क्यों फिसले MobiKwik के शेयर?
मंगलवार, 12 मई 2026 को, फिनटेक कंपनी MobiKwik Systems Limited के शेयर 3% से ज्यादा गिरकर ₹219.70 पर आ गए। यह गिरावट कंपनी के चौथी तिमाही (FY26) के नतीजे जारी होने के बाद आई। नतीजों में मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹4.11 करोड़ रहा, जो दिसंबर 2025 की तिमाही के ₹4.25 करोड़ की तुलना में मामूली कमी दर्शाता है। वहीं, रेवेन्यू भी पिछली तिमाही के ₹286.26 करोड़ से घटकर ₹282.15 करोड़ हो गया। यह पिछली तिमाही के मुकाबले ग्रोथ में आई सुस्ती निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी।
साल भर में घाटे से मुनाफे में वापसी
इन नतीजों ने पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी राहत दी है। MobiKwik ने मार्च 2026 की तिमाही में ₹4.11 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹55.71 करोड़ का भारी घाटा हुआ था। ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में भी सुधार देखा गया, EBITDA ₹19.52 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹43.71 करोड़ के घाटे से काफी बेहतर है। EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 6.7% हो गया, जो पिछले साल के निगेटिव आंकड़े से काफी ऊपर है।
₹55 करोड़ का नया निवेश और भविष्य की योजना
कंपनी ने अपने मर्चेंट पेमेंट्स बिजनेस को मजबूत करने के लिए ₹55 करोड़ के नए निवेश की घोषणा भी की है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि यह नया निवेश FY28 तक इस बिजनेस को दस गुना बढ़ा देगा। MobiKwik का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब $1.5 बिलियन है।
फिनटेक सेक्टर का दबाव और एनालिस्ट्स की राय
यह नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब पूरा फिनटेक सेक्टर दबाव में है। MobiKwik के प्रतिद्वंद्वी जैसे Paytm, PhonePe और Google Pay पहले से ही मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। लिमिटेड एनालिस्ट कवरेज के बीच, कुछ ने 'होल्ड' रेटिंग दी है और लक्ष्य ₹230-₹240 के आसपास रखा है। यह बाजार के मिले-जुले रुख को दर्शाता है, जहां निवेशक कंपनी की रिकवरी क्षमता को देख रहे हैं, लेकिन साथ ही नई योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सतर्क हैं।
मर्चेंट पेमेंट में विस्तार का जोखिम
मर्चेंट पेमेंट सेगमेंट में ₹55 करोड़ का निवेश एक अहम जोखिम है। भारत के तेजी से बदलते डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में फोनपे और गूगल पे जैसे दिग्गजों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है। MobiKwik को इस क्षेत्र में मजबूत पैठ बनाने के लिए खास टेक्नोलॉजी और मार्केट शेयर हासिल करने की जरूरत होगी। मैनेजमेंट का दस गुना ग्रोथ का लक्ष्य भारी खर्च की मांग करता है और यह देखना होगा कि कंपनी अपने मौजूदा मुनाफे को प्रभावित किए बिना निवेश पर रिटर्न कैसे सुनिश्चित करती है। इसके अलावा, बदलते रेगुलेशन भी कंपनी के लिए अप्रत्याशित लागतें या परिचालन संबंधी बाधाएं खड़ी कर सकते हैं।
