Route Mobile को ₹18.83 Cr का झटका! Q3 में हुआ भारी नेट लॉस, पर शेयरधारकों को मिलेगा ₹3 का डिविडेंड

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Route Mobile को ₹18.83 Cr का झटका! Q3 में हुआ भारी नेट लॉस, पर शेयरधारकों को मिलेगा ₹3 का डिविडेंड
Overview

Route Mobile ने तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में **₹18.83 करोड़** का बड़ा नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के **₹85.47 करोड़** के प्रॉफिट (Profit) से एक बड़ा उलटफेर है। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी **6.5%** गिरकर **₹1,107.06 करोड़** पर आ गया है। इस तिमाही में **₹135.87 करोड़** के खास खर्चों (Exceptional Items) का बड़ा असर रहा।

नुकसान के पीछे की बड़ी वजहें (The Financial Deep Dive)

Route Mobile Limited के नतीजों में सबसे बड़ा झटका ₹135.87 करोड़ के एक्सेप्शनल आइटम्स (Exceptional Items) का रहा। इनमें से ₹107.96 करोड़ वेंडर एडवांसेज (Vendor Advances) के राइट-ऑफ (Write-off) थे, जो पिछले कालों में कंपनी द्वारा अपने वेंडर्स को दिए गए एडवांस थे और जिनकी वसूली अब मुश्किल हो गई है। मौजूदा तिमाही में ₹27.91 करोड़ के और ऐसे राइट-ऑफ हुए। इन खास खर्चों ने कंपनी के नतीजों पर गहरा असर डाला, जिसके चलते नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया गया।

इसके अलावा, पिछले नौ महीनों का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) भी 47.9% की भारी गिरावट के साथ ₹142.51 करोड़ पर आ गया।

वेंडर मैनेजमेंट पर सवाल और आगे की राह (Risks & Outlook)

वेंडर एडवांसेज का इतनी बड़ी मात्रा में राइट-ऑफ होना, कंपनी के वेंडर मैनेजमेंट (Vendor Management), ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) और ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर कंपनी इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से हल नहीं कर पाती है, तो भविष्य में भी उसकी प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर इसका असर दिख सकता है।

इन वित्तीय चुनौतियों के बीच, बोर्ड ने शेयरधारकों को ₹3 प्रति इक्विटी शेयर का तीसरा अंतरिम डिविडेंड (Third Interim Dividend) देने का ऐलान किया है, जो FY2025-26 के लिए है।

कंपनी ने भविष्य की ग्रोथ (Growth) और चुनौतियों से निपटने के लिए नेतृत्व में भी बदलाव किया है। मिस्टर राजदीपकुमार गुप्ता को मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) के पद पर बनाए रखा गया है, जबकि मिस्टर तुषार अग्निहोत्री को नए चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (Chief Executive Officer - CEO) के तौर पर नियुक्त किया गया है। अब सबकी निगाहें नए CEO की रणनीति पर होंगी कि वे कंपनी को रेवेन्यू की सुस्ती और ऑपरेशनल जोखिमों से उबारकर वापस प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और ग्रोथ (Growth) की पटरी पर कैसे लाते हैं।

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