भारत में EV बैटरी सप्लाई का नया चेहरा
Ola Electric अब सिर्फ अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के लिए ही बैटरी नहीं बनाएगी, बल्कि अन्य ऑटोमोबाइल निर्माताओं को भी लिथियम-आयन सेल (Lithium-ion Cell) और बैटरी पैक (Battery Pack) सप्लाई करने की योजना बना रही है। यह सप्लाई कंपनी की तमिलनाडु स्थित कृष्णगिरी गीगाफैक्ट्री (Krishnagiri Gigafactory) से की जाएगी, जो भारत की पहली ऑपरेशनल गीगाफैक्ट्री है। इस कदम का लक्ष्य भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री में लोकल सप्लाई चेन को मजबूत करना है, क्योंकि देश फिलहाल बैटरी सेल के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है।
गीगाफैक्ट्री की क्षमता और भविष्य की योजनाएं
Ola Electric की कृष्णगिरी गीगाफैक्ट्री की मौजूदा क्षमता 6 GWh है, जिसे वित्तीय वर्ष 2028 तक 20 GWh तक बढ़ाया जाएगा। कंपनी का अनुमान है कि इस बढ़ी हुई क्षमता का लगभग 6.5 GWh हिस्सा तीसरे पक्ष (third-party) यानी अन्य ऑटोमेकर्स को बेचा जाएगा। Ola Electric ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी टेक्नोलॉजी और R&D में लगभग ₹5,300 करोड़ का भारी निवेश किया है। कंपनी का मानना है कि भविष्य में केवल बैटरी बिजनेस से उसे ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक का रेवेन्यू मिल सकता है। इस प्रोडक्शन में Ola Electric अपनी ख़ास 4680 भारत सेल (4680 Bharat Cell) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी।
भारत का EV परिदृश्य और बढ़ता कॉम्पिटिशन
यह पहल भारत सरकार की EV लोकलईज़ेशन (localization) की मंशा के अनुरूप है। हालांकि, देश में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (Advanced Chemistry Cell) के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का अब तक धीमा रहा है, और 1.4 GWh से ज्यादा प्रोडक्शन नहीं हुआ है, जो कि सिर्फ Ola Electric द्वारा ही कमीशन किया गया है। ऐसे में, Ola Electric का यह कदम सप्लाई चेन में एक बड़ी खाई को भरने का काम कर सकता है।
इस सेक्टर में Ola Electric का मुकाबला Reliance Industries, Tata Group (Agratas Energy Storage Solutions), Amara Raja Batteries और Exide Industries जैसी कंपनियों से है। Tata Group भी गुजरात में 20 GWh का बड़ा लिथियम-आयन सेल प्लांट लगा रहा है।
Ola Electric का अपना प्रदर्शन और चुनौतियां
दूसरी ओर, Ola Electric को अपने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में बिक्री के आंकड़ों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। मार्च 2026 तक 10 लाख की कुल रिटेल बिक्री का आंकड़ा पार करने वाली यह पहली भारतीय EV निर्माता जरूर बनी, लेकिन अप्रैल 2026 में इसका मार्केट शेयर घटकर लगभग 8.2% रह गया। वित्तीय तौर पर, Q3 FY26 में कंपनी ने ₹470 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, लेकिन ₹487 करोड़ का नेट लॉस (net loss) भी हुआ।
भविष्य की राह: रेवेन्यू डाइवर्सिफिकेशन
Ola Electric का यह नया कदम, बैटरी सप्लाई में, उसके लिए रेवेन्यू के नए रास्ते खोलेगा। कंपनी को उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2027 तक ग्रॉस मार्जिन (gross margin) 35% से 40% के बीच स्थिर हो जाएगा। यह रणनीति Ola Electric को भारतीय EV इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा बनाने में मदद कर सकती है, बशर्ते वह कॉम्पिटिशन और मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप की चुनौतियों से पार पा सके।
