इंडिगो की अव्यवस्था पर कानूनी बवाल: यात्रियों ने एयरलाइन और सरकार पर किया मुकदमा, टिकट मूल्य से 4 गुना मुआवजे की मांग!
Overview
दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें इंडिगो और केंद्र सरकार से नवंबर और दिसंबर में रद्द हुई उड़ानों के लिए यात्रियों को टिकट मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग की गई है। ये रद्दीकरण नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FTDL) नियमों के कारण हुए, जिसके चलते इंडिगो का स्टाफिंग मॉडल अपर्याप्त साबित हुआ, जिससे व्यापक व्यवधान, बैगेज की समस्याएं और यात्रियों को असुविधा हुई। याचिका में विमानन प्राधिकरण की लापरवाही की जांच और इंडिगो के खिलाफ क्लास-एक्शन सूट की भी मांग की गई है।
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दिल्ली हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जो इंडिगो एयरलाइन और केंद्र सरकार को नवंबर और दिसंबर में हुई व्यापक उड़ान रद्दीकरण के संबंध में लक्षित कर रही है। इस याचिका में एयरलाइन और केंद्र से प्रभावित यात्रियों को टिकट मूल्य का चार गुना मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह कानूनी चुनौती नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FTDL) नियमों के हालिया कार्यान्वयन से उत्पन्न हुई है, जिसने कथित तौर पर इंडिगो की परिचालन क्षमता पर दबाव डाला है। PIL में हजारों यात्रियों को हुई गंभीर असुविधाओं पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें बैगेज की समस्याएं, लंबी देरी, खराब संचार, और रिफंड व री-बुकिंग विकल्पों को लेकर भ्रम शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंडिगो 'स्केलेटल स्टाफिंग' मॉडल पर काम करती है, जिसमें प्रति विमान लगभग 14 पायलट हैं। नए FDTL नियम, जो पायलटों के लिए अधिक आराम की अवधि अनिवार्य करते हैं, ने फ्लाइट क्रू की प्रभावी उपलब्धता को कम कर दिया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इससे एयरलाइन की मौजूदा स्टाफिंग संख्या नियमित उड़ान अनुसूची बनाए रखने के लिए अपर्याप्त हो गई है, जिससे राष्ट्रीय विमानन संकट पैदा हो गया है। सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (CASC), अपने अध्यक्ष प्रोफेसर विक्रम सिंह के माध्यम से, याचिकाकर्ता है। उनका तर्क है कि हजारों उड़ानों के व्यवधान और अंतिम-मिनट रद्दीकरण ने विमानन क्षेत्र में भारी कठिनाई और व्यापक चिंता पैदा की है। याचिका में विस्तार से बताया गया है कि कैसे हवाई अड्डे गलत दिशा में भेजे गए बैगेज से अभिभूत हो गए और यात्रियों को अत्यधिक विलंब का सामना करना पड़ा।