Solar manufacturing के क्षेत्र में Premier Energies ने आज दो बड़े धमाके किए हैं। कंपनी ने न सिर्फ भारत की पहली Zero Busbar (0BB) TOPCon सोलर सेल को पेश किया है, जो सोलर सेल की एफिशिएंसी (efficiency) को बढ़ाएगी और चांदी (silver) की खपत को कम करेगी, बल्कि आने वाले तीन सालों में ₹12,500 करोड़ के भारी-भरकम Capital Expenditure (Capex) की घोषणा भी की है। यह निवेश कंपनी की सोलर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को दोगुना से भी ज्यादा करने और इनवर्टर (inverters) व ट्रांसफार्मर (transformers) जैसे सोलर इकोसिस्टम के दूसरे जरूरी सेगमेंट में विस्तार करने के लिए है।
Premier Energies का यह कदम भारत को सोलर इनोवेशन (innovation) में एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। 0BB टेक्नोलॉजी से बनी सोलर सेल अधिक कुशल (efficient) होंगी और कम चांदी के इस्तेमाल से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट (manufacturing cost) भी कम होगी। यह 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप, बढ़ती घरेलू और वैश्विक सोलर डिमांड को पूरा करने के लिए कंपनी को तैयार करेगा।
1995 में स्थापित Premier Energies को सोलर इंडस्ट्री में लगभग तीन दशक का अनुभव है। कंपनी ने पहले भी कई बार अपनी क्षमताएं बढ़ाई हैं और अब इंगोट (ingot) व वेफर (wafer) मैन्युफैक्चरिंग जैसी बैकवर्ड इंटीग्रेशन (backward integration) की ओर बढ़कर अपनी वैल्यू चेन (value chain) को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, इस बड़े विस्तार पर कुछ खतरे भी मंडरा रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय सोलर इम्पोर्ट पर लगाए गए 126% के शुरुआती टैरिफ (tariff) एक्सपोर्ट मार्केट के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकते हैं और डोमेस्टिक मार्केट में सप्लाई का दबाव बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, ₹12,500 करोड़ के इस मेगा Capex प्लान को समय पर और सफलतापूर्वक एग्जीक्यूट (execute) करना भी एक चुनौती होगी। भारतीय सोलर मार्केट में Adani Solar और Waaree Energies जैसे बड़े खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर भी मिल रही है। कंपनी को रेगुलेटरी (regulatory) नियमों का भी ध्यान रखना होगा, जैसे कि अप्रैल 2024 में शेयर डी-मटेरियलाइजेशन (share dematerialisation) के नियमों के उल्लंघन पर लगी पेनल्टी (penalty)। टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते रहने का रिस्क भी एक फैक्टर है।
FY24 के आंकड़ों के अनुसार, Premier Energies की सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी लगभग 2 GW और मॉड्यूल कैपेसिटी 4.13 GW थी। वहीं, जनवरी 2026 तक कंपनी के पास लगभग ₹13,000 करोड़ का डोमेस्टिक ऑर्डर बुक है, जो भविष्य की डिमांड को दर्शाता है।
अब निवेशकों की नजर Capex प्लान के एग्जीक्यूशन (execution) की प्रगति, नई 0BB सोलर सेल टेक्नोलॉजी के परफॉर्मेंस, अमेरिका के टैरिफ के असर और भविष्य में होने वाले कॉम्पिटिशन पर रहेगी।