Sterlite Technologies Ltd. के शेयरों ने आज, 10 फरवरी, 2026 को निवेशकों को खुश कर दिया। शेयर 14% से अधिक की छलांग लगाकर ₹163.40 के स्तर पर पहुंच गए, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। यह लगातार दूसरे दिन की तेजी है, और पिछले एक महीने में स्टॉक करीब 70% तक चढ़ चुका है।
इस ज़बरदस्त तेजी के पीछे की मुख्य वजह है अमेरिका द्वारा भारतीय एक्सपोर्ट पर लगाए गए टैरिफ (Tariff) में राहत की उम्मीद। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है, और कुछ दंडित शुल्क भी हटा दिए गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इससे कंपनी के मार्जिन (Margin) में सुधार होगा और ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा। इसी बीच, ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने भी सोमवार, 9 फरवरी को 'बाय' रेटिंग (Buy Rating) बरकरार रखते हुए स्टॉक का टारगेट प्राइस ₹200 रखा है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
निवेशकों की दिलचस्पी का आलम यह था कि 10 फरवरी को 1.88 करोड़ से ज़्यादा शेयर ट्रेड हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹294 करोड़ रही।
लेकिन, इस तेजी के बावजूद, Sterlite Technologies के फंडामेंटल (Fundamental) नंबर्स कुछ चिंताएं बढ़ा रहे हैं। FY26 की तीसरी तिमाही, जो दिसंबर 2025 में खत्म हुई, उसमें कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) ₹1,257 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा (EBITDA) पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 16.2% बढ़कर ₹129 करोड़ हो गया।
मगर, EBITDA मार्जिन में कमी आई है। यह पिछले साल के 11.1% से घटकर 10.3% पर आ गया है। यह बताता है कि कंपनी पर लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दिसंबर तिमाही में कंपनी को ₹17 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) हुआ है। हालांकि यह पिछले साल के ₹24 करोड़ के घाटे से कम है, लेकिन यह अभी भी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) की चुनौती को दिखाता है।
कंपनी के वैल्यूएशन (Valuation) मेट्रिक्स भी इस तस्वीर को और जटिल बनाते हैं। Sterlite Technologies का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो बहुत ज़्यादा है, जो कि 'महंगा' माना जा रहा है। 5 फरवरी, 2026 तक यह 371.53 के स्तर पर था। इसके अलावा, कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) -8.15% है, यानी यह निगेटिव है। वहीं, डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) भी लगभग 0.93 है, जो बताता है कि कंपनी पर कर्ज का बोझ काफी है।
Sterlite Technologies भारतीय टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है, जो 5G, डेटा की बढ़ती मांग और डिजिटल इकोनॉमी के कारण तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका में टैरिफ कम होने से Sterlite और HFCL जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है।
लेकिन, जब इसकी तुलना peers से की जाती है, तो Sterlite की वित्तीय सेहत उतनी मजबूत नहीं दिखती। Finolex Cables और RR Kabel जैसी भारतीय कंपनियों के P/E रेशियो 36 से काफी कम हैं, जबकि Sterlite का P/E रेशियो घाटे की तुलना में बहुत अधिक है।
फिलहाल, इस शेयर में चल रही तेजी टैरिफ में राहत और सेक्टर की ग्रोथ की उम्मीदों पर ज़्यादा आधारित दिख रही है, न कि कंपनी के मुख्य प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में आए सुधार पर। लगातार हो रहे नेट लॉस (Net Loss) और सिकुड़ते मार्जिन (Margin) के बावजूद स्टॉक का इतना ऊपर जाना, इसे एक सट्टा (Speculative) दांव जैसा बनाता है।
एक पूर्व मामले में Sterlite Tech को ट्रेड सीक्रेट्स केस में $96 मिलियन का जुर्माना भी भरना पड़ा था, जो कानूनी चुनौतियों के इतिहास को दर्शाता है। हालांकि Nuvama जैसे ब्रोकरेज ₹200 का टारगेट दे रहे हैं, लेकिन अन्य विश्लेषकों का औसत टारगेट प्राइस करीब ₹129.00 है। 28 जनवरी, 2026 तक के Mojo Score के अनुसार, Sterlite को 'Sell' ग्रेड मिला हुआ है। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रैली कितनी टिकाऊ साबित होती है।