Libra की नाकामी से मिला सबक, पार्टनरशिप पर फोकस
Meta Platforms अपने Stablecoin इंटीग्रेशन के लिए अब 'आर्म्स लेंथ' यानी 'दूरी बनाए रखने' वाली रणनीति अपना रहा है। यह Libra और Diem प्रोजेक्ट्स के डायरेक्ट कंट्रोल वाले मॉडल से बिल्कुल अलग है। इस नई योजना के तहत, Meta थर्ड-पार्टी वेंडर का इस्तेमाल करेगा जो स्टेबलकॉइन-आधारित पेमेंट्स को संभालेगा और नई वॉलेट इंफ्रास्ट्रक्चर लागू करेगा।
Stripe बन सकता है Meta का नया 'मैच'
इस दौड़ में Stripe का नाम सबसे आगे चल रहा है। अक्टूबर 2024 में, Stripe ने स्टेबलकॉइन स्पेशलिस्ट Bridge को $1.1 बिलियन में खरीदकर अपनी क्षमताएं काफी मजबूत की हैं। यह अधिग्रहण Stripe को Meta के लिए एक मजबूत पार्टनर के तौर पर स्थापित करता है। Meta अपनी विशाल यूजर बेस (Facebook, WhatsApp, Instagram) का इस्तेमाल करके आसानी से पेमेंट कर सकेगा, जिससे सोशल कॉमर्स और क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस (विदेशों से पैसे भेजना) जैसे क्षेत्रों में ग्रोथ की उम्मीद है।
बदलता रेगुलेटरी माहौल और Meta की राह
Meta के इस कदम के पीछे अमेरिका का बदलता रेगुलेटरी माहौल भी एक बड़ी वजह है। जुलाई 2025 में पारित हुए GENIUS Act ने पेमेंट स्टेबलकॉइन्स के लिए एक फेडरल फ्रेमवर्क तैयार किया है। इस कानून के तहत रिजर्व रिक्वायरमेंट, ऑडिट स्टैंडर्ड तय किए गए हैं और यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये टोकन सिक्योरिटीज नहीं माने जाएंगे। इस रेगुलेटरी स्पष्टता से स्टेबलकॉइन्स को पेमेंट टूल के तौर पर अपनाने का रास्ता साफ हुआ है।
Meta का पिछला Libra प्रोजेक्ट 2019 में लॉन्च हुआ था, लेकिन फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और डेटा प्राइवेसी को लेकर कड़े नियामक और कानूनी विरोध का सामना करना पड़ा था। Libra/Diem के बंद होने के पीछे यही मुख्य कारण थे। Meta की वर्तमान रणनीति, जिसमें वह बाहरी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है, वह पिछले विरोध को दोहराने से बचने का एक सीधा प्रयास है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, नियामक माहौल बेहतर हुआ है, लेकिन जोखिम अभी भी बने हुए हैं। GENIUS Act के नियमों को पूरी तरह लागू होने में अभी समय लगेगा (संभावित जनवरी 2027 तक)। Stripe और Bridge जैसे थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स पर निर्भरता Meta के कंट्रोल को सीमित कर सकती है। Libra/Diem के अनुभव और मेटा के प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी डेटा प्राइवेसी की चिंताओं का असर भी यूजर्स और नियामकों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अन्य टेक कंपनियां भी 'सुपर ऐप' बनने की होड़ में पेमेंट फंक्शनैलिटी को इंटीग्रेट कर रही हैं, जिससे बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा है।
विश्लेषकों का Meta Platforms पर भरोसा बना हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप लगभग $1.61 ट्रिलियन है और P/E रेश्यो करीब 27.4 है। एनालिस्ट्स ने इसे 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग दी है और औसतन $860 का प्राइस टारगेट रखा है। Meta की अपनी यूजर बेस का फायदा उठाकर पेमेंट सर्विसेज में विस्तार करने की क्षमता, खासकर अनुभवी पार्टनर्स के साथ, नए रेवेन्यू स्ट्रीम खोल सकती है और डिजिटल इकोनॉमी में इसकी स्थिति को मजबूत कर सकती है।