Q3 में कैसा रहा प्रदर्शन?
Orient Technologies के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। कंपनी को ₹14.96 करोड़ का नेट लॉस हुआ। यह घाटा मुख्य रूप से ग्लोबल सेमीकंडक्टर की कमी, सप्लाई चेन में आई बाधाओं और एक बड़े टेलीकॉम क्लाइंट के हाथ से निकल जाने की वजह से हुआ। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की तुलना में 4.17% घटकर ₹198.23 करोड़ पर आ गया।
सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से मिली बड़ी राहत
लेकिन, इसी दौरान कंपनी के लिए एक अच्छी खबर भी आई। Orient Technologies ने Digital India Corporation के साथ 3 साल का एक बड़ा मैनेज्ड सर्विसेज कॉन्ट्रैक्ट (Managed Services Contract) साइन किया है। इस कॉन्ट्रैक्ट की कुल वैल्यू ₹60 करोड़ सालाना होगी, जिससे कंपनी को एक स्थिर आमदनी (recurring revenue) का जरिया मिलेगा।
9 महीनों में बेहतर प्रदर्शन
अगर पिछले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें, तो कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इस अवधि में रेवेन्यू 18.10% बढ़कर ₹683.60 करोड़ हो गया और नेट प्रॉफिट (PAT) ₹9.24 करोड़ रहा।
नए सर्विस सेंटर का इनॉगरेशन
इसके अलावा, कंपनी ने नवी मुंबई के टर्भे में एक नया सर्विस डिलीवरी सेंटर (Service Delivery Center) भी खोला है। यह सेंटर मॉनिटरिंग और साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को मजबूत करेगा।
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
कंपनी का मैनेजमेंट (Management) मानता है कि सेमीकंडक्टर की दिक्कतें फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक जारी रह सकती हैं। यह हार्डवेयर पर निर्भर सेगमेंट्स के लिए चुनौती बना रहेगा। ऐसे में, मैनेज्ड सर्विसेज और साइबर सिक्योरिटी पर कंपनी का फोकस और बढ़ेगा, क्योंकि ये रेवेन्यू के भरोसेमंद सोर्स हैं। एक बड़ा रिस्क यह है कि कंपनी अभी भी 31 मार्च, 2027 तक पुराने फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट्स (Fixed-Price Contracts) से बंधी हुई है, जबकि OEM की लागतें बढ़ रही हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों की नजर अब Q4 FY26 के लिए ₹200 करोड़ के ऑर्डर बुक के एग्जीक्यूशन पर रहेगी। साथ ही, मार्च 2027 के बाद नए प्राइसिंग स्ट्रक्चर का कंपनी के मार्जिन पर क्या असर होगा, यह देखना अहम होगा।