मुनाफे में कैसे लौटी कंपनी?
Paytm ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही में अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है। कंपनी ने ₹225 करोड़ का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया, जो पिछले साल इसी अवधि में हुए ₹208 करोड़ के नेट लॉस (Net Loss) के मुकाबले एक बड़ी वापसी है। इतना ही नहीं, यह पिछले तिमाही (Q2 FY26) के ₹21 करोड़ के मुनाफे से भी 971% ज्यादा है। कंपनी का EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortisation) भी घाटे से निकलकर ₹156 करोड़ के पॉजिटिव स्तर पर आ गया है, जबकि पिछले साल यह ₹223 करोड़ के घाटे में था। इससे EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 7% पर पहुंच गया, जो पहले -12% था।
रेवेन्यू और मार्जिन में ज़बरदस्त ग्रोथ
Paytm की इस वापसी का बड़ा श्रेय इसके बढ़ते रेवेन्यू स्ट्रीम्स और बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी को जाता है। कंपनी का रेवेन्यू ऑपरेशन 20% बढ़कर ₹2,194 करोड़ हो गया। इसमें पेमेंट सर्विसेज (Payment Services) से होने वाली कमाई 21% बढ़कर ₹1,284 करोड़ पर पहुंची, जिसमें पेमेंट GMV (Gross Merchandise Value) और मर्चेंट सब्सक्रिप्शन का बड़ा योगदान रहा। वहीं, फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) के डिस्ट्रीब्यूशन से रेवेन्यू 34% बढ़कर ₹672 करोड़ तक पहुंच गया। सबसे खास बात यह है कि कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन प्रॉफिट (Contribution Profit) 30% बढ़कर ₹1,249 करोड़ हो गया, और कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन 52.5% से बढ़कर 57% हो गया (जो 447 basis points का सुधार है)। कंपनी ने खर्चों को भी कंट्रोल किया है, जिसके चलते इनडायरेक्ट एक्सपेंस (Indirect Expenses) 8% घटकर ₹1,092 करोड़ रह गए।
फिनटेक की दुनिया और रेगुलेटरी सपोर्ट
भारतीय फिनटेक सेक्टर में Paytm का यह प्रदर्शन काफी मायने रखता है, जो तेजी से बढ़ रहा है। कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सभी तीन जरूरी पेमेंट लाइसेंस (Payment Licenses) मिल गए हैं, जिससे वह ऑनलाइन मर्चेंट्स को दोबारा ऑनबोर्ड कर पा रही है। हालांकि, मार्केट में कॉम्पिटिशन कड़ा है, जहां PhonePe और Google Pay UPI ट्रांजैक्शंस में हावी हैं। Paytm की असली ताकत उसके विशाल मर्चेंट नेटवर्क में है, जिसके पास 1.44 करोड़ डिवाइस सब्सक्रिप्शन हैं।
निवेशकों की प्रतिक्रिया और स्टॉक पर असर
इन नतीजों के बीच, कुछ बड़े निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेची है। Elevation Capital ने लगभग ₹1,556 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, BNP Paribas और Integrated Core Strategies ने भी अपने कुछ शेयर बेचे हैं। डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) ने भी IPO के बाद पहली बार Paytm में अपनी हिस्सेदारी कम की है। कंपनी का स्टॉक भी कुछ उतार-चढ़ाव देख रहा है, जो जनवरी 2026 के अंत में ₹1,100-₹1,200 के आसपास ट्रेड कर रहा था। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फरवरी 2024 में RBI की पाबंदियों के बाद स्टॉक में लगभग 40% की गिरावट आई थी, जो रेगुलेटरी एक्शन के प्रति मार्केट की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
आगे क्या?
Paytm का अनुमान है कि आने वाले समय में इनडायरेक्ट एक्सपेंस रेवेन्यू की तुलना में धीमी गति से बढ़ेंगे। साथ ही, FY26 में डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन (Depreciation and Amortisation) भी पिछले फाइनेंशियल ईयर से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी का फोकस अब हाई-मार्जिन फाइनेंशियल सर्विसेज पर है, जो इसे फिनटेक की बदलती दुनिया में आगे बढ़ने में मदद करेगा, हालांकि कॉम्पिटिशन और रेगुलेटरी अनुपालन प्रमुख चिंताएं बने रहेंगी।