शुक्रवार की तेजी और छिपी हुई चिंताएं
Nifty IT Index शुक्रवार को 2% बढ़कर 27,908 अंक पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों को कुछ सुकून मिला। इस उछाल में Tech Mahindra और Infosys जैसी कंपनियों के शेयर 3% तक चढ़े। यह तेजी 'bargain buying' यानी सस्ते दाम पर खरीदारी और Nasdaq Composite के रिकॉर्ड स्तर पर बंद होने जैसे ग्लोबल फैक्टर्स का नतीजा थी।
साल की शुरुआत से बड़ी गिरावट जारी
हालांकि, शुक्रवार की यह तेजी IT सेक्टर के लिए साल की शुरुआत से अब तक हुए भारी नुकसान को पूरी तरह ढक नहीं पाई है। Nifty IT Index साल 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 26% का गोता लगा चुका है, जबकि Nifty 50 में सिर्फ 9% की गिरावट आई है। यह दिखाता है कि IT सेक्टर बाकी बाज़ार की तुलना में कहीं ज़्यादा दबाव में है। यह इंडेक्स अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर से भी 30% से ज़्यादा नीचे आ चुका है।
वैल्यूएशन (Valuations) पर AI का गहरा असर
इस साल Nifty IT की कंपनियों का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹9 ट्रिलियन कम हुआ है। Oracle Financial Services Software (OFSS) को छोड़कर, बाकी सभी प्रमुख IT कंपनियों के शेयर साल की शुरुआत से ही लाल निशान में हैं। LTIMindtree 35%, Infosys 32%, HCL Tech 31% और TCS 30% तक गिर चुके हैं।
इस भारी गिरावट के कारण इन कंपनियों का 'price-to-earnings (P/E) multiple' भी ऐतिहासिक औसत से काफी नीचे आ गया है। उदाहरण के लिए, TCS 15.3-17.6 के P/E पर ट्रेड कर रहा है, Infosys 14.4-16.48 पर, और HCL Tech 17.5-18.75 पर। यह valuation, Accenture या Capgemini जैसे ग्लोबल प्लेयर्स से भी कम है। यह दिखाता है कि निवेशक AI के कारण भविष्य की ग्रोथ को लेकर कितने आशंकित (skeptical) हैं।
AI: IT बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पारंपरिक भारतीय IT सर्विसेज बिजनेस मॉडल के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि AI के कारण रेवेन्यू में 2-3% सालाना की कमी आ सकती है, जो कुछ सेगमेंट्स में 14-16% तक भी जा सकती है। ऑटोमेशन और कोडिंग जैसे हिस्से, जो इन कंपनियों के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा हैं, AI से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। OpenAI जैसी कंपनियों का एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर में विस्तार, पारंपरिक 'billable-hour model' पर दबाव बढ़ा रहा है।
इसके अलावा, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और बैंकिंग जैसे सेक्टर्स में क्लाइंट्स की धीमी खर्च क्षमता के चलते, निकट भविष्य में रेवेन्यू ग्रोथ 3-4% तक सीमित रहने का अनुमान है।
लंबी अवधि की AI ऑपर्च्युनिटी, पर अभी सतर्कता ज़रूरी
हालांकि, यह भी सच है कि AI भारतीय IT सेक्टर के लिए लंबी अवधि में बाज़ार का आकार (Total Addressable Market) $300-400 बिलियन तक बढ़ा सकता है। लेकिन इसके लिए कंपनियों को AI में भारी निवेश और कर्मचारियों की री-स्किलिंग करनी होगी, जिसमें काफी जोखिम है।
फिलहाल, शेयर की वैल्युएशन आकर्षक दिख रही है, लेकिन ज़्यादातर एनालिस्ट्स AI के प्रति कंपनियों की रणनीति, नए डील मिलने और प्रॉफिट मार्जिन पर बारीकी से नज़र रखने की सलाह दे रहे हैं।