रॉफिट और रेवेन्यू
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले तिमाही के मुकाबले 29% बढ़कर ₹13,720 करोड़ रहा, जो कि विश्लेषकों के अनुमान ₹13,581 करोड़ से बेहतर है। वहीं, रेवेन्यू (Revenue) भी 5.5% बढ़कर ₹70,698 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी ने इस तिमाही में $12 बिलियन के नए सौदे (deals) हासिल किए, जिससे पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए हासिल कुल सौदे $40.7 बिलियन तक पहुंच गए। यह टेक्नोलॉजी निवेश में क्लाइंट के भरोसे को दर्शाता है।
कंपनी के अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्सेस (EBIT) में तिमाही आधार पर 6% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹17,870 करोड़ पर पहुंच गया। EBIT मार्जिन भी मामूली सुधरकर 25.3% हो गया। TCS ने Q4 FY26 में 2,356 नए कर्मचारी भी जोड़े। नतीजों के बाद, 9 अप्रैल, 2026 को TCS के शेयर 0.19% चढ़कर ₹2,561.0 पर बंद हुए।
आंकड़े भले ही शानदार हों, लेकिन TCS का वैल्यूएशन (Valuation) कुछ अलग कहानी कहता है। अप्रैल 2026 तक, कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 18.1 से 19.41 के बीच है, जो इसके 10 साल के औसत 26.80 से काफी कम है। यह इंडस्ट्री के औसत 27.7 से भी नीचे है, जिसके कारण कुछ विश्लेषक इसे 'काफी अंडरवैल्यूड' (Significantly Undervalued) मान रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और GenAI की वजह से ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन मैक्रोइकॉनोमिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। Accenture जैसी कंपनियां AI पर फोकस कर रही हैं, जिससे बड़े सौदों की उम्मीद है।
साल-दर-साल (Year-on-year) आधार पर देखें तो TCS का नेट प्रॉफिट 12.22% और रेवेन्यू 9.6% बढ़ा है। हालांकि, IT सेक्टर की ग्रोथ में नरमी जारी रहने का अनुमान है। TCS से Tier-1 ग्रोथ में लीड करने की उम्मीद है, जबकि Infosys और HCLTech में मामूली रिकवरी दिख रही है, और Wipro को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
डिविडेंड पर घमासान
Q4 FY26 के नतीजों से एक मुख्य चिंता डिविडेंड को लेकर है। कंपनी ने ₹31 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए यह ₹110 प्रति शेयर होता है। लेकिन, कई विश्लेषकों को ₹40 प्रति शेयर के डिविडेंड की उम्मीद थी, जिससे पूरे साल का भुगतान ₹120 प्रति शेयर तक पहुंच सकता था। यह कंज़र्वेटिव डिविडेंड पॉलिसी (conservative dividend policy) कुछ निवेशकों को रास नहीं आ रही है, खासकर तब जब शेयर साल की शुरुआत से 19.25% और पिछले 12 महीनों में 20.26% गिर चुका है। शेयर अभी अपने 50, 100 और 200-दिनों के मूविंग एवरेज (moving averages) से नीचे कारोबार कर रहा है।
आगे क्या?
बावजूद इसके, ज़्यादातर एनालिस्ट TCS के लिए 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं। उनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹3,038 से ₹3,497 के बीच है, जो मौजूदा स्तरों से 37% तक का उछाल दिखा सकता है। एनालिस्टों का मानना है कि करेंसी (currency) और लागत में कमी से मार्जिन में और सुधार होगा। निवेशकों को आने वाले सौदों, AI मोनेटाइजेशन (monetization) की रणनीति और कंपनी की हायरिंग (hiring) पर नजर रखनी चाहिए। AI में कंपनी के 1,833 पेटेंट फाइलिंग और 573 पेटेंट ग्रांट (granted) उसकी भविष्य की टेक्नोलॉजी पर पकड़ को मजबूत करते हैं, जो लंबी अवधि में ग्रोथ का जरिया बन सकता है।