Oracle Share Price: AI की डिमांड से भागा शेयर, पर भारी खर्चों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Oracle Share Price: AI की डिमांड से भागा शेयर, पर भारी खर्चों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता!
Overview

Oracle के शेयर मंगलवार को आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में करीब **10%** चढ़ गए। कंपनी के शानदार तिमाही नतीजों और एनालिस्ट के अनुमानों से बेहतर आउटलुक के चलते यह तेजी आई। AI इंफ्रास्ट्रक्चर रेवेन्यू में **84%** की जबरदस्त ग्रोथ ने निवेशकों को आकर्षित किया।

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AI की बंपर डिमांड से Oracle को बूस्ट

Oracle के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया, जिसका मुख्य कारण कंपनी की AI से जुड़ी क्लाउड सर्विसेज में तूफानी ग्रोथ रही। कंपनी ने बताया कि AI मॉडल बनाने के लिए जरूरी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज से होने वाले रेवेन्यू में ईयर-ओवर-ईयर 84% की भारी बढ़ोतरी हुई है। इस तिमाही में इस सेगमेंट से $4.9 बिलियन का रेवेन्यू आया, जो एनालिस्टों के 79% ग्रोथ के अनुमान से कहीं ज्यादा है। पिछली तिमाही में यह ग्रोथ 68% थी, यानी Oracle ने स्पीड पकड़ ली है।

आउटलुक शानदार, लेकिन खर्चों पर नजर

आगे चलकर भी Oracle के लिए अच्छे दिन रहने की उम्मीद है। कंपनी ने आने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए $90 बिलियन के रेवेन्यू का अनुमान लगाया है, जो मार्केट के $86.7 बिलियन के कंसेंसस अनुमान से ज्यादा है। यह तेजी OpenAI और Meta जैसे बड़े क्लाइंट्स को क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की सप्लाई बढ़ाने के चलते संभव हुई है। हालांकि, इस एक्सपेंशन के लिए Oracle जमकर पैसा खर्च कर रही है। इस तिमाही में कैपिटल स्पेंडिंग बढ़कर $18.6 बिलियन पहुंच गई, जबकि अनुमान सिर्फ $14 बिलियन का था। कंपनी ने फुल-ईयर कैपिटल स्पेंडिंग का अनुमान $50 बिलियन पर बरकरार रखा है। कंपनी के को-CEO Clay Magouyrk ने बताया कि 90% से ज्यादा क्लाउड कैपेसिटी क्लाइंट्स को तय समय से पहले डिलीवर कर दी गई है।

AI डील्स से भविष्य की रेवेन्यू पाइपलाइन मजबूत

Oracle की रिमेनिंग परफॉरमेंस ऑब्लिगेशन्स (RPO) यानी भविष्य में होने वाला कॉन्ट्रैक्टेड रेवेन्यू बढ़कर $553 बिलियन हो गया, जो पिछले $523 बिलियन से ज्यादा है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बड़े AI कॉन्ट्रैक्ट्स के कारण हुई है, जिनमें क्लाइंट्स जरूरी AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर्स के लिए पहले ही भुगतान कर देते हैं। यह बढ़ता हुआ बैकलॉग Oracle की AI सर्विसेज और हार्डवेयर की मजबूत मांग का संकेत देता है।

भारी खर्च और रीस्ट्रक्चरिंग का असर

एक तरफ जहां Oracle AI की बंपर डिमांड भुना रही है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी लागत में कटौती के बड़े कदम भी उठा रही है। कंपनी ने मई में खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर के लिए करीब $1.6 बिलियन की रीस्ट्रक्चरिंग कॉस्ट का खुलासा किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा कॉस्ट-कटिंग एफर्ट है। पिछले हफ्ते ही छंटनी की खबरें भी आई थीं, ताकि ऑपरेशंस को और सुव्यवस्थित किया जा सके। इन सब के बावजूद, Oracle के शेयर सितंबर की अपनी ऊंचाई से लगभग 50% नीचे बने हुए हैं। यह दर्शाता है कि भारी निवेश और रीस्ट्रक्चरिंग के बीच ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को बनाए रखने को लेकर मार्केट में चिंताएं बनी हुई हैं, खासकर Microsoft और Amazon जैसी कंपनियों की तुलना में।

निवेशक की नजर वैल्यूएशन और कॉम्पिटिशन पर

Oracle का फॉरवर्ड P/E रेशियो करीब 30x और मार्केट कैप लगभग $300 बिलियन के आसपास है, जो दिखाता है कि निवेशकों का सेंटिमेंट अभी भी सावधानीपूर्वक आशावादी है। 84% इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ पॉजिटिव है, लेकिन मार्केट इसे कंपनी के भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ संतुलित कर रहा है। पिछला प्रदर्शन मिला-जुला रहा है, जहां वैल्यूएशन की चिंताएं और प्रतिस्पर्धी दबाव अक्सर गिरावट का कारण बने हैं। व्यापक टेक सेक्टर में भी तस्वीर मिली-जुली है। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और AI हार्डवेयर की मांग मजबूत ट्रेंड में है, हालांकि डेटा सेंटर निर्माण में देरी एक चुनौती है। एनालिस्ट्स की राय भी बंटी हुई है। कुछ क्लाउड ग्रोथ के आधार पर 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं, जबकि अन्य Oracle के भारी कैपिटल स्पेंडिंग और क्लाउड व AI सर्विसेज में कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.