MobiKwik की फाइनेंसियल परफॉरमेंस में बड़ा सुधार देखने को मिला है। कंपनी के को-फाउंडर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, उपासना टकु के अनुसार, ऑपरेटिंग लेवरेज में हुई बढ़ोतरी और कंपनी के विस्तार पर फोकस करने के चलते यह संभव हुआ है। पिछले कुछ क्वार्टर में कंज्यूमर क्रेडिट में आई गड़बड़ियों के कारण कंपनी को नुकसान उठाना पड़ा था, लेकिन अब EBITDA में पॉजिटिव टर्न आया है। Q2 FY26 में ₹6 करोड़ का नेगेटिव EBITDA दर्ज हुआ था, जो अब सुधर गया है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहेगी, हालांकि मार्जिन में थोड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है।
मार्केट शेयर बढ़ाने पर ज़ोर
डिजिटल पेमेंट कंपनी MobiKwik अब अपने मार्केट शेयर को बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। मौजूदा समय में डिजिटल वॉलेट स्पेस में 18-20% मार्केट शेयर के साथ लीड कर रही MobiKwik, अब UPI पेमेंट ऐप्स में अपनी 12वीं पोजीशन से टॉप 10 में आने का लक्ष्य बना रही है। इसके साथ ही, बिल पेमेंट सेक्टर में भी वह सातवें स्थान से ऊपर बढ़ने की कोशिश में है। कंपनी के कुल पेमेंट्स GMV ने लगातार 12 क्वार्टर से ग्रोथ दर्ज की है, जो कंपनी की लगातार बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
UPI ट्रांजैक्शन पर MDR की वकालत
उपासना टकु ने UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की वकालत की है। उनका कहना है कि बड़े मर्चेंट्स, जो हर महीने ₹1 करोड़ से ज़्यादा का बिज़नेस करते हैं, या जो क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग के लिए फीस देते हैं, उन्हें UPI सेवाओं के लिए भी कुछ शुल्क देना चाहिए। MobiKwik का मानना है कि मौजूदा मॉडल, जिसमें पेमेंट कंपनियां और बैंक UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के भारी ऑपरेशनल और डेवलपमेंटल खर्च खुद उठा रहे हैं, वह लंबा नहीं चल सकता। उन्होंने सुझाव दिया है कि ₹40 लाख से ₹1 करोड़ के मासिक रेवेन्यू वाले मर्चेंट्स या ₹2,000 से ₹5,000 से ज़्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है, जबकि छोटे ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे।
पर्सनल लोन में जोरदार उछाल
पेमेंट सेवाओं के अलावा, MobiKwik की फाइनेंशियल सर्विसेज ब्रांच पर्सनल लोन डिस्बर्समेंट के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। अपना 'Buy Now Pay Later' (BNPL) प्रोडक्ट बंद करने के बाद, Q3 FY26 में पर्सनल लोन डिस्बर्समेंट ₹900 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹400 करोड़ से काफी ज़्यादा है। कंपनी को इस सेगमेंट में डबल-डिजिट एनुअल ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके लिए वह 4 बड़े नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और 6 छोटी लेंडिंग फर्म्स के साथ मिलकर काम कर रही है।
कॉम्पिटिशन और रेगुलेशन
MobiKwik, भारत के बेहद प्रतिस्पर्धी डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में काम करती है, जहाँ PhonePe और Google Pay जैसे बड़े प्लेयर्स का दबदबा है। UPI में 12वीं पोजीशन होना, स्थापित खिलाड़ियों के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करता है। UPI MDR लागू करने का प्रस्ताव, हालांकि MobiKwik जैसी कंपनियों के लिए सस्टेनेबिलिटी की ज़रूरत बताता है, लेकिन यह एक जटिल रेगुलेटरी माहौल का सामना कर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी UPI MDR की संभावनाओं का आकलन कर रहा है।
आगे की राह
MobiKwik की आक्रामक मार्केट शेयर ग्रोथ और लेंडिंग के ज़रिए रेवेन्यू डाइवर्सिफिकेशन की स्ट्रेटेजी भविष्य के परफॉरमेंस को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। कंपनी का ऑपरेटिंग लेवरेज पर फोकस, कंसिस्टेंट प्रॉफिटेबिलिटी की राह दिखा सकता है। हालांकि, UPI मर्चेंट फीस पर चल रही बहस एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है, जो कंपनी के भविष्य की कमाई के रास्ते खोल सकती है या नए विवाद खड़ा कर सकती है।