AI डील्स से रेवेन्यू ग्रोथ को मिली रफ्तार
Mphasis के चौथी तिमाही, FY26 के नतीजे शानदार रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू 14.4% बढ़कर ₹4,242.67 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि नेट प्रॉफिट 14.1% की उछाल के साथ ₹509.64 करोड़ दर्ज किया गया। इस बेहतरीन परफॉरमेंस के पीछे AI-केंद्रित डील्स का बड़ा हाथ रहा। कंपनी की पाइपलाइन का लगभग 69% और FY26 के कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) का 60% AI डील्स से आया, जिनका कुल मूल्य $2.1 बिलियन रहा। यह प्रदर्शन कंपनी की पांच साल की औसत बिक्री वृद्धि दर से काफी बेहतर है। डायरेक्ट रेवेन्यू में 9.2% की वृद्धि हुई। EBIT मार्जिन पिछले तिमाही के 15.2% से बढ़कर 15.4% हो गया। बोर्ड ने FY26 के लिए ₹62 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की भी सिफारिश की है।
प्रीमियम वैल्यूएशन और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
हालांकि, Mphasis का स्टॉक अपने प्रमुख भारतीय IT प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। कंपनी का पिछले बारह महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) अनुपात लगभग 23-24x है। इसकी तुलना में, Tata Consultancy Services (TCS) करीब 17.0x, Infosys 16.0x और Wipro लगभग 14.43x पर ट्रेड कर रहे हैं। यह प्रीमियम वैल्यूएशन चिंताजनक है, खासकर तब जब Mphasis की ऐतिहासिक ग्रोथ रेट पिछले पांच सालों में इंडस्ट्री औसत से पिछड़ती रही है।
"AI Deflation" का खतरा
पूरे IT सेक्टर के लिए एक बड़ा खतरा 'AI Deflation' का है, जो भविष्य में कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। यह तब होता है जब AI की वजह से होने वाली दक्षता (efficiency) का इस्तेमाल मौजूदा IT सेवाओं के लिए कम कीमतें वसूलने में किया जाता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगले कुछ सालों में यह स्थिति इस सेगमेंट में सालाना 2-3% रेवेन्यू की कमी ला सकती है। भले ही AI नए बिजनेस और डील्स के मौके खोल रहा है, लेकिन पुरानी सेवाओं की कीमतों में कमी इन फायदों को खत्म कर सकती है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनके पास कई मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। यह अनिश्चितता पैदा करता है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मौजूदा प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखा जा सकेगा।
संरचनात्मक जोखिम और विश्लेषकों की राय
AI Deflation के अलावा भी संरचनात्मक जोखिम (structural risks) मौजूद हैं। विश्लेषकों का कहना है कि लागत में कटौती और AI अपनाने पर केंद्रित बड़े प्रोजेक्ट्स को लागू करना मुश्किल हो सकता है और भयंकर मूल्य प्रतिस्पर्धा (price competition) के कारण कम मार्जिन का सामना करना पड़ सकता है। Mphasis का मार्केट शेयर समय के साथ थोड़ा कम हुआ है, भले ही हालिया तिमाही प्रदर्शन मजबूत रहा हो। Motilal Oswal, Choice Institutional Equities और Nuvama जैसी फर्मों द्वारा 'Buy' या 'Outperform' रेटिंग की सिफारिशों के बावजूद, उनके प्राइस टारगेट में काफी भिन्नता है। कुछ विश्लेषण 'Hold' रेटिंग की ओर झुकाव दिखाते हैं, जो सावधानी का संकेत देते हैं। Nomura की 'Neutral' रेटिंग भी निवेशकों के बीच अलग-अलग विचारों को दर्शाती है।
भविष्य की राह और मैनेजमेंट में निरंतरता
आगे चलकर, Mphasis से FY26 से FY29 तक सालाना लो डबल-डिजिट (low double-digit) की रेंज में रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ की उम्मीद है। कंपनी का AI और NeoIP प्लेटफॉर्म पर फोकस इसकी प्रमुख ताकतें मानी जाती हैं। हालांकि, इन प्रयासों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और AI Deflation के लगातार जोखिम से चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। स्टॉक की कीमत, जो वर्तमान में लगभग ₹2,276.70 पर कारोबार कर रही है (30 अप्रैल 2026 तक 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे), अल्पावधि प्रदर्शन (short-term performance) के बारे में कुछ निवेशक सावधानी का संकेत देती है। CEO Nitin Rakesh की अगले पांच वर्षों के लिए फिर से नियुक्ति से मैनेजमेंट में निरंतरता बनी रहेगी।
