TCS के नासिक ऑफिस में यौन शोषण, उत्पीड़न और धार्मिक जबरदस्ती के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसमें 8 महिला कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है। इन आरोपों के चलते पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और 7 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। आरोप है कि ये घटनाएं लगभग 4 साल से चल रही थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी के HR विभाग ने इन आंतरिक शिकायतों पर सिर्फ मौखिक चेतावनी देकर मामले को दबाने की कोशिश की, जो कि POSH एक्ट, 2013 के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस बड़ी कंप्लायंस (Compliance) विफलता ने अब बाजार का ध्यान खींचा है। हालांकि, शेयर बाजार की मौजूदा अस्थिरता में किसी खास स्टॉक पर सीधे असर का आंकलन करना मुश्किल है, लेकिन पिछले एक साल में TCS के शेयर की कीमत लगभग 22-24% गिरी है और यह ₹2,500-₹2,555 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह गिरावट, इस कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) के बवाल के कारण और बढ़ सकती है।
TCS, जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) करीब ₹9.25 लाख करोड़ है, एक बेहद प्रतिस्पर्धी आईटी सर्विसेज (IT Services) सेक्टर में काम करती है। इसके मुख्य प्रतिद्वंद्वी Infosys (मार्केट कैप ~₹5.17-₹5.29 लाख करोड़, P/E ~17.9-18.5) और HCL Technologies (मार्केट कैप ~₹3.88 लाख करोड़, P/E ~21.1-23.9) भी ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। Wipro, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹2.20 लाख करोड़ है, फिलहाल 15.2-16.6 के निचले P/E पर ट्रेड कर रहा है। TCS का P/E रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 17.6-19.4 के आसपास है, जो इसे बीच की श्रेणी में रखता है। हालांकि, फॉरवर्ड P/E के आधार पर TCS, HCL Technologies और Infosys से डिस्काउंट (Discount) पर ट्रेड कर रहा है। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि निवेशक पहले से ही कंपनी की ग्रोथ (Growth) को लेकर थोड़े सतर्क हैं, और यह नया विवाद इस सतर्कता को और बढ़ा सकता है। कुल मिलाकर, भारतीय आईटी सेक्टर ने Q1 FY26 में मिले-जुले नतीजे दिखाए हैं, जिनमें बड़ी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) धीमी रही है। AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को अपनाना और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) प्रमुख ग्रोथ इंजन हैं, और ग्लोबल आईटी सर्विसेज मार्केट 2026 तक $1.17 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। TCS ने अब तक मजबूत ESG रेटिंग्स (ESG Ratings) बनाए रखी हैं, लेकिन मौजूदा घटनाएँ इसके 'सोशल' (Social) और 'गवर्नेंस' (Governance) क्रेडेंशियल्स को गंभीर चुनौती दे रही हैं।
यह पूरा मामला TCS के आंतरिक नियंत्रण तंत्र (Internal Control Mechanism) में गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है, खासकर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को संभालने के तरीके पर। HR द्वारा शिकायतों को ठीक से आगे न बढ़ाना और उन्हें संबोधित न करने के आरोप, मैनेजमेंट की सुरक्षित कार्यस्थल (Safe Workplace) बनाए रखने की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हैं। आज के समय में, जब दुनिया भर की आईटी कंपनियां कुशल पेशेवरों, खासकर महिलाओं, को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, ऐसी गवर्नेंस (Governance) की कमियां टैलेंट (Talent) के नुकसान और हायरिंग (Hiring) की लागत बढ़ने का कारण बन सकती हैं। अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में, जिनके HR कंप्लायंस (HR Compliance) रिकॉर्ड बेहतर साबित हुए हैं, TCS की स्थिति व्यापक जोखिमों का संकेत देती है। कुछ एनालिस्ट (Analysts) TCS को बिक्री और संपत्ति के मुकाबले ओवरवैल्यूड (Overvalued) मानते हैं, और कई ने 'अंडरपरफॉर्म' (Underperform) या 'सेल' (Sell) रेटिंग दी है। हाल ही में एनालिस्टों द्वारा प्राइस टारगेट (Price Target) में की गई कटौती भी इसी सतर्कता को दर्शाती है। HR द्वारा अपर्याप्त प्रतिक्रिया और रिपोर्टिंग को हतोत्साहित करने के आरोप TCS से अपेक्षित मानकों के बिल्कुल विपरीत हैं और इससे रेगुलेटरी (Regulatory) जांच बढ़ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप जुर्माना या परिचालन में बाधा आ सकती है। NITES (नेशनल इंडस्ट्रियल एंड टेक्निकल एम्प्लॉइज फेडरेशन) द्वारा मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट (Ministry of Labour and Employment) से सेक्टर-व्यापी POSH ऑडिट की मांग, जिसमें TCS का हवाला दिया गया है, आगे चलकर और बड़े रेगुलेटरी एक्शन का जोखिम बढ़ाती है।
एनालिस्टों (Analysts) का नज़रिया फिलहाल बंटा हुआ है। 51 एनालिस्टों में से 72% 'बाय' (Buy) की सलाह दे रहे हैं, जिनका औसत प्राइस टारगेट ₹4,500 है, जो संभावित अपसाइड (Upside) का संकेत देता है। हालांकि, प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ग्रोथ गैप (Growth Gap) और लगातार बनी हुई चिंताएं कुछ एनालिस्टों को टारगेट प्राइस में कटौती करने पर मजबूर कर रही हैं। एनालिस्टों का मानना है कि स्टॉक में बड़ी तेजी के लिए TCS को अपनी ग्रोथ को प्रतिस्पर्धियों के बराबर लाना होगा। हाल ही में आए Q4 FY26 के नतीजों में, जिसमें कंपनी का प्रॉफिट 12% बढ़ा और रेवेन्यू 10% बढ़ा, साथ ही $12 बिलियन के सौदे हासिल किए गए, शेयर पर इसका मामूली असर ही देखने को मिला। इससे पता चलता है कि कंपनी का फंडामेंटल परफॉरमेंस (Fundamental Performance) ही काफी नहीं है, अगर गवर्नेंस (Governance) के मुद्दे बने रहते हैं। अब निवेशकों की नज़र TCS द्वारा कंप्लायंस (Compliance) की खामियों को दूर करने, अपनी ESG (Environmental, Social, and Governance) स्थिति को मजबूत करने और अपने कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले सक्रिय कदमों पर टिकी रहेगी।