RRP Semiconductor Share: ऑडिटर की रेड अलर्ट, ₹12 करोड़ का विवाद और लिस्टिंग पर गहराया संकट!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RRP Semiconductor Share: ऑडिटर की रेड अलर्ट, ₹12 करोड़ का विवाद और लिस्टिंग पर गहराया संकट!
Overview

RRP Semiconductor Limited के निवेशकों के लिए बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। कंपनी के Q3 FY26 के लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में ऑडिटर ने ₹12 करोड़ के एक बड़े विवाद के साथ-साथ वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही, शेयरों की लिस्टिंग की मंजूरी रद्द होने के खिलाफ कंपनी की अपील ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

🚨 लिस्टिंग पर मंडरा रहा खतरा: SAT में चल रही है बड़ी जंग!

RRP Semiconductor Limited (पहले GD Trading & Agencies Limited) के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में चल रही अपील है। यह मामला कंपनी द्वारा प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जारी किए गए शेयरों की लिस्टिंग की मंजूरी रद्द होने से जुड़ा है। दरअसल, किसी दूसरी कंपनी, जिसमें RRP Semiconductor प्रमोटर है, के डिलिस्टिंग (Delisting) प्रोसीडिंग्स के कारण यह मंजूरी रद्द की गई थी। SAT ने फिलहाल स्थिति यथावत बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया है, जिसका मतलब है कि कानूनी और रेगुलेटरी अनिश्चितता अभी बनी हुई है।

📉 ऑडिटर की सख्त हिदायत: ₹12 करोड़ का विवाद और खातों में गड़बड़ी?

कंपनी के ऑडिटर, PAMS & ASSOCIATES, ने Q3 FY26 के लिए अपनी लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कई गंभीर बातों पर ध्यान आकर्षित किया है। सबसे प्रमुख है एक सब-कॉन्ट्रैक्टर M/s. Telecrown Infratech Private Limited के साथ ₹12.00 करोड़ के सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर चल रहा विवाद। RRP Semiconductor इस रकम की रिकवरी के लिए कानूनी कार्रवाई कर रही है, जिससे बैड डेट (Bad Debt) या रेवेन्यू रिवर्सल का खतरा बना हुआ है।

इसके अलावा, ऑडिटर ने कंपनी के संड्री रिसीवेबल्स (Sundry Receivables), पेयबल्स (Payables) और अन्य आउटस्टैंडिंग बैलेंसेज (Outstanding Balances) पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कई रकमों के लिए कन्फर्मेशन (Confirmation) या सपोर्टिंग एविडेंस (Supporting Evidence) उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनकी सटीकता और रिकवरी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऑडिटर ने पहले की तरह यह भी दोहराया है कि कंपनी के शेयरों का मार्केट प्राइस (Market Price) उसके वित्तीय प्रदर्शन से मेल नहीं खाता। मैनेजमेंट का कहना है कि वे मार्केट वैल्यूएशन (Market Valuation) पर कोई नियंत्रण नहीं रखते।

हालांकि ऑडिटर ने यह निष्कर्ष निकाला है कि वित्तीय स्टेटमेंट में कोई मटेरियल मिसस्टेटमेंट (Material Misstatement) नहीं है, लेकिन ऊपर बताई गई गंभीर बातों पर उनका विशेष ध्यान देना यह दर्शाता है कि कंपनी को भविष्य में वित्तीय और ऑपरेशनल जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

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