Q4 नतीजे: रेवेन्यू चूका, मार्जिन पर दबाव
Persistent Systems ने अपने वित्त वर्ष 2026 का अंत चौथी तिमाही के मिले-जुले नतीजों के साथ किया है. कंपनी का रेवेन्यू USD 436 मिलियन रहा, जो USD 438 मिलियन के बाजार अनुमान से थोड़ा कम है. तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) रेवेन्यू डॉलर में 3.2% और स्थिर करेंसी (constant currency) में 3.4% बढ़ा. वहीं, एडजेस्टेड EBIT मार्जिन 16.3% दर्ज किया गया, जो कि उम्मीद से 16.6% से थोड़ा कम है.
हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) के नतीजों पर नजर डालें तो कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. FY26 में, INR में रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 23.5% बढ़ा. एडजेस्टेड EBIT में 31.5% और एडजेस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 33.2% की वृद्धि हुई. Q4 FY26 के लिए कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 26.3% रहा.
इस Q4 में रेवेन्यू में थोड़ी कमी और मार्जिन पर दबाव के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने स्टॉक पर 'BUY' रेटिंग को ₹6,200 के टारगेट प्राइस के साथ बनाए रखा है. हालांकि, उन्होंने इस कमजोर तिमाही और AI में हो रहे रणनीतिक निवेश को ध्यान में रखते हुए अपने अनुमानों को लगभग 4-5% तक संशोधित (revise) किया है.
AI पर बड़ा निवेश, लागत बढ़ी, शेयर प्रीमियम पर
Persistent Systems अपनी AI क्षमताओं को बढ़ाने में भारी निवेश कर रही है, जिसे मैनेजमेंट हालिया मार्जिन गिरावट का एक प्रमुख कारण बता रहा है. इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य AI के बढ़ते चलन का फायदा उठाकर भविष्य की ग्रोथ सुनिश्चित करना है, जो कि आईटी सेक्टर में एक बड़ा ट्रेंड बन गया है.
लेकिन यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनी का शेयर प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है. Persistent Systems का ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो लगभग 47x है, जो इंडस्ट्री के औसत 23x से काफी ज्यादा है. इतने ऊंचे वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए कंपनी को लगातार मजबूत ग्रोथ दिखानी होगी.
बड़े आईटी प्लेयर भी AI के दौर से गुजर रहे हैं. HCLTech जैसी कंपनियों ने हाल ही में उम्मीद से कमजोर नतीजे और सतर्क FY27 रेवेन्यू फोरकास्ट ( 1-4% ) जारी किया था, जिसका कारण खर्च में सुस्ती और AI का बढ़ता असर बताया गया. यह संभव है कि AI ऑटोमेशन TCS, Infosys, और Wipro जैसी भारतीय आईटी फर्मों के लिए बिल करने योग्य घंटों (billable hours) और मूल्य निर्धारण शक्ति (pricing power) को कम करे, जिससे उन्हें अपने वैल्यूएशन का पुनर्मूल्यांकन करना पड़े.
Persistent Systems अपने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) वर्टिकल में मजबूत स्थिति बनाए हुए है. 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास ₹27,622.1 मिलियन का मजबूत कैश और निवेश का बैलेंस भी था.
वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं, शेयर में गिरावट
Persistent Systems के वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं. इसका 47x का P/E रेश्यो इंडस्ट्री एवरेज से दोगुने से भी ज्यादा है, जिसका मतलब है कि स्टॉक की कीमत को सही ठहराने के लिए कंपनी को लगातार मजबूत प्रदर्शन करना होगा.
हालिया बाजार की भावना भी थोड़ी सतर्क रही है. 22 अप्रैल 2026 तक, शेयर साल-दर-तारीख (YTD) में 18.36% गिर चुका है. यह निवेशकों की चिंता को दर्शाता है, खासकर AI के पारंपरिक रेवेन्यू स्ट्रीम पर पड़ने वाले असर को लेकर.
व्यापक भारतीय आईटी सेक्टर में भी भारी सुधार देखा गया है, Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई है. यह बाजार-व्यापी पुनर्मूल्यांकन (re-evaluation) को दर्शाता है, जो AI की वजह से ऑटोमेशन और मार्जिन पर संभावित असर के कारण हो रहा है.
AI-फर्स्ट रणनीति और एनालिस्ट की राय
भविष्य की ओर देखते हुए, Persistent Systems अपनी AI-फर्स्ट रणनीति का लाभ उठाकर ग्रोथ हासिल करने की योजना बना रही है. मैनेजमेंट को उम्मीद है कि AI निवेश के परिपक्व होने पर FY27-28 तक मार्जिन धीरे-धीरे बढ़कर लगभग 16.7-16.8% तक पहुंच जाएगा.
कंपनी ने Q4 FY26 के लिए USD 600.8 मिलियन का टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) और USD 445.1 मिलियन का एनुअल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (ACV) दर्ज किया.
विश्लेषकों का झुकाव कुल मिलाकर काफी हद तक सकारात्मक बना हुआ है. मोतीलाल ओसवाल की 'BUY' रेटिंग ₹6,200 के टारगेट प्राइस के साथ कायम है. अन्य विश्लेषकों द्वारा औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹5,831.91 है, जिसमें उच्चतम ₹7,861.00 और कुछ निम्नतम लक्ष्य ₹3,743.00 के आसपास हैं. कुल मिलाकर, 33 विश्लेषकों में से 20 'Buy', 8 'Sell' और 5 'Hold' रेटिंग देते हैं.
इस आशावादी दृष्टिकोण को समर्थन देने वाले कारकों में Persistent Systems की लगातार 24 तिमाहियों की रेवेन्यू ग्रोथ की मजबूत कड़ी और Brand Finance द्वारा 2026 में इसे 'दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली आईटी सर्विसेज ब्रांड' के रूप में पहचान मिलना शामिल है.
