MobiKwik का प्रॉफिट, फिर भी शेयर धड़ाम! इन्वेस्टर हुए एग्जिट, जानें वजह

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
MobiKwik का प्रॉफिट, फिर भी शेयर धड़ाम! इन्वेस्टर हुए एग्जिट, जानें वजह
Overview

फिनटेक कंपनी MobiKwik ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में **₹4.4 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछली बार के **₹56 करोड़** के घाटे से बड़ी वापसी है। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब कंपनी मुनाफे में रही है। हालांकि, इन सकारात्मक खबरों के बावजूद, इन्वेस्टर सेंटीमेंट कमजोर नजर आ रहा है, जिसके चलते स्टॉक में **11%** की भारी गिरावट देखी गई और एक अर्ली इन्वेस्टर ने अपने सभी शेयर बेच दिए।

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MobiKwik की दमदार वापसी, लगातार दूसरी बार मुनाफे में

MobiKwik Systems Limited ने घाटे के दौर को पीछे छोड़ते हुए, लगातार दूसरी तिमाही में मुनाफा दर्ज किया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी ₹4.38 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाने में सफल रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹56 करोड़ का घाटा था। यह शानदार वापसी कंपनी के खर्चों को कंट्रोल करने और लेंडिंग ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करने का नतीजा है।

रेवेन्यू में भी आई 8% की तेज़ी

कंपनी के ऑपरेशन्स से रेवेन्यू में साल-दर-साल 8% की बढ़ोतरी हुई है और यह ₹289 करोड़ पर पहुंच गया। यह बढ़त रिचार्ज, लोन सर्विसिंग और पेमेंट गेटवे सेवाओं से मिले कमीशन के कारण हुई। इस तिमाही में कंपनी का कुल खर्च घटकर ₹279 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹324 करोड़ था। EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortization) भी पॉजिटिव रहा और ₹17.4 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल यह ₹45.8 करोड़ के घाटे में था।

NBFC लाइसेंस से भविष्य की राह आसान

MobiKwik को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने की मंजूरी भी मिल गई है। इससे कंपनी अब अपने इन-हाउस लेंडिंग बिजनेस को बढ़ा सकेगी और भविष्य में रेवेन्यू को और बढ़ाने का लक्ष्य रखेगी। भारतीय फिनटेक सेक्टर में डिजिटल पेमेंट्स जैसे UPI और डिजिटल लेंडिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन RBI (Reserve Bank of India) के रेगुलेशन भी सख्त हो रहे हैं। ऐसे में, NBFC लाइसेंस MobiKwik के लिए एक बड़ी स्ट्रैटेजिक चाल है।

घाटे में सिमरती हुई, लेकिन FY26 का निचला स्तर

पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 (जो मार्च 2026 में खत्म हुआ) की बात करें तो, रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में करीब 4% की गिरावट आई और यह ₹1,119 करोड़ रहा। हालांकि, सालाना नेट लॉस घटकर ₹62 करोड़ रह गया, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹122 करोड़ था। कंपनी की बुक वैल्यू पर शेयर ₹66.6 है, जबकि ROCE (Return on Capital Employed) -14.6% और ROE (Return on Equity) -32.4% रहा।

इन्वेस्टर क्यों हुए चिंतित?

इन सकारात्मक नतीजों के बावजूद, मार्केट में इन्वेस्टर की चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं। 12 मई 2026 को MobiKwik के शेयर 11% तक गिर गए, जिससे कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन करीब ₹220 करोड़ कम हो गया। इस गिरावट की वजह एक बड़े अर्ली इन्वेस्टर, Peak XV Partners का कंपनी से पूरा एग्जिट रहा। उन्होंने अपनी 7.7% हिस्सेदारी करीब ₹130 करोड़ में बेची। यह बिक्री कीमत पिछले किसी सेल प्राइस से करीब 70% कम बताई जा रही है, जिसने कंपनी की वैल्यूएशन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की राह और चुनौतियां

MobiKwik का NBFC लाइसेंस से इन-हाउस लेंडिंग को सफल बनाना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। डिजिटल लेंडिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन RBI के नियमों और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना होगा। PhonePe और Paytm जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ कॉम्पिटिशन भी कड़ा है। इसके अलावा, पेमेंट प्रोसेसिंग कॉस्ट अब भी कंपनी के कुल खर्चों का 41% से ज्यादा है। कंपनी ऑफलाइन/ऑनलाइन मर्चेंट एक्वायरिंग और AI का उपयोग जैसी नई ग्रोथ एरिया पर भी फोकस कर रही है। मार्केट अब इस बात पर नज़र रखेगा कि MobiKwik लगातार मुनाफा और रेवेन्यू ग्रोथ कैसे बनाए रखती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.