Quick Commerce का नया मंत्र: सिर्फ स्पीड नहीं, वैरायटी पर फोकस! क्या प्रॉफिट में आएगी तेज़ी?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Quick Commerce का नया मंत्र: सिर्फ स्पीड नहीं, वैरायटी पर फोकस! क्या प्रॉफिट में आएगी तेज़ी?
Overview

क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कंपनियां अब सिर्फ तेजी से डिलीवरी करने के बजाय ज्यादा प्रोडक्ट्स ऑफर करने पर ध्यान दे रही हैं, जिसमें नॉन-ग्रोसरी आइटम्स भी शामिल हैं। इसका मकसद ऑर्डर वैल्यू बढ़ाना और कस्टमर लॉयल्टी हासिल करना है। हालांकि, इस नई रणनीति से ऑपरेशनल दिक्कतें, लागत में बढ़ोतरी और रेगुलेटरी जांच बढ़ रही है, जिससे प्रॉफिट कमाना मुश्किल हो रहा है।

स्पीड छोड़, वैरायटी पर जोर

क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव आ रहा है। अब कंपनियां सिर्फ डार्क स्टोर्स (Dark Stores) तेजी से खोलने के बजाय प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने और कैटेगरी में गहराई लाने पर फोकस कर रही हैं। यह समझ आ गया है कि सिर्फ स्पीड ही नहीं, बल्कि कस्टमर कितना सामान खरीदता है और कितनी बार वापस आता है, यह ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के लिए ज्यादा जरूरी है। कंपनियाँ अब ज्यादा प्रोडक्ट्स (SKUs) और नॉन-ग्रोसरी आइटम्स पर जोर दे रही हैं, जो दिखाता है कि यह इंडस्ट्री मैच्योर हो रही है जहाँ एफिशिएंसी (Efficiency) और कस्टमर वैल्यू मुख्य हैं।

ग्रोसरी से आगे: प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाना

प्रमुख कंपनियां इस बदलाव को दिखा रही हैं। उदाहरण के लिए, Swiggy Instamart ने बताया है कि नॉन-ग्रोसरी ऑर्डर्स में बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले क्वार्टर के 26% से बढ़कर अब कुल ऑर्डर वैल्यू का 32% हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, होम गुड्स और खिलौनों जैसे सेगमेंट्स में यह कदम ग्रोसरी के बाहर भी कंज्यूमर खर्च का बड़ा हिस्सा कैप्चर करने का लक्ष्य दिखाता है। हालांकि Blinkit और Swiggy Instamart ने सटीक SKU नंबर्स शेयर नहीं किए हैं, Zepto के पास लगभग 40,000 SKUs होने का अनुमान है। Blinkit भी कुछ खास प्रोडक्ट्स जोड़ने पर विचार कर रहा है, जबकि Instamart 'असॉर्टमेंट एक्सपेंशन' (Assortment Expansion) को ग्रोथ का बड़ा ड्राइवर बता रहा है। इसका मकसद है: ज्यादा सिलेक्शन से एवरेज ऑर्डर वैल्यू बढ़ेगी और कस्टमर लॉयल्टी मजबूत होगी।

मार्केट ग्रोथ और फाइनेंशियल हेल्थ

क्विक कॉमर्स मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है। ग्लोबल लेवल पर इसका वैल्यूएशन 2025 में $122.57 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $1,361.39 बिलियन होने का अनुमान है, जिसकी एनुअल ग्रोथ रेट 28.1% है। भारत में, इस सेक्टर का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 2030 तक करीब $4 बिलियन से बढ़कर $25 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। यह एक्सपेंशन भारी निवेश के बीच हो रहा है। Zomato (Eternal), जो Blinkit की पैरेंट कंपनी है, की मार्केट वैल्यू 30 मार्च, 2026 तक ₹225,017.23 करोड़ है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 973.81 पर बहुत ज्यादा है, जो दिखाता है कि इन्वेस्टर्स की उम्मीदें बहुत ऊंची हैं। वहीं, Swiggy हालिया फंडिंग राउंड के बाद डेकाकॉर्न ($10 बिलियन या उससे ज्यादा वैल्यू वाली कंपनी) बन गया है।

हालांकि, फाइनेंशियल पिक्चर थोड़ी कॉम्प्लेक्स है। Blinkit ने मजबूत ग्रोथ दिखाई है, जिसमें 140% ईयर-ऑन-ईयर ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) ग्रोथ और Q1 FY26 में एडजस्टेड EBITDA मार्जिन में तिमाही सुधार शामिल है, लेकिन इसकी प्रॉफिटेबिलिटी पर अभी भी बारीकी से नजर रखी जा रही है। एनालिस्ट्स के मिले-जुले विचार हैं: BofA Securities ने Zomato को 'Buy' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹350 रखा है, Blinkit की प्रगति और अपेक्षित मार्जिन गेन का हवाला देते हुए। वहीं, HDFC Securities ने 'Reduce' रेटिंग और ₹235 का टारगेट दिया है, जिसमें क्विक कॉमर्स को प्रॉफिटेबल बनाने की मुश्किलों और मार्केट के बहुत ज्यादा क्राउडेड होने के रिस्क का जिक्र है।

अहम चुनौतियाँ: कॉम्प्लेक्सिटी और बढ़ती लागत

ज्यादा प्रोडक्ट्स ऑफर करने के इस बदलाव के बावजूद, क्विक कॉमर्स सेक्टर कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ज्यादा प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा एडवांस इन्वेंट्री मैनेजमेंट, बड़े वेयरहाउस और ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत होती है, जिससे ऑपरेशन और ज्यादा कॉम्प्लेक्स हो जाते हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे टेंशन जैसे ग्लोबल टेंशन सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं। इसका मतलब है हायर पैकेजिंग कॉस्ट, शिपिंग में देरी और उन प्लेटफॉर्म्स के लिए रुकावटें जिन्हें बार-बार री-स्टॉक की जरूरत होती है। फ्यूल प्राइस में बदलाव और डार्क स्टोर जेनरेटर के लिए डीजल की लागत पर भी चिंता बनी हुई है, जो ऑपरेशन्स को स्मूथ रखने के लिए जरूरी हैं।

रेगुलेशंस को लेकर अनिश्चितता एक बड़ी चिंता है, खासकर भारत के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नियम। रेगुलेटर्स इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या डार्क स्टोर्स को अनुमति प्राप्त मार्केटप्लेस माना जाए या इन्वेंट्री रखने वाले प्रतिबंधित रिटेल बिजनेस। यह अंतर फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर बड़ा असर डाल सकता है। अतीत में, भारी निवेश और प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों की वैल्यू में बड़ी गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, Swiggy की वैल्यू 2022 की शुरुआत में $10.7 बिलियन से घटकर 2023 के मध्य तक $5.5 बिलियन रह गई थी। Zomato की मार्केट वैल्यू में भी IPO के बाद गिरावट आई थी। ये फैक्टर्स बताते हैं कि ज्यादा प्रोडक्ट्स के साथ भी टिकाऊ प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।

आगे की राह: एफिशिएंट ग्रोथ की ओर

भविष्य को देखते हुए, क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री का लक्ष्य एफिशिएंट ऑपरेशन्स और ग्रोथ दोनों हासिल करना है। Zomato, Blinkit के स्टोर काउंट को 3,000 तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। कंपनी बेहतर मार्जिन का लक्ष्य रखती है क्योंकि यह बिजनेस ज्यादा इन्वेंट्री को ओन करने की ओर बढ़ रहा है, जिससे संभावित रूप से नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) के 5-6% तक स्टेबल मार्जिन मिल सकता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्केट लीडर वे होंगे जिनके पास मजबूत एग्जीक्यूशन होगा, जिससे बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी वाले प्लेटफॉर्म्स को एज मिलेगा। सेक्टर का भविष्य वाइडर प्रोडक्ट ऑफरिंग्स को कॉस्ट कंट्रोल, रेगुलेशंस को नेविगेट करने और एक कठिन मार्केट में स्टेबल प्रॉफिट देने के बीच बैलेंस बनाने पर निर्भर करेगा।

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