Swiggy के 'डाइन-आउट' बिजनेस को रफ्तार देने आए Swapnil Bajpai
Swiggy ने अपने Dineout और Scenes ऑपरेशंस के लिए Swapnil Bajpai को नया CEO नियुक्त किया है। यह एक स्ट्रेटेजिक (strategic) कदम है, जिसका मकसद कंपनी के ऐसे बिजनेस को मजबूत करना है जो डिलीवरी पर कम निर्भर हैं और जिनकी प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) ज्यादा है। Swiggy में सेल्स, मोनेटाइजेशन (monetization) और लीडरशिप का अनुभव रखने वाले Bajpai अब डाइनिंग डिस्कवरी, रिजर्वेशन, बिल पेमेंट और एक्सपीरियंशियल (experiential) सेवाओं को बढ़ाने का जिम्मा संभालेंगे।
इन दोनों यूनिट्स को एक ही लीडर के तहत लाने का लक्ष्य ऑपरेशंस को स्ट्रीमलाइन (streamline) करना और मार्केट में इनकी पकड़ मजबूत करना है। यह Swiggy के फूड डिलीवरी से आगे बढ़कर रेवेन्यू को डाइवर्सिफाई (diversify) करने की कोशिश का हिस्सा है। Swiggy ने 2022 में Dineout का अधिग्रहण किया था, और अब इसे एक कोर, स्ट्रेटेजिक डिवीजन (strategically managed division) के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
Zomato के गढ़ में Swiggy की सेंधमारी?
भारत का फूड टेक सेक्टर (food tech sector) काफी कॉम्पिटिटिव (competitive) है, जहां Swiggy और Rival Zomato लगातार अपनी स्ट्रैटेजीज़ (strategies) में बदलाव कर रहे हैं। Zomato फूड डिलीवरी में 55-58% मार्केट शेयर के साथ आगे है, जबकि Swiggy का शेयर 42-45% है। Zomato ने अपने बिजनेस को आक्रामक तरीके से डाइवर्सिफाई किया है। Q2 FY25 में Zomato का फूड डिलीवरी GOV ₹9,690 करोड़ था, जो Swiggy के ₹7,191 करोड़ से 35% ज्यादा था। Zomato का Blinkit क्विक कॉमर्स (quick commerce) GOV ₹6,132 करोड़ था, जिसने Swiggy के Instamart को पीछे छोड़ दिया। Zomato का 'Going Out' सेगमेंट इवेंट्स और रेस्टोरेंट बिल पेमेंट जैसी सेवाओं के जरिए एड रेवेन्यू (ad revenue) और कस्टमर वैल्यू बढ़ाता है।
मार्केट का मूड और भविष्य की राह
Swiggy का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का फूड टेक और सर्विस मार्केट (food service market) तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि भारत का फूड टेक मार्केट 2030 तक $27.3 बिलियन ( 14% CAGR) तक पहुंच जाएगा, जबकि फूड सर्विस मार्केट 2034 तक लगभग $138.2 बिलियन तक जा सकता है। कंज्यूमर डाइनिंग खर्च (consumer dining spending) में भारी उछाल आया है, जो H1 FY26 में ₹1,056 करोड़ प्रतिदिन तक पहुंच गया। UPI ट्रांजैक्शन्स (UPI transactions) में 34% की बढ़ोतरी ने इसे और बढ़ावा दिया है।
चुनौतियां और वैल्यूएशन का खेल
Zomato की वैल्यूएशन (valuation) का गणित थोड़ा जटिल है। इसका P/E रेशियो (89.8 से 650x से ऊपर) भविष्य की कमाई के लिए हाई इन्वेस्टर एक्सपेक्टेशंस (investor expectations) दिखाता है। उदाहरण के लिए, Q3 FY26 में Zomato ने ₹16,315 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹102 करोड़ का नेट प्रॉफिट (net profit) दर्ज किया। Swiggy के लिए बड़ी चुनौतियां भी हैं। Zomato की फूड डिलीवरी मार्केट शेयर और क्विक कॉमर्स में बढ़त एक महत्वपूर्ण कॉम्पिटिटिव एज (competitive edge) है। Swiggy अभी भी नेट लॉस (net loss) में चल रही है, Q3 FY25 में इसके क्विक कॉमर्स सेगमेंट में ₹799 करोड़ का लॉस दर्ज किया गया। Dineout और Scenes को इंटीग्रेट (integrate) करने में भी ऑपरेशनल और सर्विस क्वालिटी से जुड़े रिस्क (risks) शामिल हैं।
Bajpai के नेतृत्व में, Swiggy का Dineout और Scenes बिजनेस कमीशन, एडवरटाइजिंग (advertising) और प्रीपेड डील्स (prepaid deals) के जरिए रेवेन्यू बढ़ाने पर ध्यान देगा, जिसमें फूड डिलीवरी की तुलना में लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (logistics cost) कम होगी। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितना 'गोइंग आउट' मार्केट कैप्चर कर पाता है और Swiggy की प्रॉफिटेबिलिटी में कितना योगदान देता है। Zomato से मुकाबला जारी रहेगा, जिससे इनोवेशन (innovation) को बढ़ावा मिलेगा।
