भारत की बढ़ती एक्सपोर्ट पावर
भारत ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। खास तौर पर स्मार्टफोन एक्सपोर्ट्स में जबरदस्त तेजी देखी गई है। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच, ये एक्सपोर्ट्स लगभग 50% बढ़कर $15.95 अरब तक पहुंच गए। यह दिखाता है कि भारत मैन्युफैक्चरिंग में कितना आगे बढ़ रहा है और अब यह पुराने प्रोडक्शन सेंटर्स के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरा है। Nothing का यह फैसला, कि वह अमेरिका जैसे बड़े बाजार के लिए भारत से एक्सपोर्ट करेगा, इसी बढ़ते इकोसिस्टम को दर्शाता है। यह देश की बढ़ती अहमियत को बताता है, खासकर उन इंटरनेशनल ब्रांड्स के लिए जो अपनी सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करना चाहते हैं। सरकार की एक्सपोर्ट-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम्स भी भारत के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के सपने को मजबूत कर रही हैं।
Nothing की एक्सपोर्ट स्ट्रेटेजी और प्रोडक्शन
स्मार्टफोन मेकर Nothing ने भारत से अमेरिका के लिए Phone 2(A), 3A सीरीज, और फ्लैगशिप Phone 3 जैसे डिवाइसेज का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। यह एक स्ट्रेटेजिक कदम है जिसके तहत कंपनी भारत को अपना प्राइमरी एक्सपोर्ट बेस बना रही है। इसके लिए Nothing, BYD की चेन्नई स्थित फैसिलिटी का इस्तेमाल कर रही है और भारत से 48 ग्लोबल मार्केट्स को सप्लाई करने की योजना है। Nothing के सब-ब्रांड CMF ने भी Optiemus Electronics के साथ एक ज्वाइंट वेंचर के जरिए लोकल प्रोडक्शन बढ़ाया है, जो भारत में मैन्युफैक्चरिंग के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को और पुख्ता करता है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में जबरदस्त ग्रोथ देखी जा रही है, जिसमें स्मार्टफोन एक्सपोर्ट्स अप्रैल-अक्टूबर 2025 के बीच करीब $16 अरब तक पहुंच गए। भारत के एक्सपोर्ट-ड्रिवन इंसेंटिव प्रोग्राम्स में हिस्सा लेकर Nothing कॉम्पिटिटिव एज हासिल करना चाहती है, जिससे कॉस्ट कम हो सकती है और सप्लाई चेन और मजबूत बन सकती है। यह उन ब्रांड्स के लिए अहम है जिनका ग्लोबल मार्केट शेयर करीब 1.1% है।
सरकारी सपोर्ट दे रहा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट हब के रूप में उभरने में सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी स्कीम्स का बड़ा हाथ है, जिनका मकसद डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना है। इन पॉलिसीज ने बड़ी कंपनियों को आकर्षित किया है। Apple के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स अब भारत के कुल स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का लगभग 75% हिस्सा बनाते हैं। 2025 में Apple ने भारत में 55 मिलियन आईफोन बनाए, जो उसके ग्लोबल प्रोडक्शन का एक चौथाई था, और इससे चीन से शिफ्टिंग में तेजी आई है। Samsung की भी भारत में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्रेजेंस है, जो एक्सपोर्ट वॉल्यूम में योगदान करती है। हालांकि, Xiaomi, Oppo और Vivo जैसे चीनी ब्रांड्स ने काफी हद तक डोमेस्टिक मार्केट पर फोकस किया है, लेकिन सरकारी कोशिशें उन्हें अपने भारतीय प्लांट्स का इस्तेमाल ग्लोबल शिपमेंट्स के लिए करने को प्रोत्साहित कर रही हैं। Nothing के मैन्युफैक्चरर BYD, कम से कम 2019 से चेन्नई में मोबाइल कंपोनेंट्स बना रहा है। Optiemus Electronics, जो CMF ब्रांड के साथ जुड़ा है, उसका इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में लंबा इतिहास रहा है और इसने BlackBerry और LG जैसे ब्रांड्स के लिए भी डिवाइसेज बनाए हैं।
भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में चुनौतियां
हालांकि, Nothing के ग्लोबल एक्सपोर्ट के लिए भारत पर निर्भरता में कुछ बड़े रिस्क भी हैं। सिर्फ 1-2% के ग्लोबल मार्केट शेयर के साथ, यह ब्रांड Apple और Samsung जैसे दिग्गजों की तुलना में छोटा है, जिससे यह मार्केट शिफ्ट्स या ऑपरेशनल दिक्कतों के प्रति ज्यादा वल्नरेबल है। एक मुख्य चिंता इसके मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर BYD को लेकर है। BYD की मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी को लेकर रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें मटेरियल और डिफेक्ट्स की दिक्कतें, साथ ही रिकॉल्स और कुछ मार्केट्स में घटती बिक्री शामिल है। BYD पर फैक्ट्री पोल्यूशन के आरोप भी लगे हैं। CMF के प्रोडक्शन में शामिल Optiemus Electronics ने पहले भी फाइनेंशियल दिक्कतों का सामना किया है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा झेली है। भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम अभी भी बड़े पैमाने पर इंपोर्टेड हाई-वैल्यू कंपोनेंट्स पर निर्भर है, और एडवांस्ड पार्ट्स के लिए एक गहरी, लोकल सप्लाई चेन विकसित करना एक लंबी प्रक्रिया है। चीन की तुलना में लगातार बनी रहने वाली कॉस्ट डिसएडवांटेज और बदलते टैक्स रूल्स भी कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ाते हैं। हाल ही में मेमोरी कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से Nothing के मिड-रेंज मॉडल्स की लागत भी बढ़ रही है।
भारत और प्रमुख खिलाड़ियों का आगे का रास्ता
भारत का ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य, खासकर स्मार्टफोन के लिए, अब काफी रफ्तार पकड़ रहा है। एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और लोकल कंपोनेंट सोर्सिंग पर सरकार का जोर, देश को ग्लोबल वैल्यू चेन में गहराई से जोड़ने की एक परिपक्व इंडस्ट्रियल पॉलिसी का संकेत देता है। Nothing जैसे ब्रांड्स के लिए, यह ऑपरेशंस को बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के अवसर प्रदान करता है। हालांकि, आगे का रास्ता कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी, मार्केट स्केल और लगातार बनी रहने वाली कॉस्ट प्रेशर से जुड़े इनहेरेंट रिस्क को मैनेज करने का है। अंततः, Nothing की एक्सपोर्ट स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन कॉम्प्लेक्सिटीज को कितनी अच्छी तरह नेविगेट कर पाती है, एक हाईली कॉम्पिटिटिव ग्लोबल मार्केट में खुद को अलग कैसे साबित करती है, और अपने निश अपील से आगे बढ़कर लगातार वॉल्यूम ग्रोथ कैसे हासिल करती है।
