भारत के IT सेक्टर के निर्विवाद लीडर्स, Infosys और TCS, अब Nifty IT इंडेक्स से पिछड़ रहे हैं। यह उनके पिछले प्रभुत्व से एक बड़ा बदलाव है। मिड-कैप कंपनियाँ जैसे Persistent Systems और Coforge बेहतर प्रदर्शन दिखा रही हैं, जो दिसंबर 2024 में सेक्टर इंडेक्स के चरम पर पहुँचने के बाद हुआ है। प्राइस-टू-अर्निंग्स (PE) रेशियो में एक चौंकाने वाला अंतर दिखाई दे रहा है। Infosys का PE 43.5% (2021 में 39x से 2025 में 22x) और TCS का 45% (40x से 22x) कम हुआ। इसके विपरीत, Persistent Systems जैसे मिड-कैप का वैल्यूएशन 60x पर बना रहा। Coforge में 11.7% (68x से 50x) की गिरावट आई। यह दर्शाता है कि बाजार अब मिड-कैप IT फर्मों में अधिक विकास की संभावनाओं को महत्व दे रहा है, जबकि प्रमुख लीडर्स को पिछले वर्षों की तुलना में कम आंक रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगभग सभी IT नामों में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं, सिवाय Persistent और Coforge जैसे मिड-कैप्स के, जहाँ होल्डिंग्स स्थिर रही या बढ़ी। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने अपनी पोजीशन बनाए रखी या बढ़ाई है। DIIs ने FIIs की महत्वपूर्ण बिकवाली को संभाला है, जिससे IT सेक्टर एक डिफेंसिव प्ले बन गया है जो घरेलू खरीद, उच्च लाभांश भुगतान (high dividend payouts), और स्टॉक बायबैक से समर्थित है। मिड-कैप स्पेस में Coforge एक अपवाद है। Hulst BV द्वारा एक बड़े स्टेक की बिक्री के बाद FII और DII होल्डिंग्स लगभग 90% हो गई है। स्वामित्व का यह संकेन्द्रण, एक नई फंड-रेजिंग घोषणा के साथ, स्टॉक पर दबाव डाल रहा है। संभावित डाइल्यूशन, कमजोर कैश कन्वर्जन गाइडेंस, और इसके पिछले उच्च वैल्यूएशन के कारण बढ़ी हुई उम्मीदों से जुड़े जोखिमों ने एक नाजुक तकनीकी स्थिति (precarious technical setup) बना दी है। चार्ट एक संभावित वितरण पैटर्न (distribution pattern), एक टूटी हुई सपोर्ट ट्रेंडलाइन, और मंदी के ऑसिलेटर्स (bearish oscillators) दिखा रहे हैं, जिससे 22 जनवरी को आने वाले इसके नतीजे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निफ्टी IT: मिड-कैप्स ने दिग्गजों को पीछे छोड़ा, Infosys और TCS पिछड़ रहे हैं
TECH
Overview
भारत के Nifty IT सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। कभी मार्केट के चहेते रहे Infosys और Tata Consultancy Services अब अपने मिड-कैप साथियों से पिछड़ रहे हैं। Persistent Systems और Coforge व्यापक बाजार गिरावट के बीच मजबूती दिखा रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बाहर निकल रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) बिकवाली का दबाव झेल रहे हैं, IT को एक डिफेंसिव प्ले के रूप में पोजीशन कर रहे हैं, जिसमें मार्केट लीडर्स के लिए PE रेशियो में उल्लेखनीय समायोजन हुआ है।
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