कंपनी की रणनीति में बड़ा बदलाव: 'Snacc' पर ताला
Swiggy ने अपने 15 मिनट वाली फूड डिलीवरी ऐप 'Snacc' का परिचालन बंद कर दिया है। बेंगलुरु और गुरुग्राम में शुरू की गई यह एक्सपेरिमेंटल सर्विस ज्यादा बड़ा रूप नहीं ले पाई, जिसके बाद कंपनी ने इसे बंद करने का फैसला किया। यह कदम बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पूंजी की तंगी के बीच कंपनी के अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने और प्रॉफिट पर ध्यान केंद्रित करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
वित्तीय प्रदर्शन पर कसा शिकंजा
Swiggy के लिए यह फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 2026 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) वित्तीय नतीजों के लिहाज से मिली-जुली रही। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 54% बढ़कर ₹6,148 करोड़ हो गया, लेकिन नेट लॉस (Net Loss) ₹799 करोड़ से बढ़कर ₹1,065 करोड़ पर पहुंच गया। रेवेन्यू में तेज उछाल के बावजूद बढ़ता हुआ नुकसान, खासकर 15 मिनट डिलीवरी जैसी तेज सर्विस की ऊंची ऑपरेशनल लागत को दर्शाता है।
मुख्य कारोबार और इंस्टामार्ट का हाल
कंपनी के क्विक-कॉमर्स (Quick-commerce) यानी इंस्टामार्ट (Instamart) बिजनेस का रेवेन्यू 76% बढ़कर ₹1,016 करोड़ हो गया। हालांकि, इस सेगमेंट में ₹908 करोड़ का घाटा हुआ है। इसके पीछे 1,130 से ज्यादा डार्क स्टोर्स (Dark Stores) का नेटवर्क और Blinkit व Zepto जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है। वहीं, Swiggy के मुख्य फूड डिलीवरी बिजनेस ने 0.7% का पॉजिटिव एडजस्टेड EBITDA मार्जिन हासिल किया है, जो एक बड़ी राहत है।
फंडिंग और भविष्य की राह
कंपनी ने हाल ही में ₹10,000 करोड़ की बड़ी QIP (Qualified Institutional Placement) के जरिए फंड जुटाया है, जो उसकी बैलेंस शीट को मजबूत करने में मदद करेगा। ऐसे में, 'Snacc' जैसे एक्सपेरिमेंटल प्रोजेक्ट्स को बंद करके मुख्य बिजनेस पर फोकस करना, कंपनी की वित्तीय अनुशासन की ओर बढ़ती मंशा को दिखाता है। बाजार की मौजूदा स्थिति में निवेशक अब तेजी से स्केल बढ़ाने के बजाय प्रॉफिटेबिलिटी और यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। Swiggy के सामने अब लागत कम करने और प्रॉफिट कमाने का स्पष्ट रास्ता दिखाने की बड़ी चुनौती है।