भारत बनेगा सेमीकंडक्टर का पावरहाउस!
AI की बढ़ती डिमांड ने Micron Technology के लिए भारत में बड़ा मौका खोल दिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया है कि Micron का नया भारतीय प्लांट अब कंपनी के ग्लोबल प्रोडक्शन का 10% तैयार करेगा। यह जबरदस्त प्रोडक्शन ग्रोथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर्स के लिए मेमोरी चिप्स की बेतहाशा मांग की वजह से हो रही है। मंत्री ने साफ किया कि यह मांग किसी भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical conflicts) से नहीं, बल्कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से आ रही है, जो ग्लोबल कंप्यूटिंग पावर की जरूरतों को बदल रहा है।
सरकारी योजनाओं से मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट
यह डेवलपमेंट सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के अनुरूप है। खासतौर पर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत सरकार ने ₹61,671 करोड़ के 29 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनसे करीब 65,000 नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, और स्कीम के तहत स्वीकृत 75 में से 28 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी, एक्सपोर्ट बढ़ेगा
नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता को काफी कम करेंगी। अनुमान है कि घरेलू मांग पूरी हो जाएगी, जैसे कैपेसिटर (16%), कनेक्टर्स (33%), और लिथियम-आयन सेल्स (61%)। भारत का लक्ष्य लैमिनेट्स के लिए 100% घरेलू मांग पूरी करना और इस सेगमेंट में ग्लोबल सप्लायर बनना है। आयात पर दशकों की निर्भरता के बाद, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स का नेट एक्सपोर्टर बनना एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
क्वालिटी और डिजाइन पर फोकस
मंत्री वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री से क्वालिटी पर खास ध्यान देने को कहा है, जैसे कि सिक्स सिग्मा (Six Sigma) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल। उन्होंने डिजाइन, सप्लाई चेन और टैलेंट डेवलपमेंट में क्षमताएं बढ़ाने पर जोर दिया, क्योंकि असली वैल्यू डिजाइन से आती है और इसे भारत में ही किया जाना चाहिए। सरकार भविष्य में भी इस सेक्टर को पॉलिसी सपोर्ट देती रहेगी और राष्ट्रीय हितों के हिसाब से योजनाओं में बदलाव भी कर सकती है।