ग्लोबल आईटी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते खौफ के चलते Tata Consultancy Services (TCS) का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹10 लाख करोड़ के अहम स्तर से नीचे लुढ़क गया है, जो कि दिसंबर 2020 के बाद पहली बार हुआ है। इस चिंता ने निवेशकों का IT कंपनियों से मोहभंग कर दिया है और पैसा बैंकिंग जैसे सुरक्षित सेक्टरों में जा रहा है। इसी का नतीजा है कि TCS के शेयर 4.81% की भारी गिरावट के साथ अपने 52-week low पर आ गए।
AI का 'डिसरप्शन पैराडॉक्स' IT कंपनियों के लिए बड़ा सिरदर्द
AI का खतरा इस बार पहले की टेक्नोलॉजी जैसे Y2K या क्लाउड रेवोल्यूशन से कहीं ज़्यादा गंभीर माना जा रहा है। जहां पहले भारतीय IT कंपनियां बाज़ार में हिस्सेदारी बनाने वाली 'चैलेंजर' के तौर पर आगे बढ़ीं, वहीं AI इन कंपनियों के मूल बिजनेस मॉडल को ही 'डिसरप्ट' करने की क्षमता रखता है। AI के ज़रिए जटिल कामों को ऑटोमेट किया जा सकता है, जिससे सीधे सर्विस लाइन्स पर असर पड़ेगा। दुनिया भर की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों में पहले ही भारी गिरावट आ चुकी है, जैसे ServiceNow 30% और Salesforce 27% तक गिरे हैं। Anthropic के Claude Cowork जैसे AI टूल्स के आने से यह डर और भी बढ़ गया है कि AI-नेटिव प्लेटफॉर्म्स आउटसोर्स किए जाने वाले कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं, जो भारतीय IT सेक्टर की कमाई का मुख्य ज़रिया है।
वैल्यूएशन पर बड़ा दबाव
12 फरवरी 2026 को TCS के शेयर 4.81% की गिरावट के साथ ₹2,769.50 पर आ गए, जो कि 52-week low है। इस गिरावट ने कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटाकर करीब ₹10.02 लाख करोड़ कर दिया। इस वैल्यूएशन के साथ, TCS अब मार्केट वैल्यूएशन के लिहाज़ से चौथे स्थान पर खिसक गई है, जिसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जिसका मार्केट कैप करीब ₹10.92 लाख करोड़ है, और ICICI Bank ने पीछे छोड़ दिया है। Nifty IT इंडेक्स में भी आज 3.96% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस साल अब तक इंडेक्स 11.4% टूट चुका है। TCS का P/E रेश्यो (TTM) करीब 21.5-22.7 है, जो इंडस्ट्री के औसत P/E 25.3 से कम है। Infosys का P/E रेश्यो 20.6-22.6 के आसपास है, जबकि HCL Technologies 24.0-25.5 के ऊंचे P/E पर ट्रेड कर रहा है।
ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और सेक्टर रोटेशन
यह पहली बार है जब TCS का मार्केट कैप दिसंबर 2020 के बाद ₹10 लाख करोड़ के नीचे गया है। पिछले एक साल में स्टॉक ने -29.41% का नेगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि इसी अवधि में Sensex में +10.07% की बढ़ोतरी हुई है। फरवरी 2025 में TCS के शेयर करीब ₹3,932.30 पर ट्रेड कर रहे थे, जो कि मौजूदा स्तरों से काफी ऊपर है। BSE पर इसका 52-week high करीब ₹4,161 था। यह भारी गिरावट बाज़ार की बदलती सेंटीमेंट को दर्शाती है, जहाँ IT सेक्टर से पैसा निकलकर बैंकिंग जैसे मजबूत क्षेत्रों में जा रहा है, जैसा कि SBI की शानदार बढ़त से साफ है।
'बियर केस': स्ट्रक्चरल कमजोरियां
AI को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह सिर्फ़ एक टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं, बल्कि कंपनियों की मुख्य सर्विस लाइन्स में एक मूलभूत बदलाव ला रहा है। TCS जैसी कंपनियों के लिए, जो प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए बड़े वर्कफोर्स पर निर्भर करती हैं, AI की ऑटोमेशन क्षमताएं एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं। इससे मैन्युअल काम की ज़रूरत कम हो सकती है और रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। AI से जुड़े नए रेवेन्यू सोर्स अभी शुरुआती दौर में हैं और ये पारंपरिक बिजनेस पर पड़ने वाले दबाव को भर पाने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं। जैसे-जैसे एडवांस AI टूल्स ज़्यादा कुशल हो रहे हैं, बाज़ार पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं की मांग का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है, जिससे पुरानी कंपनियों के लिए एक 'कैपेबिलिटी गैप' पैदा हो रहा है अगर वे तेजी से खुद को नहीं ढालती हैं।
एनालिस्ट्स का नजरिया और भविष्य की राह
मौजूदा गिरावट के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स TCS की AI में पोजिशनिंग और मार्जिन में सुधार की संभावनाओं को देखते हुए सावधानीपूर्वक आशावादी बने हुए हैं। जनवरी 2026 तक, ज़्यादातर एनालिस्ट्स ने 'बाय' रेटिंग दी थी और कुछ प्राइस टारगेट में बड़ा अपसाइड दिखाया था। हालांकि, 12 फरवरी 2026 को आए हालिया कंसेंसस प्राइस टारगेट करीब ₹2,850 के आसपास थे, जो मौजूदा बाज़ार सेंटीमेंट को दर्शाते हैं। भविष्य के परफॉरमेंस के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि TCS और दूसरी IT कंपनियां कितनी मजबूती से यह साबित कर पाती हैं कि AI उनके बिजनेस मॉडल के लिए एक 'ग्रोथ लीवर' है, जो एफिशिएंसी और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाता है, न कि उनके स्थापित बिजनेस मॉडल के लिए एक स्ट्रक्चरल खतरा। इस AI-संचालित परिवर्तन से निपटने की सेक्टर की क्षमता ही आने वाले सालों में इसकी दिशा तय करेगी।