TBO Tek Share: क्वार्टरली नतीजे दमदार, पर RBI का फैसला बढ़ा सकता है निवेशकों का सिरदर्द!

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AuthorNeha Patil|Published at:
TBO Tek Share: क्वार्टरली नतीजे दमदार, पर RBI का फैसला बढ़ा सकता है निवेशकों का सिरदर्द!
Overview

TBO Tek के निवेशकों के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी ने रेवेन्यू में **86%** की शानदार ईयर-ऑन-ईयर (YoY) ग्रोथ दर्ज की है, जिसका श्रेय Classic Vacations के अधिग्रहण को जा रहा है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कुछ अंतरराष्ट्रीय पेमेंट्स को मंजूरी न मिलने के कारण कंपनी के सामने एक बड़ी रेगुलेटरी चुनौती खड़ी हो गई है।

TBO Tek का दबदबा जारी, रेवेन्यू में बंपर उछाल

ट्रैवल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म TBO Tek Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में दमदार परफॉरमेंस का प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू 86% बढ़कर ₹784 करोड़ पर पहुंच गया। इस ग्रोथ में Classic Vacations (CV) के सफल इंटीग्रेशन का बड़ा योगदान रहा। कंपनी का ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू (GTV) भी 35% बढ़कर ₹9,709 करोड़ हो गया, जबकि एडजस्टेड EBITDA (अधिग्रहण लागत से पहले) 53% बढ़कर ₹115 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी का कहना है कि यह ग्रोथ कंपनी के स्केल और मार्केट प्रेजेंस को मजबूत कर रही है, खासकर नॉर्थ अमेरिका के लग्जरी ट्रैवल सेगमेंट में।

Classic Vacations: Synergies और शुरुआती चुनौतियाँ

अक्टूबर 2025 में $125 मिलियन में US-बेस्ड लग्जरी ट्रैवल कंपनी Classic Vacations का अधिग्रहण TBO Tek के लिए एक बड़ी स्ट्रैटेजिक चाल थी। इसका मकसद प्रीमियम आउटबाउंड ट्रैवल ऑफरिंग को मजबूत करना और अमेरिकी बाजार में अपनी पैठ बढ़ाना था। शुरुआती संकेत मिले-जुले हैं। Classic Vacations ने TBO के GTV में योगदान दिया है, लेकिन कंपनी के ग्रॉस प्रॉफिट से एडजस्टेड EBITDA कन्वर्जन रेट 19.6% है, जो TBO के अपने बिजनेस (25.3%) से कम है। मैनेजमेंट का मानना है कि समय के साथ यह अंतर कम होगा।

कर्ज़ और फाइनेंस कॉस्ट में बढ़ोतरी

Classic Vacations के अधिग्रहण के लिए लिए गए टर्म लोन और इंटरनल एक्रुअल्स के कारण TBO Tek का कर्ज (Debt) और फाइनेंस कॉस्ट बढ़ा है। कंपनी ने बताया कि डेप्रिसिएशन और फाइनेंस कॉस्ट में वृद्धि हुई है, जिसमें परचेज प्राइस एलोकेशन (PPA) के लिए अमोर्टाइजेशन कॉस्ट और एसोसिएटेड लोन की पूरी तिमाही लागत शामिल है। पिछले पांच सालों में TBO Tek का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो बढ़ा है, जो मार्च 2025 तक 43.7% था।

RBI का पेंच: FEMA नियमों के उल्लंघन का आरोप

TBO Tek के लिए सबसे बड़ी चिंता भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुड़ा मामला है। RBI ने कंपनी द्वारा थर्ड-पार्टी के माध्यम से किए गए ₹712.25 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय पेमेंट्स को पोस्ट-फैक्टो अप्रूवल देने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि इन पेमेंट्स में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) 1999 का उल्लंघन हुआ है। कंपनी ने दोबारा आवेदन किया, लेकिन RBI के फॉरेन एक्सचेंज डिपार्टमेंट ने 2 सितंबर 2025 को कहा कि वह अप्रूवल नहीं दे सकता। इस मामले में कंपनी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एडजुडिकेशन प्रोसीडिंग्स का भी सामना कर रही है, जिसका नतीजा अभी आना बाकी है।

भविष्य की राह और रिस्क

आगे चलकर, TBO Tek उम्मीद कर रही है कि FY26 की चौथी तिमाही से उसके ऑर्गेनिक बिजनेस में ऑपरेटिंग लेवरेज का फायदा दिखेगा। कंपनी अगले 3-4 सालों में नॉर्थ अमेरिका में हाई डबल-डिजिट ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। हालांकि, RBI और ED की चल रही जांच एक बड़ा रिस्क बनी हुई है, जो संभावित रूप से जुर्माने और ऑपरेशनल बाधाओं का कारण बन सकती है। इसके अलावा, अधिग्रहण से बढ़े फाइनेंसियल लेवरेज और करेंसी की अस्थिरता (Forex Volatility) भी कंपनी के लिए चुनौतियां पेश कर सकती हैं।

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