Swiggy की नई रणनीति: 'Toing' ऐप ने दिल्ली में क्या दांव खेला?
Food delivery सेक्टर में कॉम्पिटिशन और तेज़ हो गया है। Swiggy ने अपनी नई पेशकश, 'Toing' ऐप को दिल्ली-NCR में लॉन्च कर दिया है। इस ऐप की सबसे खास बात ये है कि ये ग्राहकों से न तो कोई पैकेजिंग चार्ज लेगा और न ही प्लेटफॉर्म फीस। इतना ही नहीं, Toing ऐप पर मिलने वाले खाने की कीमत रेस्टोरेंट के डाइन-इन प्राइस (Dine-in Price) के बराबर या उससे भी कम होगी, और कुछ डिशेज तो ₹99 के अंदर मिलेंगी। ये कदम उन ग्राहकों, खासकर Gen Z और स्टूडेंट्स को टारगेट कर रहा है जो कीमत को लेकर बहुत सजग रहते हैं।
क्या ये प्रॉफिटेबिलिटी की राह के खिलाफ है?
Swiggy का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरा फूड डिलीवरी सेक्टर घाटे से निकलकर प्रॉफिट (Profit) कमाने पर फोकस कर रहा है। जहां Zomato और Swiggy जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स अपने प्लेटफॉर्म और डिलीवरी चार्जेज़ बढ़ा रहे हैं, वहीं Toing का 'जीरो-फी' मॉडल बिल्कुल उलट है।
बाजार में दूसरे खिलाड़ी भी अपनी रणनीति बदल रहे हैं। Rapido का 'Ownly' ऐप ज़ीरो-कमीशन और फिक्स्ड-फी स्ट्रक्चर पर काम कर रहा है, जिससे कीमतें 15% तक कम हो सकती हैं। वहीं, Zepto जैसी क्विक-कॉमर्स कंपनीज़ ₹99 से ऊपर के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी दे रही हैं।
Swiggy का अपना मुख्य ऐप Q1 FY25 में 2.9% का मार्जिन दिखा रहा है, लेकिन क्विक-कॉमर्स में अभी भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में, Toing का ज़ीरो-फी मॉडल भारी ऑर्डर वॉल्यूम पर ही टिक पाएगा।
मार्केट ग्रोथ और पिछला अनुभव
भारतीय फूड डिलीवरी मार्केट का साइज़ 2030 तक $140 बिलियन पार करने की उम्मीद है, जिसकी CAGR 14.2% रहने का अनुमान है। Swiggy और Zomato दोनों ही 20% से ज़्यादा का ऑर्डर वैल्यू ग्रोथ देख रहे हैं।
लेकिन, Toing की ये आक्रामक, कम कीमत वाली स्ट्रेटेजी कुछ पुरानी यादें ताज़ा करती है। Foodpanda जैसी कंपनियां इसी तरह की रेस में फेल हो चुकी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे Swiggy के अपने मुख्य, ज़्यादा प्रॉफिट वाले बिजनेस पर असर पड़ सकता है। दिल्ली-NCR जैसे महंगे शहर में लॉजिस्टिक्स का खर्चा एक बड़ा चैलेंज है, और कई क्विक-कॉमर्स ऑर्डर अभी भी घाटे में डिलीवर हो रहे हैं।
एक्सपर्ट्स की राय
जानकार Toing के इस मॉडल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Swiggy की कुल वैल्यूएशन $11.3 से $11.5 बिलियन के बीच है, लेकिन इसकी प्रॉफिटेबिलिटी काफी हद तक उसके मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस पर टिकी है। Toing की ये 'हाई-स्टेक' स्ट्रेटेजी बाज़ार में कितना टिक पाएगी, ये देखना बाकी है।