Nasscom में AI का नया अध्याय
भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए यह एक अहम नियुक्ति है। Nasscom ने Fractal Analytics के को-फाउंडर और ग्रुप CEO श्रीकांत वेलमक्कानि को अपना नया चेयरमैन चुना है। AI में अपने व्यापक अनुभव और ग्लोबल मार्केट की समझ के साथ, वेलमक्कानि अब इस इंडस्ट्री बॉडी को AI-संचालित ग्रोथ और इनोवेशन की ओर ले जाएंगे। उनका मुख्य लक्ष्य AI के जरिए सर्विस डिलीवरी ट्रांसफॉर्मेशन (Service Delivery Transformation) को तेज करना और नई Intellectual Property (बौद्धिक संपदा) का विकास करना है। इससे भारत सर्विस-आधारित मॉडल से आगे बढ़कर AI सिस्टम और स्पेशलाइज्ड AI प्रोडक्ट्स बनाने में ग्लोबल लीडर बन सकेगा।
India की AI में धाकड़ छलांग
यह बदलाव तब आया है जब भारत ग्लोबल AI कॉम्पिटिटिवनेस (AI Competitiveness) की रैंकिंग में तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल के अनुसार, भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। भारतीय AI मार्केट के $131 बिलियन से अधिक तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें सालाना ग्रोथ रेट लगभग 42.2% रहने का अनुमान है। 2026 तक ग्लोबल AI खर्च $300 बिलियन को पार कर सकता है। भारत की ताकत में कुशल इंजीनियरों की बड़ी संख्या, फलते-फूलते स्टार्टअप्स और मजबूत टैलेंट अट्रैक्शन शामिल हैं। $2.4 बिलियन वैल्यूएशन वाली Fractal Analytics जैसी कंपनियां भारत के AI इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाती हैं।
Agentic AI और IP पर खास जोर
Fractal, जो अपने एडवांस्ड डेटा एनालिसिस और AI सॉल्यूशंस के लिए जानी जाती है, वेलमक्कानि के नेतृत्व में नई AI टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगी। Fractal अपने रेवेन्यू का 5% R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) पर खर्च करती है, जो इंडस्ट्री की नई टेक्नोलॉजी डिजाइन की जरूरत को दिखाता है। Agentic AI पर जोर देना वैश्विक रुझानों के अनुरूप है, जहां AI एजेंट्स का उपयोग बिजनेस ऑपरेशंस में ऑटोमेशन और जटिल निर्णय लेने में तेजी लाने के लिए बढ़ रहा है। यह फोकस पारंपरिक सर्विस-फोकस से हटकर एडवांस टेक्नोलॉजी और Intellectual Property (बौद्धिक संपदा) के मालिकाना हक की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
AI की राह में चुनौतियाँ
भारत की AI महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक स्थिति के बावजूद, इन योजनाओं को हकीकत में बदलने में कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। सबसे बड़ी समस्या कुशल श्रमिकों की कमी है; अनुमान है कि 2026 तक 1 मिलियन AI प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी, जो वर्तमान टैलेंट पूल से कहीं ज्यादा है। डेटा एक्सेस, क्वालिटी और सुरक्षा भी प्रमुख चिंताएं हैं। कई भारतीय कंपनियां अलग-अलग सिस्टम से डेटा को एक साथ लाने में संघर्ष कर रही हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारी निवेश की आवश्यकता है। इसके अलावा, स्थानीय R&D को लेकर चिंताएं और विदेशी टेक्नोलॉजी पर संभावित निर्भरता भी एक बाधा है। रेगुलेटरी और कंप्लायंस नियमों का पालन करना भी एक जटिल काम है। AI-संचालित ऑटोमेशन से भारतीय IT सेक्टर को भी खतरा है, कुछ विश्लेषक पारंपरिक सेवाओं में राजस्व गिरने की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
आगे का रास्ता
Nasscom का लक्ष्य इन चुनौतियों से पार पाना और AI की परिवर्तनकारी शक्ति का लाभ उठाना है। 'Human + AI' टीमों पर जोर और बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के जरिए कार्यबल को बदलते जॉब मार्केट के लिए तैयार किया जाएगा। AI से जितनी नौकरियां खत्म होंगी, उससे कहीं ज्यादा नई नौकरियां बनने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए आवश्यक स्किल्स में बड़ा बदलाव आएगा। इंडस्ट्री का फोकस अब रिजल्ट-ओरिएंटेड ट्रांसफॉर्मेशन, ROI (रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) में वृद्धि और बिखरे हुए प्रयोगों से हटकर विशिष्ट उद्योगों के लिए AI प्लेटफॉर्म को स्केल करने की ओर बढ़ रहा है। इस दिशा में सफलता भारत की बढ़ती AI प्रतिभा का उपयोग करके इसे ग्लोबल AI लीडर के रूप में मजबूत करने पर निर्भर करेगी।
