Sasken Technologies Share: निवेशकों की चांदी! नतीजे आए ऐसे कि शेयर बना रॉकेट, 52-हफ्ते की रिकॉर्ड ऊंचाई पर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sasken Technologies Share: निवेशकों की चांदी! नतीजे आए ऐसे कि शेयर बना रॉकेट, 52-हफ्ते की रिकॉर्ड ऊंचाई पर
Overview

Sasken Technologies के शेयर ने आज निवेशकों को खुश कर दिया। कंपनी के Q4 FY26 के नतीजे धमाकेदार रहे, जिसमें रेवेन्यू (Revenue) और प्रॉफिट (Profit) दोनों में **125%** की जबरदस्त उछाल देखी गई। इस शानदार परफॉरमेंस की बदौलत स्टॉक अपने **52-हफ्ते के नए हाई** पर पहुंच गया।

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मुनाफे और रेवेन्यू में तूफानी उछाल

कंपनी के ताज़ा नतीजों की मानें तो, चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹334.02 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 125% ज़्यादा है। नेट प्रॉफिट (Net Profit) भी 125% बढ़कर ₹26.98 करोड़ हो गया।

पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, Borqs के अधिग्रहण (Acquisition) का फायदा मिला और कुल रेवेन्यू ₹1,113.17 करोड़ के पार चला गया।

रेवेन्यू बढ़ा, पर मार्जिन रहे टाइट

हालांकि, रेवेन्यू में इस तेज ग्रोथ के बावजूद, कंपनी का EBIT मार्जिन (EBIT Margin) Q4 FY26 में 6.8% पर रहा। कंसोलिडेटेड EBIT में पिछले साल की तुलना में 559.7% का बड़ा उछाल आया और यह ₹22.85 करोड़ पर पहुंच गया। लेकिन, यह सवाल उठता है कि इतनी हाई ग्रोथ पर ये मार्जिन कितने टिकाऊ हैं।

पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, नेट प्रॉफिट में 16.1% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹58.65 करोड़ रहा। यह दिखाता है कि पूरे साल के लिहाज़ से प्रॉफिट ग्रोथ, रेवेन्यू ग्रोथ से काफी पीछे रही है।

स्टॉक का वैल्यूएशन बनाम फंडामेंटल्स

अब आते हैं स्टॉक के वैल्यूएशन (Valuation) पर। Sasken Technologies फिलहाल 40x से 50x के P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन, बड़ी आईटी कंपनियों जैसे Tata Consultancy Services और Infosys (जो लगभग 16x-17x पर हैं) से काफी ज़्यादा है।

Persistent Systems और Tata Elxsi जैसी ग्रोथ-फोकस्ड कंपनियों के P/E रेश्यो भी Sasken के आसपास (लगभग 40x P/E) हैं। लेकिन Sasken का ऐतिहासिक प्रॉफिट ग्रोथ अस्थिर रहा है। पिछले एक साल में नेट प्रॉफिट 42.07% घटा था और तीन साल में 27.57% नेगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई थी। ऐसे में, यह ताज़ा उछाल शायद सिर्फ मार्केट मोमेंटम और अधिग्रहण का असर लग रहा है, न कि लगातार प्रॉफिट रिकवरी का।

कंपनी ने ₹13 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) भी सुझाया है, जो पहले दिए गए ₹12 के इंटरिम डिविडेंड के अतिरिक्त है। यह डिविडेंड आय चाहने वाले निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

मुख्य जोखिम और विश्लेषकों की चिंताएं

निवेशकों के लिए चिंताएं भी कम नहीं हैं। Sasken का पुराना प्रॉफिट ट्रैक रिकॉर्ड, 6.8% का पतला EBIT मार्जिन और हालिया हाई ग्रोथ पर टिकाऊपन के सवाल, ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सवाल खड़े करते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि स्टॉक का करंट मार्केट प्राइस (लगभग ₹1,362.20) और एनालिस्ट्स का टारगेट प्राइस (₹830.00) के बीच बड़ा अंतर है। ब्रोकरेज फर्मों की 'होल्ड' रेटिंग और ₹830 का टारगेट यह इशारा करता है कि एनालिस्ट्स को यह वैल्यूएशन टिकाऊ नहीं लग रहा।

इसके अलावा, कंपनी पर ₹314.01 करोड़ की कंटिंजेंट लायबिलिटीज़ (Contingent Liabilities) भी हैं, जो इसकी वित्तीय सेहत के लिए एक अतिरिक्त जोखिम हैं।

आगे की राह और मैनेजमेंट का फोकस

आगे चलकर, Sasken मैनेजमेंट अपनी 'Chip-to-Cognition' स्ट्रैटेजी पर फोकस कर रहा है, जिसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ में निवेश और विस्तार शामिल है। Borqs के अधिग्रहण को इंटीग्रेट करके IoT और 5G पेशकश को मज़बूत करना एक मुख्य प्राथमिकता है।

कंपनी नई मार्केट ऑपर्च्युनिटीज़ का फायदा उठाना चाहती है और अपने क्लाइंट बेस को बढ़ाना चाहती है। हालांकि IT सेक्टर में AI जैसी सेवाओं की मांग बढ़ रही है, Sasken का लगातार वैल्यू क्रिएशन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह रेवेन्यू ग्रोथ को स्थिर और मुनाफेदार अर्निंग्स में बदल पाता है या नहीं, और क्या उसका वैल्यूएशन मार्केट की उम्मीदों के साथ तालमेल बिठा पाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.