Swiggy के नतीजे: फूड डिलीवरी रॉकेट, Instamart की सुस्त रफ्तार
Swiggy के हालिया तिमाही नतीजों में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। कंपनी का मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस सालों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा है, जिससे निवेशकों को राहत मिली है। वहीं, दूसरी ओर, कंपनी के क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) यानी Instamart सेगमेंट की ग्रोथ धीमी पड़ गई है और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
फूड डिलीवरी में रिकॉर्ड तोड़ परफॉर्मेंस
Swiggy का फूड डिलीवरी बिजनेस लगातार मजबूत हो रहा है और प्रॉफिट भी बढ़ा रहा है। इस तिमाही में, इस सेगमेंट ने पिछले लगभग चार सालों में अपनी सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की है। Gross Order Value (GOV) 22.6% साल-दर-साल बढ़कर ₹9,005 करोड़ पर पहुंच गया, जो मैनेजमेंट के अनुमान से भी ऊपर है। Monthly Transacting Users (MTUs) में 21% का उछाल आया, जो 1.83 करोड़ तक पहुंच गए। इस सेगमेंट का Adjusted EBITDA मार्जिन GOV का 3.3% रहा। सालाना Adjusted EBITDA अब ₹1,000 करोड़ के पार निकल गया है। इतना ही नहीं, 'Out of Home' (OOH) सेगमेंट भी FY26 में पहली बार प्रॉफिटेबल साबित हुआ, जिसमें GOV 43% बढ़ा।
Instamart की धीमी रफ्तार और मार्केट शेयर पर दबाव
वहीं, Swiggy Instamart, जो ग्रोसरी और जरूरी सामान डिलीवर करता है, उसकी ग्रोथ धीमी पड़ी है। इसका GOV 68.8% बढ़कर ₹7,881 करोड़ हो गया, लेकिन यह ग्रोथ रेट पिछली तिमाही की तुलना में कम रहा। कंपनी ने इस तिमाही में सिर्फ 7 नए डार्क स्टोर खोले, जिससे कुल स्टोर की संख्या 1,143 हो गई। इसकी तुलना में, Blinkit जैसे प्रतिद्वंद्वी 216 स्टोर खोल चुके हैं। इस वजह से, Instamart का मार्केट शेयर 25% पर आ गया है, जो Blinkit (46%) और Zepto (29%) से काफी पीछे है। Instamart का Average Order Value (AOV) 32.8% बढ़कर ₹700 हुआ, लेकिन इस सेगमेंट में प्रॉफिटेबिलिटी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्विक कॉमर्स में Blinkit का दबदबा
क्विक कॉमर्स का मैदान बेहद कॉम्पिटिटिव है। Zomato के स्वामित्व वाली Blinkit 46% मार्केट शेयर के साथ लीड कर रही है, उसके बाद Zepto (29%) और Swiggy Instamart (25%) का नंबर आता है। Blinkit ने FY25 में 42.4 करोड़ ऑर्डर संभाले, जबकि Instamart ने 28.6 करोड़। Blinkit का अनुमानित AOV ₹709 है, जो Instamart के ₹619 से ज्यादा है। Blinkit का टेक रेट (20%) भी Instamart (15%) से बेहतर है। सबसे बड़ी बात यह है कि Blinkit का प्रति ऑर्डर घाटा करीब ₹10 है, जबकि Instamart का यह घाटा लगभग ₹100 है। Blinkit 2026 तक अपने स्टोर की संख्या दोगुनी करके 2,157 करने की योजना बना रहा है, जो Swiggy के 1,254 स्टोर के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
Swiggy के भविष्य को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Macquarie ने स्टॉक को 'Neutral' रेटिंग दी है, वहीं Nomura ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस घटाकर ₹473 कर दिया है। UBS और Citi ने 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस क्रमशः ₹390 और ₹415 रखा है। Morgan Stanley ने 'Equal-weight' रेटिंग ₹322 पर दी है, और Jefferies ने ₹415 पर 'Buy' रेटिंग दी है। हालांकि, औसतन टारगेट प्राइस ₹400 से ₹527 के बीच बताए जा रहे हैं, लेकिन क्विक कॉमर्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे कुछ विश्लेषक स्टॉक को 'HOLD' पर रखने की सलाह दे रहे हैं।
Instamart की प्रॉफिटेबिलिटी की राह में बाधाएं
Instamart के लिए प्रॉफिटेबल बनना एक मुश्किल काम लग रहा है। हालांकि इसका Adjusted EBITDA मार्जिन सुधरकर -10.9% हुआ है, लेकिन इस सेगमेंट ने ₹858 करोड़ का घाटा दिखाया है, जो एक बड़ी नकदी बर्न (cash burn) को दर्शाता है। क्विक कॉमर्स सेक्टर में Zomato (Blinkit), Zepto, Reliance और Flipkart जैसे बड़े खिलाड़ी भारी निवेश कर रहे हैं, जिससे मार्जिन पर लगातार दबाव बना रहेगा। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, Instamart की लाभ कमाने की क्षमता पर सवाल बना हुआ है। कुल मिलाकर, कंपनी का नेट लॉस ₹800 करोड़ तक सिमट गया है, लेकिन FY26 में कुल घाटा 33% बढ़कर ₹4,154 करोड़ हो गया है, जो दर्शाता है कि कंपनी को अभी भी फंड की जरूरत पड़ेगी।
आगे की राह: ग्रोथ टारगेट और ब्रेक-ईवन की उम्मीदें
Swiggy का मैनेजमेंट फूड डिलीवरी के लिए 18-20% की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ का अपना लक्ष्य दोहरा रहा है। वे मध्यम अवधि में ₹1 ट्रिलियन के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू और 3-4% EBITDA मार्जिन का लक्ष्य भी लेकर चल रहे हैं। UBS का अनुमान है कि क्विक कॉमर्स सेगमेंट Q1FY27 तक ब्रेक-ईवन पर आ सकता है, हालांकि दूसरे एनालिस्ट्स इस पर अभी भी सतर्क हैं। क्विक कॉमर्स मार्केट 2030 तक $35 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। Swiggy इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा हासिल करना चाहता है, जिसका लक्ष्य ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा नेट ऑर्डर वैल्यू और 4-5% EBITDA है। हालांकि, इसके लिए कंपनी को लगातार विस्तार और निवेश करना होगा।
