नुवामा की 'Buy' रेटिंग और ₹3,200 का टारगेट:
एक तरफ जहां IT इंडस्ट्री कई चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं Mphasis के मजबूत नतीजे ब्रोकरेज फर्म नुवामा के लिए खास रहे। नुवामा ने कंपनी पर अपना 'Buy' रेटिंग बनाए रखा है और शेयर के लिए ₹3,200 का नया टारगेट प्राइस सेट किया है। यह मौजूदा शेयर भाव से लगभग 42% की शानदार बढ़त का संकेत देता है। यह आउटलुक कंपनी की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के बेहतरीन परफॉरमेंस के बाद आया है। कंपनी ने पिछले 5 सालों की 9.97% की सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) को पीछे छोड़ते हुए, साल-दर-साल 14.36% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹4,242.67 करोड़ का आंकड़ा छुआ। साथ ही, नेट प्रॉफिट में 14.14% की बढ़ोतरी ने इसे ₹509.64 करोड़ तक पहुंचाया।
AI डील्स ने भरी उड़ान:
नुवामा के पॉजिटिव रुख की एक बड़ी वजह Mphasis का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर मजबूत फोकस है। Q4 FY26 में कंपनी की नई डील्स का 64% हिस्सा AI से जुड़ा था, जिससे कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) $407 मिलियन तक पहुंच गई। कंपनी का ओवरऑल पाइपलाइन भी 38% बढ़ा है, जिसमें से लगभग 69% AI से संबंधित है। Mphasis अपने 'NeoIP' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके AI सॉल्यूशंस को इंटीग्रेट कर रही है, ताकि इस बढ़ते बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सके। यह AI की ओर कंपनियों का झुकाव इस बात का संकेत है कि वे अब सिर्फ शुरुआती दौर (pilot projects) से आगे बढ़कर फुल-स्केल AI डिप्लॉयमेंट की ओर बढ़ रही हैं।
BFSI बना सहारा, TMT में नरमी:
Mphasis का मुख्य फोकस बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेगमेंट पर है, जिसने Q4 FY26 में 17.4% की जोरदार साल-दर-साल ग्रोथ दर्ज की। यह सेगमेंट कंपनी के लिए एक बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है। हालांकि, इस एक सेगमेंट पर ज्यादा निर्भरता जोखिम भी पैदा करती है। वहीं, टेक्नोलॉजी, मीडिया और टेलीकॉम (TMT) सेगमेंट में प्रोजेक्ट्स पूरे होने और क्लाइंट के फैसलों में देरी के कारण कुछ नरमी देखी गई।
वैल्यूएशन प्रीमियम और इंडस्ट्री की मुश्किलें:
अपने मजबूत नतीजों के बावजूद, Mphasis का शेयर वैल्यूएशन प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 23-24x है, जो IT सेक्टर के औसत 21x से थोड़ा ज्यादा है। यह Persistent Systems या Coforge (जिनका P/E 39x से ऊपर है) जैसे स्पेशलिस्ट्स से कम है, लेकिन Wipro (15.95x) जैसे बड़े प्लेयर्स से काफी ज्यादा है। यह वैल्यूएशन प्रीमियम तब है जब पूरी इंडियन IT इंडस्ट्री AI-ड्रिवन डिफ्लेशनरी प्रेशर का सामना कर रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि ये प्रेशर पारंपरिक IT सर्विसेज के रेवेन्यू को सालाना औसतन 3.5% तक कम कर सकते हैं, जिससे मार्जिन और भविष्य की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
मार्जिन और कंसंट्रेशन रिस्क पर नजर:
निवेशक Mphasis के ऑपरेटिंग मार्जिन (FY26 के लिए लगभग 15.3%) की स्थिरता पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं। यह देखना होगा कि AI क्षमताओं में लगातार निवेश और AI के डिफ्लेशनरी प्रभाव से बढ़ते प्राइसिंग प्रेशर के बीच ये मार्जिन कैसे बने रहते हैं। AI पर खर्च बढ़ने से पारंपरिक IT सर्विसेज के लिए बजट शिफ्ट हो सकता है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स और रिन्यूअल पर प्राइसिंग कम हो सकती है। इसके अलावा, BFSI पर भारी निर्भरता Mphasis को इस सेक्टर की आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील बनाती है। पिछले साल स्टॉक में 7-9% की गिरावट इन चिंताओं को दर्शाती है।
भविष्य की राह और विश्लेषकों की अलग-अलग राय:
आगे चलकर, Mphasis अपनी AI क्षमताओं को और गहरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिसके लिए उसने Theory and Practice (TAP) का अधिग्रहण भी किया है। कंपनी FY27 के लिए हाई सिंगल-डिजिट से लो डबल-डिजिट ग्रोथ की उम्मीद कर रही है, भले ही सेक्टर व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा हो। ज्यादातर एनालिस्ट 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बनाए हुए हैं, जिनका एवरेज प्राइस टारगेट ₹2,700-₹2,800 के बीच है, लेकिन व्यक्तिगत अनुमानों में काफी अंतर है। यह अंतर Mphasis के भविष्य की ग्रोथ और उसके सही वैल्यूएशन मल्टीपल्स पर अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर करता है।
