भारत को आत्मनिर्भर AI बनाने की जुगत
Sarvam AI, जो भारतीय AI इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए काम कर रही है, एक बड़े फंडिंग राउंड को अंतिम रूप देने के करीब है। यह फंडिंग $300 मिलियन से $350 मिलियन के बीच हो सकती है, और इसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन $1.5 बिलियन से $1.55 बिलियन के पार जा सकता है। इस फंडिंग में Bessemer Venture Partners, Nvidia, Amazon, और Prosperity7 Ventures जैसे बड़े नामों के शामिल होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि निवेशक भारत की अपनी AI क्षमताओं पर कितना भरोसा कर रहे हैं। Sarvam AI का लक्ष्य विदेशी टेक दिग्गजों पर निर्भरता कम करना और भारत के लिए 'सोवरेन AI' (Sovereign AI) यानी संप्रभु AI को बढ़ावा देना है। 2023 में शुरू हुई यह कंपनी, छोटी सी टीम (लगभग 10 लोग) के साथ AI स्पेस में तहलका मचा रही है। भारत में स्टार्टअप फंडिंग में नरमी के बावजूद, यह डीप-टेक स्टार्टअप भारी निवेश आकर्षित कर रहा है।
'इंडियाएआई मिशन' को मिलेगी नई रफ्तार
Sarvam AI की रणनीति सीधे तौर पर भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 'इंडियाएआई मिशन' (IndiaAI Mission) से जुड़ी है, जिसके लिए अगले पांच सालों में करीब ₹10,372 करोड़ का बजट रखा गया है। इस मिशन का मकसद देश में AI की क्षमताओं को बढ़ाना, जरूरी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर देना और स्किल्स को बेहतर बनाना है। सरकार 50,000 से ज्यादा NVIDIA H100 GPUs पब्लिक के लिए उपलब्ध करा रही है, जो ग्लोबल क्लाउड प्रोवाइडर्स की तुलना में काफी कम कीमत पर हाई-एंड AI हार्डवेयर एक्सेस देंगे। उदाहरण के लिए, India AI Portal पर ₹65 प्रति GPU घंटा के हिसाब से कंप्यूट एक्सेस मिल सकता है, जबकि AWS और Google हजारों रुपये लेते हैं। Sarvam AI का फोकस 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर्स वाले लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) बनाने पर है। ये मॉडल 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेंगे और देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, कंपनी ऐसे 'एजेंटिक' AI सिस्टम भी डेवलप कर रही है जो खुद से काम कर सकें। ये सिस्टम भारतीय एंटरप्राइज क्लाइंट्स को टारगेट करेंगे। इस फील्ड में Google, Microsoft, और भारत के अपने Krutrim जैसे खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं।
AI की रेस में चुनौतियां और जोखिम
भारी फंडिंग और सरकारी सपोर्ट के बावजूद, Sarvam AI के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। भारत के 'सोवरेन AI' के सपने में कंप्यूटिंग पावर की कमी एक बड़ी बाधा है। GPUs की ग्लोबल शॉर्टेज और चिप्स मिलने में देरी, इनफ्रास्ट्रक्चर की कमी को और बढ़ा रही है। कंप्यूट की लागत कैपिटल एक्सपेंडिचर का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लागत बढ़ती है। भारत में AI रेगुलेटरी फ्रेमवर्क भी अभी बन रहा है। इसके अलावा, AI प्रोफेशनल्स की कमी भी एक चुनौती है, क्योंकि मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बेहद खर्चीला है, और कुछ अनुमानों के मुताबिक, 2030 तक AI कंपनियों को सिर्फ कंप्यूटिंग के लिए $500 बिलियन (लगभग ₹41 लाख करोड़) तक खर्च करने पड़ सकते हैं। Sarvam AI को अपने लोकल मॉडलों को ग्लोबल दिग्गजों से मुकाबला कराना होगा, जिनके पास पहले से ही मजबूत क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल डेटासेट हैं।