Ather Energy Share: NIIF ने बेचे शेयर! कमाई बढ़ी पर EBITDA गिरा, निवेशकों में चिंता?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Ather Energy Share: NIIF ने बेचे शेयर! कमाई बढ़ी पर EBITDA गिरा, निवेशकों में चिंता?
Overview

इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाने वाली कंपनी Ather Energy के लिए NIIF (National Investment and Infrastructure Fund) ने **₹233 करोड़** में अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। यह कदम ऐसे समय आया है जब कंपनी ने अपनी तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें रेवेन्यू (Revenue) में **50%** की जबरदस्त बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन EBITDA (Earnings Before Interest, Tax, Depreciation, and Amortisation) में **₹140 करोड़** से घटकर **₹72 करोड़** रह गया है।

NIIF का एग्जिट और मिश्रित नतीजे

NIIF ने 10 फरवरी, 2026 को Ather Energy के 32.79 लाख शेयर बेचकर ₹233 करोड़ की डील पूरी की। यह बिक्री तब हुई जब Ather Energy ने अपनी तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी किए, जिनमें कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 50% बढ़कर ₹953.6 करोड़ तक पहुंच गया। साथ ही, नेट लॉस (Net Loss) भी ₹197.6 करोड़ से घटकर ₹83.6 करोड़ पर आ गया। लेकिन, चिंता की बात यह है कि कंपनी का EBITDA पिछले साल के ₹140 करोड़ की तुलना में इस तिमाही में घटकर सिर्फ ₹72 करोड़ रह गया। यह टॉप-लाइन ग्रोथ और ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी (Operational Profitability) के बीच बड़ा अंतर दिखाता है, जिससे कंपनी के ग्रोथ मॉडल पर सवाल उठ रहे हैं। NIIF ने इससे पहले नवंबर 2025 में भी कम कीमतों पर कुछ हिस्सेदारी बेची थी, जो इस चिंता को और बढ़ाती है।

वैल्यूएशन का सवाल और कॉम्पिटिशन

Ather Energy का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) फिलहाल करीब ₹27,000 करोड़ है, जो प्राइस-टू-बुक रेशियो (Price-to-Book Ratio) के हिसाब से करीब 10.2 गुना है। इसके बावजूद, कंपनी लगातार बड़े नुकसान में चल रही है, TTM (Trailing Twelve Months) नेट लॉस करीब ₹6.51 अरब है और EBITDA मार्जिन ऐतिहासिक रूप से निगेटिव रहा है। इसकी तुलना में, Ather के मुख्य प्रतिद्वंद्वी Ola Electric ने फाइनेंशियल ईयर 2024 में ₹5009.8 करोड़ का रेवेन्यू, ₹1584.4 करोड़ का प्रॉफिट और ₹1034.1 करोड़ का पॉजिटिव EBITDA दर्ज किया था। यहां तक कि Tata Motors के EV डिविजन ने भी पॉजिटिव EBITDA हासिल किया है। Ather Energy की आय का 14% हिस्सा नॉन-व्हीकल रेवेन्यू (जैसे सॉफ्टवेयर सेल्स) से आता है, जिसे CEO तरुण मेहता लाभप्रदता बढ़ाने का जरिया बताते हैं, लेकिन यह मुख्य व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग के ऑपरेशनल नुकसान की भरपाई नहीं कर पा रहा।

EBITDA में गिरावट का गहरा कारण

Ather Energy के हालिया प्रदर्शन में सबसे बड़ा विरोधाभास रेवेन्यू ग्रोथ और EBITDA में गिरावट के बीच है। कंपनी का एडजस्टेड ग्रॉस मार्जिन (Adjusted Gross Margin) 111% बढ़कर ₹251.3 करोड़ हो गया, लेकिन कुल EBITDA पिछले साल की तुलना में लगभग 50% गिर गया। इसका मतलब है कि मैन्युफैक्चरिंग, सेल्स और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों जैसे ऑपरेशनल खर्चे रेवेन्यू से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जिससे ऑपरेशनल स्तर पर लाभ कम हो रहा है। पिछले पांच सालों का औसत EBITDA मार्जिन -77.22% रहा है। हालांकि Ather अगले साल तक EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, लेकिन इस साल EBITDA में आई गिरावट और बढ़ती प्रतिस्पर्धा व कच्चे माल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी (जो Mahindra & Mahindra जैसी कंपनियों को भी प्रभावित कर रही है) के चलते इस लक्ष्य को हासिल करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

बड़े निवेशक की राय और मार्केट शेयर का जोखिम

NIIF जैसे बड़े निवेशक का बाहर निकलना, खासकर जब कंपनी रेवेन्यू बढ़ा रही हो, तो यह भविष्य की कमाई की संभावनाओं के पुनर्मूल्यांकन का संकेत हो सकता है। Ather Energy को प्रीमियम प्रोडक्ट पोजिशनिंग और टेक्नोलॉजी के बावजूद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पहला, लगातार ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने में इसकी ऐतिहासिक असफलता, जो निगेटिव EBITDA मार्जिन से जाहिर होती है। दूसरा, बढ़ती प्रतिस्पर्धा। TVS Motor और Bajaj Auto जैसी पुरानी कंपनियां EV सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं, जबकि Ola Electric मार्केट शेयर और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में आगे है। Ather की प्रीमियम स्कूटर और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर मॉडल की रणनीति इसे अलग करती है, लेकिन इसके मुकाबले इसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क छोटा है। कंपनी को अपनी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट की श्रेष्ठता को स्केलेबल और सस्टेनेबल प्रॉफिटेबिलिटी में बदलना होगा, तभी यह अपनी मौजूदा वैल्यूएशन को सही ठहरा पाएगी। NIIF द्वारा हाल ही में की गई ब्लॉक डील (Block Deal) इस बात का शुरुआती संकेत हो सकती है कि अगर ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) में तेज़ी नहीं आई तो वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है।

सेक्टर की चाल और भविष्य की राह

भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है, और आने वाले सालों में EVs की हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान है। सरकारी सब्सिडी और बढ़ती पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें इस मांग को बढ़ा रही हैं। हालांकि, इस सेक्टर में कंसॉलिडेशन (Consolidation) भी तेज़ हो रहा है, जहां पुरानी कंपनियां मार्केट शेयर बढ़ा रही हैं और प्रॉफिटेबिलिटी एक अहम पैमाना बन गई है। Ather Energy की प्रीमियम रणनीति, टेक्नोलॉजी में निवेश और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस इसे प्रीमियम सेगमेंट में एक महत्वपूर्ण प्लेयर बनाता है। कंपनी नए बाज़ारों में विस्तार और डिस्ट्रीब्यूशन से मिलने वाले ऑपरेशनल लीवरेज (Operational Leverage) के ज़रिए भविष्य में ग्रोथ हासिल करने की उम्मीद कर रही है। लेकिन, लगातार प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना और तीखी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी राह बनाना, Ather Energy के लिए अपनी ग्रोथ की गति बनाए रखने और इस डायनामिक मार्केट में अपनी क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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