आंध्र प्रदेश बनेगा EV बैटरी का गढ़?
आंध्र प्रदेश अब भारत की तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी सप्लाई चेन का एक बड़ा केंद्र बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। NPSPL स्पेशलटी केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने गुडुपल्ले मंडल (Gudupalle mandal), कुप्पम (Kuppam) के पास ₹2,550 करोड़ का भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट (investment) करने का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने अपनी नई 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025-30' के तहत मंजूरी दी है। इसका मकसद बैटरी के लिए जरूरी खास मैटेरियल्स (materials) का लोकल प्रोडक्शन (local production) बढ़ाना है, जिससे भारत का ईवी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर और मजबूत हो सके।
राज्य सरकार की पॉलिसी का कमाल
आंध्र प्रदेश की 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी (2025-30)' इस बड़े कदम के पीछे एक बड़ा सहारा है। यह पॉलिसी राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों को पूरा करने और इम्पोर्ट (import) पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी। NPSPL की यह नई फैसिलिटी 105 एकड़ जमीन पर फैलेगी। आंध्र प्रदेश के आईटी सेक्रेटरी भास्कर कातमेनेनी (Bhaskar Katamneni) ने कन्फर्म किया है कि यह प्रोजेक्ट 'अर्ली-बर्ड इंसेंटिव्स' (early-bird incentives) का हकदार होगा। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसी पॉलिसीज के जरिए बड़े इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना और राज्य की कंपनियों को ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ना है।
मिल रहे हैं बड़े इंसेंटिव्स
NPSPL का यह इन्वेस्टमेंट आंध्र प्रदेश को बैटरी मैटेरियल्स मैन्युफैक्चरिंग के फील्ड में एक लीडर के तौर पर स्थापित करेगा। राज्य सरकार की पॉलिसी के तहत, इस प्रोजेक्ट को 60% कैपिटल इंसेंटिव (capital incentive) और 10 साल तक ₹2 प्रति यूनिट पावर कॉस्ट (power cost) पर छूट जैसे शानदार फायदे मिलेंगे। यह पहल भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम फॉर एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज (Advanced Chemistry Cell Battery Storage) का ही हिस्सा है, जिसका मकसद घरेलू क्षमता बढ़ाना और ग्लोबल बैटरी सप्लाई चेन में चीन के दबदबे को चुनौती देना है।
आगे की राह और चुनौतियाँ
हालांकि, यह प्रोजेक्ट कुछ रिस्क (risk) के साथ भी आता है। NPSPL, जो मार्च 2025 में ही बनी एक नई कंपनी है, एक बेहद कॉम्पिटिटिव (competitive) और तेजी से बदलते स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर में कदम रख रही है। भारत की बैटरी बनाने की महत्वाकांक्षाएं लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे इम्पोर्टेड रॉ मैटेरियल्स पर निर्भर हैं, जिससे भू-राजनीतिक जोखिम (geopolitical risks) और कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहता है। प्रोजेक्ट की सफलता बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन को कुशलता से बढ़ाने पर निर्भर करेगी ताकि ग्लोबल कॉम्पिटिटर्स (competitors) से मुकाबला किया जा सके।
भविष्य का आउटलुक
NPSPL का यह इन्वेस्टमेंट इंडस्ट्री में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है। Aether Industries और Himadri Speciality Chemicals जैसी कंपनियां भी बैटरी मैटेरियल्स में पैसा लगा रही हैं। अनुमान है कि भारतीय ईवी बैटरी मार्केट 2030 तक करीब $2.03 बिलियन तक पहुंच सकता है। आंध्र प्रदेश का फोकस इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा हासिल करना है। यह प्रोजेक्ट लगभग 400 नौकरियां पैदा करेगा और अहम कंपोनेंट्स का लोकल प्रोडक्शन बढ़ाएगा, जिससे ऊर्जा भंडारण (energy storage) के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
