फ्रेशर हायरिंग में TCS का बड़ा फैसला
TCS के CEO K Krithivasan ने साफ कर दिया है कि कंपनी को नई हायरिंग से पहले डिमांड के पुख्ता संकेत चाहिए। यह फैसला प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर बनाने और प्रोजेक्ट्स को अनुभवी कर्मचारियों से तेजी से पूरा करवाने की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। कंपनी का लक्ष्य स्टाफ यूटिलाइजेशन (Staff Utilization) को 85% से 87% तक पहुंचाना है, जिससे लागत नियंत्रण (Cost Control) भी होगा।
प्रतिद्वंद्वियों से अलग राह पर TCS
इस कदम से TCS, Infosys और Wipro जैसे अपने प्रतिद्वंद्वियों से अलग राह पर चलती दिख रही है। Infosys ने FY26 में 40,000 नए ग्रेजुएट्स को हायर किया था, जबकि Wipro भी बड़े पैमाने पर कैंपस हायरिंग कर रहा है। TCS की यह स्ट्रैटेजी भविष्य में टैलेंट पाइपलाइन (Talent Pipeline) को प्रभावित कर सकती है।
मजबूत ऑर्डर बुक, लेकिन फोकस मार्जिन पर
हालांकि, कंपनी ने FY26 में $40 बिलियन की रिकॉर्ड टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) हासिल की है, जो कि मजबूत क्लाइंट डिमांड को दर्शाता है। CFO Samir Seksaria के मुताबिक, कंपनी का मुख्य फोकस प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ाना है।
भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश जारी
TCS भविष्य की टेक्नोलॉजी जैसे AI और क्लाउड में निवेश जारी रखे हुए है। कंपनी ने AMD के साथ पार्टनरशिप की है, जो भविष्य की क्षमताओं को मजबूत करेगी।
संभावित जोखिम और चिताएं
इस कटौती के कारण भविष्य में टैलेंट की कमी और इनोवेशन पर असर पड़ने की आशंकाएं भी हैं। कंपनी अब लैटरल हायरिंग (Lateral Hires) यानी अनुभवी प्रोफेशनल्स पर ज्यादा निर्भर हो सकती है, जो लंबे समय में महंगी साबित हो सकती है। हाल ही में, TCS ने प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में बदलाव के कारण 12,000 सीनियर स्टाफ की छंटनी (Layoffs) भी की थी, जिस पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
विश्लेषकों की राय
विश्लेषक इस कदम पर मिली-जुली राय रख रहे हैं। वे TCS की मार्जिन सुधारने की क्षमता पर भरोसा जता रहे हैं, लेकिन टैलेंट एक्विजिशन की स्ट्रैटेजी पर चिंताएं भी व्यक्त कर रहे हैं।