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AI का कमाल! भारत की IT इंडस्ट्री पर Morgan Stanley का बड़ा दावा - बढ़ेंगे हाई-स्किल्स वाले जॉब्स!

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI का कमाल! भारत की IT इंडस्ट्री पर Morgan Stanley का बड़ा दावा - बढ़ेंगे हाई-स्किल्स वाले जॉब्स!
Overview

Morgan Stanley की लेटेस्ट रिपोर्ट ने भारत के IT सेक्टर को लेकर एक बड़ी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट कहती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस सेक्टर को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। AI की वजह से रूटीन जॉब्स कम होकर अब ज्यादा स्किल्स वाले जॉब्स की मांग बढ़ रही है, और भारत ग्लोबल सर्विस एक्सपोर्ट्स में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

AI से भारत की IT इंडस्ट्री में बहार!

Morgan Stanley की एक नई रिपोर्ट ने उन चिंताओं को दूर कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कहीं भारत की ग्लोबल टेक सर्विसेज में अहमियत कम न कर दे।

रिपोर्ट के मुताबिक, AI रूटीन (routine) कामों को ऑटोमेट (automate) कर रहा है, जिससे उन एरिया में ग्रोथ धीमी हुई है। लेकिन, यही AI अब ज्यादा कॉम्प्लेक्स (complex) और हाई-स्किल्स (high-skills) वाली नौकरियों की मांग बढ़ा रहा है। यह बदलाव भारत के जॉब मार्केट को पहले से ही आकार दे रहा है, जिसके लिए लगातार अडैप्ट (adapt) करना जरूरी है।

ग्लोबल सर्विसेज एक्सपोर्ट्स में भारत का दबदबा जारी

भारत ग्लोबल IT और बिजनेस सर्विसेज एक्सपोर्ट्स में अपनी लीडिंग पोजिशन (leading position) बनाए हुए है। Morgan Stanley के डेटा के अनुसार, देश का वर्ल्ड मार्केट शेयर काफी बड़ा है।

इतना ही नहीं, भारत नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में भी आगे है। AI यूजर्स की ग्लोबल रैंकिंग में भारत दूसरे नंबर पर है, जो काम के डिस्ट्रीब्यूशन (distribution) को प्रभावित करने वाले टूल्स को अपनाने के प्रति भारत के एक्टिव अप्रोच (active approach) को दिखाता है।

आर्थिक जोखिम और भारत की मजबूती

हालांकि, AI के पॉजिटिव असर के बावजूद, Morgan Stanley ने कुछ बड़े बाहरी जोखिमों (risks) पर भी ध्यान दिलाया है। इनमें कमोडिटी (commodity) प्राइसेज, खासकर तेल की कीमतें, सबसे ऊपर हैं।

भारत कच्चे तेल, नेचुरल गैस और अन्य जरूरी चीजों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर है। ऐसे में, जियोपॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tensions) से इंपोर्ट्स (imports) पर असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई (inflation) बढ़ सकती है, करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) चौड़ा हो सकता है और इकोनॉमिक ग्रोथ धीमी हो सकती है।

इसके बावजूद, भारत पिछली साइकिल्स (cycles) की तुलना में इस दौर में ज्यादा मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक (macroeconomic) फाउंडेशन के साथ उतर रहा है। स्टेबल इन्फ्लेशन (stable inflation), बेहतर एक्सटर्नल बैलेंस (external balances) और पॉलिसी फ्लेक्सिबिलिटी (policy flexibility) इसे सहारा दे रहे हैं।

लंबे समय तक चलने वाले डिसरप्शन्स (disruptions) ग्रोथ और स्टेबिलिटी के लिए डाउनसाइड रिस्क (downside risks) पैदा कर सकते हैं। इसलिए, डोमेस्टिक इकोनॉमिक एक्टिविटी (domestic economic activity) और स्टेबल कैपिटल इनफ्लोज़ (capital inflows) ग्लोबल वोलेटिलिटी (volatility) के खिलाफ अहम बफर (buffer) बने रहेंगे।

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